योगी आदित्यनाथ सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में आने वाले उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में अब 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' (No PUC, No Fuel) पॉलिसी लागू की जा रही है। 1 अक्टूबर 2026 से मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा), हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, बागपत और शामली में बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के किसी भी वाहन को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी। उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव की ओर से इस संबंध में कड़े आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिसका उद्देश्य सड़कों पर धुआं उगलने वाले अनफिट वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगाना है।
ANPR कैमरों और मोबाइल ऐप से होगी डिजिटल निगरानी
इस नए नियम को पारदर्शी और सख्ती से लागू करने के लिए तकनीकी व्यवस्था को पूरी तरह से चाक-चौबंद किया जा रहा है। इन आठ जिलों के सभी 1041 पेट्रोल पंपों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) यानी स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली वाले विशेष कैमरे लगाए जाएंगे।
जैसे ही कोई वाहन ईंधन भरवाने पेट्रोल पंप पर पहुंचेगा, ये विशेष कैमरे उसकी नंबर प्लेट स्कैन कर सीधे सड़क परिवहन विभाग के केंद्रीय डेटाबेस 'वाहन पोर्टल' (VAHAN Portal) से संपर्क करेंगे। अगर वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र एक्सपायर हो चुका होगा, तो पंप की मशीनें स्वतः ईंधन देना बंद कर देंगी। अगर कोई वाहन चालक जबरन पेट्रोल-डीजल भरवाने की कोशिश करता है या कर्मचारियों से अभद्रता करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गाजियाबाद में शुरू हुआ जमीनी अभ्यास, प्रशासन का अलर्ट
पॉलिसी को सफल बनाने के लिए गाजियाबाद प्रशासन ने 1 अक्टूबर की समयसीमा से पहले ही जमीनी स्तर पर तैयारियां और मॉक ड्रिल शुरू कर दी है। पेट्रोल पंप कर्मचारियों को एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नंबर प्लेट स्कैन कर प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता जांचने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गाजियाबाद के जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने वाहन मालिकों को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि वे 30 सितंबर तक अपने वाहनों के दस्तावेजों की पूरी तरह जांच करा लें।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›उन्होंने बताया कि मोबाइल ऐप पर गाड़ी का नंबर स्कैन करते ही वाहन का पूरा रिकॉर्ड कर्मचारियों के सामने आ जाएगा। इसलिए अगर प्रमाणपत्र खत्म हो चुका है, या जल्द समाप्त होने वाला है, तो बिना समय गंवाए उसका रिन्यूअल करा लें। इससे 1 अक्टूबर के बाद पेट्रोल या डीजल लेने में किसी तरह की परेशानी या विवाद का सामना नहीं करना पड़ेगा।
HSRP अनिवार्य और 10,000 रुपये का भारी जुर्माना
परिवहन विभाग के कड़े नियमों के अनुसार, वाहनों के लिए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) भी पूरी तरह अनिवार्य कर दी गई है। बिना HSRP के किसी भी वाहन का नया प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) जनरेट नहीं किया जाएगा। ऐसे में 1 अक्टूबर से पहले वाहन स्वामियों के लिए अपनी नंबर प्लेट और पीयूसी दोनों अपडेट कराना अनिवार्य होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई वाहन चालक बिना वैध पीयूसी के सड़कों पर वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो मोटर वाहन अधिनियम के तहत उस पर सीधे 10,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
क्या है प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC)?
वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र एक ऐसा अनिवार्य सरकारी दस्तावेज है, जो यह प्रमाणित करता है कि आपके वाहन से निकलने वाला जहरीला धुआं और गैसें तय सरकारी मानकों के भीतर हैं। नई गाड़ियों के लिए पीयूसी की वैधता एक वर्ष होती है, जबकि पुरानी गाड़ियों के लिए इसे हर छह महीने या एक वर्ष की तय सीमा में रिन्यू कराना आवश्यक होता है। अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है।
हरियाणा के जिलों में भी लागू होगी पाबंदी
उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा सरकार ने भी अपने एनसीआर क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ऐसा ही कड़ा फैसला लिया है। हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, रोहतक और करनाल जिलों के 2780 पेट्रोल पंपों पर भी 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नियम सख्ती से लागू किया जा रहा है। हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग और दमघोंटू हवा की समस्या पैदा हो जाती है। सरकारों की इस संयुक्त 'ग्रीन पहल' का मुख्य उद्देश्य इस जहरीली हवा के संकट को कम करना और आम लोगों को स्वच्छ पर्यावरण देना है।