देश में सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर का जाल जिस तेजी से बिछ रहा है, उसी तेजी से सड़कों पर वाहनों का दबाव और ट्रैफिक लोड भी बढ़ रहा है। इसी भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब देश में बनने वाले नेशनल हाईवे की चौड़ाई सिर्फ कागजों पर 4 लेन या 6 लेन तय करने से नहीं होगी, बल्कि यह पूरी तरह से उस कॉरिडोर के 'ट्रैफिक लोड' (Traffic Load) पर निर्भर करेगा।

NHAI ने हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे (High-Speed Access Controlled National Highways) के लिए बकायदा नई और विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। सरकार के 'विकसित भारत 2047' के विजन को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए ये नए नियम, एक्सप्रेसवे (Expressways) को छोड़कर सभी नए बनने वाले हाई-स्पीड हाईवे पर लागू होंगे। आइए विस्तार से जानते हैं कि इन नई गाइडलाइन्स में क्या-क्या खास बदलाव किए गए हैं।

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क्यों पड़ी नई गाइडलाइन की जरूरत?

अभी तक देश में एक्सप्रेसवे के अलावा, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड नेशनल हाईवे के डिजाइन, प्लानिंग और निर्माण के लिए कोई अलग से एक समान (Uniform) मानक नहीं थे। इसके चलते अलग-अलग हाईवे परियोजनाओं की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करते समय अलग-अलग मानकों का इस्तेमाल हो रहा था।

NHAI की नई गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य इसी अंतर को खत्म करना है। इससे पूरे देश में हाई-स्पीड नेशनल हाईवे के निर्माण में एकरूपता (Uniformity) आएगी, तकनीकी मानकों में स्थिरता रहेगी, परिचालन क्षमता (Operational Efficiency) बढ़ेगी और सबसे महत्वपूर्ण—सड़क सुरक्षा (Road Safety) मजबूत होगी। यह नए नियम सभी आगामी 4 लेन और 6 लेन वाले ग्रीनफील्ड (Greenfield) और ब्राउनफील्ड (Brownfield) हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे पर सख्ती से लागू होंगे।

अब ट्रैफिक लोड तय करेगा हाईवे की चौड़ाई: क्या है नया गणित?

नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा फीचर लेन और चौड़ाई का मानकीकरण (Standardization) है। अब किसी भी हाईवे को 4 लेन या 6 लेन का बनाने से पहले वहां विस्तृत ट्रैफिक आकलन (Traffic Assessment) किया जाएगा। नए मानकों के अनुसार चौड़ाई इस प्रकार तय होगी:

  • 15,000 वाहन तक का ट्रैफिक: जिन कॉरिडोर पर रोजाना 15 हजार वाहनों तक का ट्रैफिक फ्लो होगा, वहां 4 लेन हाईवे और 4 लेन स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे। ऐसे कॉरिडोर की कुल चौड़ाई 60 मीटर रखी जाएगी।

  • 15,000 से 25,000 वाहन: जहां ट्रैफिक थोड़ा ज्यादा होगा, यानी 15 से 25 हजार वाहनों के बीच, वहां 4 लेन हाईवे के साथ 6 लेन स्ट्रक्चर का निर्माण होगा। भविष्य में विस्तार की गुंजाइश रखने के लिए इनकी चौड़ाई बढ़ाकर 70 मीटर रखी जाएगी।

  • 25,000 से 40,000 वाहन: भारी ट्रैफिक वाले कॉरिडोर, जहां 25 से 40 हजार वाहनों की आवाजाही होगी, वहां सीधे 6 लेन हाईवे और 6 लेन स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे। इनकी चौड़ाई भी 70 मीटर निर्धारित की गई है।

इसका सीधा मतलब यह है कि हाईवे का आकार और क्षमता अपेक्षित ट्रैफिक की मात्रा (Volume) के बिल्कुल अनुरूप होगी, जिससे जाम की स्थिति नहीं बनेगी।

सड़क सुरक्षा: इंटरचेंज, रैंप और साइन बोर्ड

चूंकि ये हाई-स्पीड कॉरिडोर हैं, इसलिए तेज रफ्तार ट्रैफिक की जरूरतों को पूरा करने के लिए सुरक्षा उपायों पर विशेष जोर दिया गया है:

  • इंटरचेंज और रैंप (Interchanges & Ramps): ट्रैफिक की सुगम आवाजाही बनाए रखने के लिए एक्सप्रेसवे, अन्य नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और भारी ट्रैफिक वाली प्रमुख सड़कों के क्रॉसिंग पर इंटरचेंज और रैंप का निर्माण अनिवार्य होगा।

  • कनेक्टिविटी: बंदरगाहों (Ports), एयरपोर्ट, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs), औद्योगिक क्षेत्रों और बड़े पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़कों पर भी जरूरत के हिसाब से इंटरचेंज बनाए जाएंगे।

  • एडवांस साइन बोर्ड: वाहन चालकों को हाईवे से बाहर निकलने (Exit) और प्रवेश करने (Entry) के रास्तों की जानकारी पहले ही देने के लिए हाईवे पर विशेष और बड़े एडवांस साइन बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि तेज रफ्तार में भी ड्राइवर आसानी से निर्णय ले सकें।

आवारा पशुओं और अनधिकृत प्रवेश पर लगेगी लगाम

भारतीय हाईवे पर सबसे बड़ा खतरा आवारा पशुओं (Stray Cattle) के अचानक सड़क पर आ जाने और अनधिकृत वाहनों के प्रवेश से होता है। हाई-स्पीड कॉरिडोर पर इस खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए NHAI ने एक सख्त प्रावधान किया है।

नई गाइडलाइन के तहत, अब सभी हाई-स्पीड कॉरिडोर के बाहरी किनारे (Outer Edge) पर 1 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल (Boundary Wall) का निर्माण अनिवार्य कर दिया गया है। यह दीवार न केवल अतिक्रमण (Encroachment) रोकेगी, बल्कि आवारा पशुओं और स्थानीय लोगों के अनधिकृत प्रवेश को रोककर तेज रफ्तार वाहनों के लिए एक सुरक्षित वातावरण भी तैयार करेगी।

NHAI का यह कदम भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को वर्ल्ड-क्लास बनाने और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को कम करने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

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