पेरिस: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब यूरोप के ईंधन बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। France Oil Crisis के बीच देश के करीब 11 फीसदी पेट्रोल पंपों पर कम से कम एक तरह का ईंधन—पेट्रोल या डीजल—उपलब्ध नहीं है। यानी मोटे तौर पर हर नौ में से एक पेट्रोल पंप को आपूर्ति संबंधी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। फ्रांस सरकार के 18 सितंबर के आंकड़ों में यह स्थिति दर्ज की गई।
हर 9 में से 1 पेट्रोल पंप प्रभावित
फ्रांस सरकार के आधिकारिक ईंधन-आपूर्ति पोर्टल के मुताबिक 18 सितंबर सुबह 9 बजे तक देश में 89 फीसदी स्टेशन बिना किसी आपूर्ति समस्या के चल रहे थे, जबकि 11 फीसदी स्टेशन कम से कम एक पेट्रोल या डीजल उत्पाद की कमी से प्रभावित थे।
क्षेत्रीय स्तर पर भी स्थिति अलग-अलग रही। Grand Est में करीब 16 फीसदी स्टेशन प्रभावित थे, जबकि Centre-Val de Loire और Occitanie में यह आंकड़ा 14 फीसदी रहा।
मिडिल ईस्ट के तनाव का असर
फ्रांस में ईंधन की यह परेशानी ऐसे समय बढ़ी है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण तेल की वैश्विक आपूर्ति और परिवहन मार्गों को लेकर चिंता बनी हुई है। फ्रांस सरकार ने भी कहा है कि देश में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति पर मौजूदा दबाव का संबंध मिडिल ईस्ट, खासकर Hormuz और Bab-el-Mandeb से जुड़ी परिस्थितियों से है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›हालांकि फ्रांसीसी सरकार के अनुसार यह स्थिति पूरी तरह कच्चे तेल की कमी नहीं है। लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर दबाव भी पेट्रोल पंपों तक ईंधन पहुंचने में समस्या की बड़ी वजह है। सरकार ने कुछ रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाने और मेंटेनेंस को टालने जैसे कदम भी उठाए हैं।
सऊदी अरब की सप्लाई में भी रुकावट
यूरोप के लिए स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण हुई है क्योंकि सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद वहां से यूरोपीय रिफाइनरों को कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई। रिपोर्ट के मुताबिक Saudi Aramco ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग ग्राहकों को अक्टूबर में टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत कच्चा तेल नहीं देने की जानकारी दी है।
इससे यूरोपीय खरीदारों को वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल जुटाने की कोशिश करनी पड़ रही है।
मैक्रॉन ने G7 से मांगा बड़ा कदम
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने ऊर्जा संकट पर G7 बैठक बुलाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बैठक में रणनीतिक तेल और ईंधन भंडार को जरूरत पड़ने पर जारी करने या उपलब्ध कराने के विकल्पों पर चर्चा की जाएगी।
मैक्रॉन का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार इस सप्ताह Brent crude करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में इसमें कुछ गिरावट आई।
संकट कितना बड़ा है?
फिलहाल उपलब्ध आंकड़े फ्रांस में पूर्ण ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं दिखाते। ज्यादातर पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन करीब 11 फीसदी स्टेशनों पर कम से कम एक ईंधन की कमी दर्ज होना सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव का संकेत है।
फ्रांस सरकार का कहना है कि वह ईंधन की आपूर्ति सुरक्षित रखने, रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाने और लॉजिस्टिक बाधाओं को कम करने के लिए कदम उठा रही है। दूसरी ओर, मैक्रॉन G7 स्तर पर रणनीतिक भंडार और ऊर्जा आपूर्ति के समन्वय को लेकर बातचीत आगे बढ़ाना चाहते हैं।