शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर चल रहे मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने मेरठ विकास प्राधिकरण के जोन-ए में चिन्हित 16,726 अवैध व्यावसायिक इमारतों को सील करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जोन-बी, सी और डी में भी इसी तरह की संपत्तियों को चिन्हित करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई अब 9 दिसंबर 2026 को होगी। 

सोमवार को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विश्वनाथन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान आवास एवं विकास परिषद की ओर से 44 सील संपत्तियों पर की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट भी कोर्ट के सामने रखी गई।

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44 सील संपत्तियों में 20 पर अवैध निर्माण हटाया

आवास एवं विकास परिषद की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया कि 44 सील संपत्तियों में से 20 में अवैध निर्माण पूरी तरह हटाया जा चुका है, जबकि 24 संपत्तियों में अभी कार्रवाई बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने इन 24 संपत्तियों में भी अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं। 

इसी कार्रवाई के तहत 16 सितंबर को सेंट्रल मार्केट में छह भवनों पर बुलडोजर चलाया गया था। परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुपालन में इन भवनों के अवैध हिस्से हटाए थे। कार्रवाई करीब सात घंटे चली थी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। 

आवास विकास परिषद ने कोर्ट में क्या बताया?

सुनवाई के दौरान आवास एवं विकास परिषद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन पहवा ने पक्ष रखा। परिषद ने 14 जुलाई के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की।

रिपोर्ट में 44 संपत्तियों की मौजूदा स्थिति बताई गई। कोर्ट के सामने यह भी स्पष्ट हुआ कि 20 संपत्तियों में अवैध निर्माण हटाया जा चुका है, जबकि 24 में अभी कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। इन पर भी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए। 

अब 16,726 इमारतों पर भी कार्रवाई का रास्ता

सुनवाई में सबसे बड़ा मुद्दा जोन-ए में चिन्हित 16,726 अवैध व्यावसायिक इमारतों का रहा। कोर्ट के निर्देश के बाद इन इमारतों को सील किया जाना है। बताया गया कि इन संपत्तियों में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केवल जोन-ए तक मामला सीमित नहीं रखा। कोर्ट ने जोन-बी, सी और डी में भी ऐसी संपत्तियों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। 

उल्देपुर की अवैध कॉलोनियों पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान उल्देपुर क्षेत्र में विकसित की गई अवैध कॉलोनियों का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद से सवाल किया कि ये कॉलोनियां कैसे अस्तित्व में आईं। प्रमुख सचिव सुनवाई में ऑनलाइन जुड़े थे।

रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने इन कॉलोनियों को लेकर भी कार्रवाई के निर्देश दिए। 

पुनर्वास नीति की जानकारी भी दी गई

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के 486 आवासों के लिए पुनर्वास नीति लाए जाने की जानकारी दी गई। व्यापारियों की ओर से ध्वस्तीकरण से पहले पुनर्वास और तब तक यथास्थिति बनाए रखने की मांग रखी गई थी। मामले में व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सूरत सिंह ने पक्ष रखा। 

महिलाओं का धरना 171वें दिन भी जारी

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच सेंट्रल मार्केट में महिलाओं का धरना भी सोमवार को 171वें दिन जारी रहा। महिलाएं और प्रभावित परिवार लंबे समय से कार्रवाई के विरोध में धरने पर बैठे हैं।

इससे पहले 16 सितंबर को छह भवनों पर हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद भी बाजार क्षेत्र में विरोध जारी रहा। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद सेंट्रल मार्केट और आसपास के क्षेत्रों में आगे होने वाली कार्रवाई पर व्यापारियों और स्थानीय लोगों की नजर है। 

अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी। तब तक 44 सील संपत्तियों में बची कार्रवाई और अन्य जोन में चिन्हित की जाने वाली संपत्तियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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