उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित एक राज्यस्तरीय कार्यक्रम के दौरान पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के 912 नवनियुक्त अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में कानून-व्यवस्था की मजबूत स्थिति, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और महिला सुरक्षा को लेकर सरकार का संकल्प दोहराया। उन्होंने अपराधियों और अराजक तत्वों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि राज्य में अब कोई भी व्यक्ति किसी बेटी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस नहीं कर सकता। यदि कोई ऐसा करता है, तो वह सीधे तौर पर अपने 'डेथ वारंट' (मृत्युदंड) पर खुद दस्तखत कर रहा है।

बेटियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की तुलना वर्तमान स्थिति से करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में राज्य में दंगे, माफिया का दबदबा और लंबे समय तक कर्फ्यू आम बात थी। बरेली, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में महीनों दंगे चलते थे और माफिया का वर्चस्व इतना अधिक था कि प्रशासनिक व न्यायिक अधिकारियों तक के वाहनों को रोक दिया जाता था। उस दौर में कानून-व्यवस्था की बदहाली के कारण आम नागरिक अपनी बेटियों को बाहर पढ़ाने भेजने से डरते थे। हालांकि, अब स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। राज्य में अब कोई भी माफिया खुलेआम असलहा लहराकर नहीं घूम सकता और न ही कोई दंगा करने की हिम्मत कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर दंगों की मॉक ड्रिल भी कराती है ताकि सुरक्षा बल हर विषम स्थिति से निपटने के लिए सदैव तैयार रहें।

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और साढ़े नौ लाख नौकरियों का आंकड़ा भर्ती प्रक्रियाओं में हुए व्यापक सुधारों पर प्रकाश डालते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले पुलिस और अन्य सरकारी नौकरियों में भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और पेपर लीक का बोलबाला था। परीक्षा कोई और देता था और नियुक्ति किसी अन्य व्यक्ति को मिल जाती थी, जिससे योग्य युवाओं में भारी निराशा व्याप्त थी। वर्तमान सरकार ने भर्ती आयोगों और बोर्डों की कार्यप्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं तथा ग्रुप-3 और ग्रुप-4 के पदों से साक्षात्कार (इंटरव्यू) की व्यवस्था समाप्त की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दे चुकी है, और आगामी 6 महीनों में एक लाख अन्य नौजवानों को जॉइनिंग लेटर सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

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पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प और 110 एकड़ जमीन कब्जा मुक्त पुलिस बल के आधुनिकीकरण पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में जब उन्होंने स्वयं निरीक्षण किया, तो पुलिसकर्मी जर्जर खपरैल के बैरकों में सोने को मजबूर थे। इसके बाद सरकार ने अवस्थापना ढांचे में सुधार करते हुए 56 जिलों में अत्याधुनिक पुलिस बैरक बनाए और दशकों से लंबित पुलिस लाइनों का निर्माण कराया। पूर्व में खत्म की जा चुकी पीएसी की 34 कंपनियों को पुनर्गठित किया गया। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा की आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए हर जिले में साइबर थाने स्थापित किए गए और राज्य का पहला फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट बनाया गया। फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के लिए भूमि की खोज के दौरान यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करके पुलिस विभाग की 110 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग की तैयारी थी। सरकार ने इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई और भू-माफियाओं के सरेंडर के बाद पूरी जमीन को पुलिस विभाग के नाम वापस दर्ज कराया।

कर्तव्यनिष्ठा का पाठ और पुलिस बल का ऐतिहासिक विस्तार कार्यक्रम में मौजूद राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने शायरी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना की और नवनियुक्त कर्मचारियों को अहंकार से दूर रहकर संवेदनशीलता के साथ जनता की सेवा करने का परामर्श दिया। वहीं, पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा ने बताया कि 2017 के बाद से अब तक पुलिस विभाग में अराजपत्रित श्रेणी में 2,56,258 सीधी भर्तियां और 1,54,572 पदोन्नतियां पूरी की जा चुकी हैं। वर्तमान में 35 हजार नई सीधी भर्तियों और 9 हजार से अधिक पदोन्नतियों की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में पुलिस प्रशिक्षण क्षमता को भी 6 हजार से बढ़ाकर 60,244 कर दिया गया है ताकि जवानों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और कार्य माहौल उपलब्ध कराया जा सके।

 

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