निर्वाचन आयोग (Election Commission) के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूचियों (Voter List) के सत्यापन में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं। वोटर लिस्ट की सघन जांच के दौरान मतदाता रिकॉर्ड में तकनीकी खामियां और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी (तार्किक विसंगति) मिलने पर चुनाव आयुक्त, केंद्रीय मंत्रियों और दिग्गज राजनेताओं सहित कई वीवीआईपी (VVIPs) को नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी प्रतिष्ठित हस्तियों को अपने पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों के जरिए मतदाता रिकॉर्ड को स्पष्ट करने के लिए कहा गया है। यह कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य चुनावी रिकॉर्ड को सटीक और त्रुटिहीन बनाना है।

चुनाव आयुक्त और विदेश मंत्री का नाम भी शामिल इस वीवीआईपी नोटिस लिस्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम खुद चुनाव आयुक्त एसएस संधू का है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उनके मामले में नाम की स्पेलिंग (वर्तनी) में अंतर पाया गया है। यानी मतदाता रिकॉर्ड में दर्ज नाम और उनके अन्य दस्तावेजों में मौजूद नाम की स्पेलिंग एक जैसी नहीं मिली है। इसी तरह, देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी केएस जयशंकर को भी निर्वाचन कार्यालय की ओर से नोटिस जारी हुआ है। चुनावी रिकॉर्ड के सघन सत्यापन के दौरान इनके नाम भी सामने आए हैं, जिसके बाद दोनों से अपने वर्तमान और पुराने दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है।

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पुराने रिकॉर्ड से मैच नहीं हुए कई दिग्गजों के नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की इस जारी सूची में दिग्गज राजनेताओं के नाम भी बहुतायत में हैं। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनका परिवार, तथा विदेश सचिव विक्रम मिसरी के नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं। कपिल सिब्बल और विक्रम मिसरी के मामलों में नोटिस जारी करने की वजह यह बताई गई है कि पिछली SIR लिस्ट के रिकॉर्ड से उनके मौजूदा नाम का मिलान (मैपिंग) नहीं हो पाया है। पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मौजूदा जानकारी को लिंक करना SIR की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इसके अलावा, इस सूची में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी का नाम भी प्रमुखता से दर्ज है। सार्वजनिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम भी इसमें शामिल हैं।

क्या है SIR नोटिस और इसका असल मतलब? स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) निर्वाचन आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची में दर्ज जानकारी को पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान दस्तावेजों से बारीकी से मिलाया जाता है। इस दौरान यदि नाम की स्पेलिंग में अंतर, पते में बदलाव, पुराने रिकॉर्ड से जानकारी का मेल न खाना या कोई अन्य गलती सामने आती है, तो संबंधित मतदाता को नोटिस जारी किया जाता है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस नोटिस का अर्थ किसी भी तरह से मतदाता की पात्रता (Voter Eligibility) पर सवाल उठाना या वोटर लिस्ट से सीधे तौर पर नाम काटना नहीं है। इसका एकमात्र उद्देश्य मतदाता से संपर्क कर विसंगतियों को दूर करना और एक पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है।

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