नई दिल्ली/अहमदाबाद। मल्टीप्लेक्स चेन PVR INOX में नकद भुगतान स्वीकार नहीं किए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। अहमदाबाद के एक वकील उत्कर्ष दवे ने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजकर कथित ‘कैशलेस-ओनली’ व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। मामला अहमदाबाद के पैलेडियम मॉल स्थित PVR INOX से जुड़ा है, जहां 13 सितंबर को फिल्म देखने पहुंचे दवे के मुताबिक, उन्हें टिकट और बाद में फूड काउंटर पर नकद भुगतान के बजाय डिजिटल/UPI से भुगतान करने को कहा गया।
टिकट और फूड काउंटर पर नकद भुगतान का दावा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दवे ने दावा किया कि टिकट के लिए उन्हें ₹475 और खाने-पीने के सामान के लिए ₹420 का भुगतान UPI से करना पड़ा। उनके कानूनी नोटिस में यह सवाल उठाया गया है कि क्या संबंधित आउटलेट पर कैशलेस नीति लागू करने के लिए कोई लिखित कंपनी निर्देश या नीति है और क्या इसकी जानकारी ग्राहकों को पहले से दी गई थी।
वहीं, PVR INOX के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कंपनी किसी भी समय कैश लेने से इनकार नहीं करती। यानी ग्राहक की ओर से लगाए गए आरोप और कंपनी का पक्ष इस मामले में अलग-अलग हैं।
RBI एक्ट की धारा 26(1) में क्या है?
दवे ने अपने नोटिस में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 की धारा 26(1) का हवाला दिया है। RBI के आधिकारिक FAQ के अनुसार, RBI द्वारा जारी बैंकनोट भारत में उस पर लिखी राशि के लिए लीगल टेंडर हैं और केंद्र सरकार इसकी गारंटी देती है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर है। किसी नोट का ‘लीगल टेंडर’ होना यह अपने आप साबित नहीं करता कि हर निजी कारोबारी को हर परिस्थिति में नकद भुगतान स्वीकार करना ही होगा। इस मामले में प्रकाशित कानूनी विश्लेषण के अनुसार, निजी व्यवसाय सामान्यतः अपनी भुगतान शर्तें तय कर सकते हैं, जब तक किसी विशेष कानून या नियामकीय प्रावधान के तहत किसी खास भुगतान माध्यम को स्वीकार करना अनिवार्य न हो।
यही वजह है कि विवाद का एक प्रमुख सवाल यह भी है कि यदि किसी प्रतिष्ठान ने कैशलेस व्यवस्था अपनाई है, तो क्या ग्राहक को भुगतान से पहले इसकी स्पष्ट जानकारी दी गई थी।
क्या सिर्फ UPI की शर्त लगाई जा सकती है?
ऑनलाइन कारोबार, ऐप आधारित सेवाओं या ऐसे व्यवसायों में जहां डिजिटल भुगतान व्यवस्था ही सेवा का हिस्सा है, केवल डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की स्थिति अलग हो सकती है। किसी फिजिकल स्टोर या सर्विस सेंटर के मामले में भी कैशलेस नीति पर विचार किया जा सकता है, लेकिन लागू कानूनों और उपभोक्ता अधिकारों के अनुरूप इसकी शर्तों और पूर्व सूचना का सवाल महत्वपूर्ण रहता है।
दवे के नोटिस में खास तौर पर उन ग्राहकों का मुद्दा उठाया गया है, जिनके पास स्मार्टफोन, UPI या इंटरनेट की सुविधा नहीं है। नोटिस में कंपनी से पूछा गया है कि ऐसे ग्राहक यदि नकद भुगतान करना चाहें तो उनके लिए क्या व्यवस्था है।
सात दिन में जवाब मांगा
कानूनी नोटिस में PVR INOX से सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है। जवाब नहीं मिलने की स्थिति में उपभोक्ता आयोग और अन्य संबंधित मंचों का रुख करने की बात कही गई है।
इस पूरे मामले में फिलहाल दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है—RBI के अनुसार भारतीय बैंकनोट लीगल टेंडर हैं, लेकिन इससे हर निजी कारोबारी पर हर परिस्थिति में नकद स्वीकार करने की स्वतः कानूनी बाध्यता स्थापित नहीं होती। दूसरी ओर, किसी कैशलेस नीति की वैधता और उसे ग्राहकों के सामने किस तरह लागू किया गया, यह संबंधित परिस्थितियों, लागू नियमों और उपभोक्ता कानून के आधार पर देखा जा सकता है। PVR INOX की ओर से भी इस मामले में कैश स्वीकार करने की बात कही गई है।
नोट: ऊपर दी गई कानूनी जानकारी सामान्य सूचना के लिए है। किसी विशिष्ट मामले में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित दस्तावेजों, अनुबंध और लागू कानूनों पर निर्भर करेगी।