नई दिल्ली: भारत के माइनिंग (खनन) और मेटल्स सेक्टर में अब बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है। इस व्यापक बदलाव का मुख्य आधार डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन और भरोसेमंद डेटा होगा। नई दिल्ली में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की ओर से आयोजित 'डिजिटलाइजेशन, एआई, ऑटोमेशन एंड टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन इन माइनिंग एंड मेटल्स' के तीसरे संस्करण में उद्योग और सरकार के शीर्ष विशेषज्ञों ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की। सम्मेलन का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से भारत के खनन क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, टिकाऊ और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।

एआई और टेक्नोलॉजी से माइनिंग सेक्टर में बढ़ेगी पारदर्शितासम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद और कोयला, खान एवं इस्पात मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सदस्य डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा कि माइनिंग सेक्टर में एआई और डिजिटलाइजेशन पूरी तस्वीर बदल सकते हैं। उन्होंने बताया कि इन नई तकनीकों के जरिए खनन गतिविधियों की बेहतर निगरानी, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन संभव हो सकेगा। डॉ. पात्रा ने डेटा को उद्योग और समाज के बीच भरोसे का सेतु बताया। उनका मानना है कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से खनन ईकोसिस्टम अधिक जवाबदेह और पर्यावरण के अनुकूल बनेगा, जिससे समाज और माइनिंग कंपनियों के बीच विश्वास और मजबूत होगा।

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रक्षा और सामरिक क्षेत्रों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स जरूरीभारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति में माइनिंग की अहम भूमिका पर रक्षा उत्पादन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दिनेश महुर ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) और एडवांस्ड मैटेरियल्स केवल कच्चे माल नहीं हैं, बल्कि ये इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, एयरोस्पेस और डिफेंस (रक्षा) जैसे सामरिक क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारत को एक तकनीकी रूप से उन्नत विनिर्माण अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य खनन और धातु ईकोसिस्टम की मजबूती से ही हासिल होगा। इसके लिए सरकार, स्टार्टअप्स, रक्षा निर्माताओं और टेक्नोलॉजी कंपनियों के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता है।

भविष्य की प्रतिस्पर्धा और वास्तविक समस्याओं का समाधानतकनीक के व्यावहारिक उपयोग को लेकर भी विशेषज्ञों ने कई अहम सुझाव दिए। फिक्की नॉन-फेरस मेटल्स कमेटी के मेंटर एस.के. रूंगटा ने प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, ऑटोनॉमस (स्वचालित) उपकरण, ड्रोन, जीपीएस आधारित फ्लीट मैनेजमेंट और एआई आधारित समाधानों को भविष्य की प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार बताया। उन्होंने कहा कि माइनिंग सेक्टर में एआई और इनोवेशन से ही प्रोडक्टिविटी में सुधार लाया जा सकता है।

वहीं, जेएसडब्ल्यू (JSW) ग्रुप के कार्यकारी उपाध्यक्ष और फिक्की माइनिंग कमेटी के सह-अध्यक्ष डॉ. पंकज सतीजा ने स्पष्ट किया कि मुख्य उद्देश्य सिर्फ ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी को अपनाना नहीं होना चाहिए। इसके बजाय, तकनीक का उपयोग खनन क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने और स्पष्ट परिणाम हासिल करने के लिए होना चाहिए।

इस दो दिवसीय फिक्की सम्मेलन में केपीएमजी (KPMG) के साथ मिलकर एक संयुक्त रिपोर्ट भी जारी की गई। इसमें बताया गया है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए भारत को लो-ग्रेड अयस्क और स्क्रैप का उपयोग बढ़ाना होगा। सम्मेलन में नीति निर्माताओं, स्टार्टअप्स और तकनीकी दिग्गजों ने डिजिटल माइनिंग के भविष्य पर मंथन किया।

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