उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जिले के थाना शेरकोट क्षेत्र के वाजिदपुर इलाके में आतिशबाजी के कचरे की चपेट में आने से दो मासूम बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए हैं। यह हादसा उस वक्त हुआ जब दोनों बच्चे रोजमर्रा की तरह जंगल में मवेशियों के लिए घास काटने के लिए गए हुए थे। अचानक हुए इस दर्दनाक हादसे से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से दोनों झुलसे हुए बच्चों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई है और इस गंभीर मामले की सघनता से जांच कर रही है।
बंद पड़े भट्टे पर पड़ा था ज्वलनशील कचरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा वाजिदपुर क्षेत्र में स्थित एक पुराने और काफी समय से बंद पड़े ईंट भट्टे पर हुआ। बताया जा रहा है कि इस खाली पड़े भट्टे से महज 400 मीटर की दूरी पर ही एक आतिशबाजी (पटाखा) बनाने की फैक्ट्री संचालित होती है। आशंका जताई जा रही है कि इसी फैक्ट्री का बचा हुआ ज्वलनशील और खतरनाक कचरा गुपचुप तरीके से इस बंद भट्टे के पास डंप किया गया था। कचरे में मौजूद रासायनिक तत्वों या बारूद के अंश के कारण वहां खतरनाक स्थिति उत्पन्न हुई, जिसके बारे में मासूम बच्चों को कोई अंदाजा नहीं था। खुले में इस तरह से ज्वलनशील कचरा फेंकना सीधे तौर पर फैक्ट्री संचालकों की किसी बड़ी लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।

घास काटने जंगल गए थे रोहित और सागर
इस दर्दनाक हादसे के शिकार हुए बच्चों की पहचान रोहित और सागर के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, दोनों बच्चे घर से पास के जंगल में घास काटने के इरादे से निकले थे। काम करते-करते वे अनजाने में उस बंद पड़े भट्टे के पास पहुंच गए जहां यह आतिशबाजी का कचरा पड़ा हुआ था। तभी अचानक वहां आग भड़क उठी या विस्फोट जैसी स्थिति बन गई, जिसकी चपेट में आकर रोहित और सागर बुरी तरह झुलस गए। बच्चों की दर्दनाक चीख-पुकार सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े और उन्हें उस सुलगते कचरे के ढेर से दूर निकाला।
पुलिस कर रही मामले की गहन जांच
घटना की भनक लगते ही बच्चों के परिजनों में कोहराम मच गया और रो-रोकर उनका बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए दोनों बच्चों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की टीम द्वारा उनका सघन उपचार किया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही शेरकोट थाने की पुलिस भी दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर वहां मौजूद आतिशबाजी के कचरे के सैंपल लिए हैं और आसपास के लोगों से गहन पूछताछ शुरू कर दी है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›इस पूरी घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि आम रास्तों के पास खुले में आतिशबाजी का कचरा फेंकना जानलेवा लापरवाही है। पुलिस प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में यह खतरनाक कचरा वहां किसने फेंका था। पुलिस का साफ कहना है कि इस मामले में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल, प्रशासन की पहली प्राथमिकता झुलसे हुए बच्चों की जान बचाना और उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराना है।