मेरठ: दिल्ली से मेरठ तक का सफर अब एक्सप्रेसवे के जरिए करीब 45 मिनट में पूरा होने की बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने खुद सोशल मीडिया पोस्ट में साझा की है। सोमवार को मेरठ दौरे पर पहुंचे नबीन ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को आधुनिक भारत की कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर बताया। उन्होंने लिखा कि जिस सफर में कभी तीन घंटे से ज्यादा लगते थे, वह अब करीब 45 मिनट में पूरा हो जाता है।

नबीन ने अपने पोस्ट में एक्सप्रेसवे को भारतमाला परियोजना से जुड़ा बताते हुए इसकी तारीफ की और इसे ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ती आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्था का उदाहरण बताया।

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लेकिन एक्सप्रेसवे से उतरकर मेरठ शहर में प्रवेश करते ही तस्वीर काफी अलग नजर आती है। शहर की कई प्रमुख सड़कों पर लंबे समय से चल रहे निर्माण, जगह-जगह खुदाई, गड्ढों और ट्रैफिक अव्यवस्था से लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

45 मिनट के सफर के बाद शहर में शुरू होती है असली परीक्षा

मेरठ में सीएम ग्रिड योजना के तहत कई प्रमुख मार्गों पर निर्माण कार्य चल रहा है। गढ़ रोड पर गांधी आश्रम से तेजगढ़ी के बीच सड़क निर्माण सितंबर 2025 से चल रहा है। पहले काम दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य था, फिर इसे जून 2026 तक बढ़ाया गया और अब अधिकारियों ने 15 अक्टूबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य बताया है। निर्माण के दौरान धूल, जाम और यातायात की परेशानी को लेकर स्थानीय लोगों और कारोबारियों की शिकायतें सामने आती रही हैं।

वेस्टर्न कचहरी रोड की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सड़क निर्माण शुरू हुए एक साल पूरा होने पर स्थानीय लोगों ने हाल ही में प्रतीकात्मक रूप से इसकी ‘बरसी’ मनाई।

साकेत से किला रोड तक लोगों की परेशानी

शहर के कई हिस्सों में सड़क और निर्माण कार्यों की वजह से यातायात प्रभावित है। साकेत, जसवंत राय अस्पताल के आसपास का इलाका हो, किला रोड, मवाना रोड या वेस्टर्न कचहरी रोड—लोगों की शिकायत है कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात व्यवस्था और सड़क की स्थिति को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखते।

शहर की दूसरी सड़कों पर गड्ढों को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। खुद मेरठ के मेयर हरिकांत अहलूवालिया ने 12 सितंबर को निर्माण विभाग के अभियंताओं के साथ बैठक कर गड्ढायुक्त सड़कों और निर्माण कार्य में सुस्ती पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने एक सप्ताह में शहर की गड्ढायुक्त सड़कों को ठीक करने के निर्देश दिए थे।

एक सड़क का काम खत्म नहीं, दूसरी जगह खुदाई

शहर में लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि एक जगह निर्माण पूरा होने का इंतजार खत्म नहीं होता, दूसरी सड़क पर खुदाई शुरू हो जाती है। इससे वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों और आसपास के दुकानदारों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।

हाल ही में कासमपुर में सीवर/पाइपलाइन की खुदाई के बाद सड़क पर बने गहरे गड्ढे में बाइक सवार गिरकर घायल हो गया था। स्थानीय लोगों ने उसे गड्ढे से बाहर निकाला।

यानी समस्या सिर्फ सड़क की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, निर्माण के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन भी बड़ा सवाल है।

डिवाइडर बन गया, बीच में पुराने खंभे अब भी?

शहर के कई निर्माणाधीन मार्गों पर लोगों की शिकायत है कि सड़क का स्वरूप बदला जा रहा है, डिवाइडर बनाए जा रहे हैं, लेकिन पुराने बिजली/अन्य खंभों को समय रहते हटाने या शिफ्ट करने का काम पूरा नहीं हो रहा। ऐसे स्थानों पर वाहन चालकों के लिए अतिरिक्त सावधानी की जरूरत पड़ती है।

ऐसी स्थिति में सवाल यह है कि सड़क निर्माण की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय कितना है और क्या सड़क बनाने से पहले बिजली, सीवर, पाइपलाइन और अन्य यूटिलिटी का काम पूरा कराया जा रहा है?

बेगमपुल पर भी सड़क की हालत सवालों में

मेरठ का बेगमपुल शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल है। यहां भी सड़क की खराब स्थिति और निर्माण कार्य को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की शानदार कनेक्टिविटी से शहर के भीतर की सड़कों तक पहुंचने वाला सफर कई जगह फिर धीमा और मुश्किल हो जाता है।

सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, समयसीमा का है

नितिन नबीन ने अपने पोस्ट में जिस आधुनिक कनेक्टिविटी की तारीफ की, उसका फायदा तभी पूरी तरह महसूस होगा जब एक्सप्रेसवे से उतरने के बाद शहर की अंदरूनी सड़कें भी सुरक्षित, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से तैयार हों।

मेरठ में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन सड़कों पर महीनों से निर्माण चल रहा है, उनका काम वास्तव में कब पूरा होगा और तब तक लोगों की सुरक्षा व यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा?

शहर की सड़कों को लेकर प्रशासन और नगर निगम की ओर से समयसीमा और काम की प्रगति पर लगातार दावे किए जा रहे हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि ये दावे जमीन पर कब दिखाई देते हैं।

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