उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में रविवार को यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों के विरोध में सवर्ण समाज और यूजीसी मुक्ति मोर्चा का भारी उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। जिले के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से पहुंचे करीब 1500 प्रदर्शनकारी युवक लगभग 200 ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतर आए। आंदोलनकारी आगरा-नोएडा यमुना एक्सप्रेस-वे तक पहुंच गए और कलेक्ट्रेट का घेराव करने की जिद पर अड़ गए। इस दौरान पुलिस और पीएसी के जवानों ने बुलडोजर, जेसीबी और क्रेन लगाकर रास्ता ब्लॉक करने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित प्रदर्शनकारी पुलिस का सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ गए। इस आगरा यूजीसी विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद यमुना एक्सप्रेस-वे पर करीब 20 मिनट तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को लाठी फटकार कर उपद्रवियों को खदेड़ना पड़ा।
नाकेबंदी तोड़ खेतों के रास्ते आगे बढ़े प्रदर्शनकारी यूजीसी मुक्ति मोर्चा ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत रविवार को जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) के घेराव का आह्वान किया था। आंदोलन की आहट मिलते ही पुलिस-प्रशासन शनिवार देर शाम से ही अलर्ट मोड पर आ गया था। पुलिस ने जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर थाना खंदौली क्षेत्र के मुड़ी चौराहे को छावनी में तब्दील कर दिया और चारों तरफ से रास्ते सील कर दिए थे। हालांकि, शनिवार रात से ही मुड़ी चौराहे पर जुटने लगे आंदोलनकारियों ने पुलिस की घेराबंदी को धत्ता बता दिया। रविवार सुबह जैसे ही प्रदर्शन शुरू हुआ, सैकड़ों युवक ट्रैक्टरों पर तिरंगा लगाकर खेतों और कच्चे रास्तों के जरिए कलेक्ट्रेट की ओर कूच करने लगे।

रास्ते में मुड़ी चौराहे से 3 किलोमीटर आगे नदाऊ चौराहे पर पुलिस ने भारी हाइड्रा और जेसीबी मशीनें खड़ी कर पक्का बैरियर लगा दिया था। दोपहर लगभग 12 बजे के आसपास माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस द्वारा खड़ी की गई बुलडोजर और जेसीबी पर चढ़ गए और गाड़ियों को आगे दौड़ाने लगे। पुलिसकर्मी उन्हें रोकने के लिए पीछे-पीछे दौड़े। जब मुख्य सड़क पूरी तरह बंद मिली, तो ट्रैक्टरों का काफिला खेतों से होता हुआ आगे निकल गया और 300 मीटर दूर यमुना एक्सप्रेस-वे पर जा पहुंचा।
एक्सप्रेस-वे पर 20 मिनट जाम, पुलिस पर पथराव की कोशिश यमुना एक्सप्रेस-वे पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचोबीच खड़े होकर ट्रैफिक रोक दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मौके पर मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के काफी समझाने-बुझाने के बाद युवाओं ने एक्सप्रेस-वे खाली किया और ज्ञापन सौंपा। हालांकि, ज्ञापन देने के बाद भी युवाओं का एक बड़ा गुट कलेक्ट्रेट घेराव पर अड़ा रहा और नाऊ की सराय की तरफ से शहर में घुसने की कोशिश करने लगा।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›पुलिस बल ने नाऊ की सराय पर दोबारा घेराबंदी कर ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान उग्र युवाओं और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और तकरार बढ़ गई। कुछ अराजक तत्वों ने रास्ते में खड़े पुलिस के ट्रकों और जेसीबी पर पत्थर भी फेंके। माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने सख्त रुख अपनाया और लाठियां पटककर उपद्रवियों को खदेड़ दिया। यह पूरा हंगामा उस्मानपुर गांव से शुरू होकर करीब 7 किलोमीटर के दायरे में लगभग 5 घंटे तक चला।
20 दिनों के भीतर आगरा में तीसरा बड़ा आंदोलन आगरा में यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 20 दिनों के भीतर जिला मुख्यालय घेराव और हाईवे जाम का यह तीसरा बड़ा मामला है:
- 1 सितंबर: क्षत्रिय सभा के बैनर तले सैकड़ों युवाओं ने बाइक रैली निकालकर एत्मादपुर तहसील पहुंचे थे और नेशनल हाईवे जाम कर दिया था। पुलिस लाठीचार्ज के आरोपों के बाद हुए हंगामे में एक दरोगा को निलंबित भी किया गया था।
- 18 सितंबर: सवर्ण समाज और सिस्टम सुधार संगठन ने एत्मादपुर से कलेक्ट्रेट तक विशाल ट्रैक्टर मार्च निकाला था। पुलिस नाकेबंदी के बावजूद आगरा-कानपुर हाईवे पर 5 घंटे तक गहमागहमी चली थी, जिसके बाद प्रशासन ने डिप्टी सीएम से वार्ता कराई थी।
- 20 सितंबर: यूजीसी मुक्ति मोर्चा के बैनर तले 1500 युवाओं ने मुड़ी चौराहे से प्रदर्शन शुरू कर यमुना एक्सप्रेस-वे पर 20 मिनट तक जाम लगाया और कलेक्ट्रेट कूच का प्रयास किया।
प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक यूजीसी से जुड़े विवादित नियमों को वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। वहीं, पुलिस-प्रशासन ने साफ किया है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।