नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में कर्मचारियों को मिलने वाले ई-पास की जांच को डिजिटल बनाने की दिशा में नया अपडेट सामने आया है। रेलवे के टिकट चेकिंग स्टाफ यानी TTE के लिए इस्तेमाल होने वाले Hand Held Terminal (HHT) में EPASS Verification का फीचर जोड़ा गया है। सितंबर 2026 में जारी CRIS के HHT Client Version 2.9.0 बीटा अपडेट में ई-पास को UPN नंबर के जरिए सत्यापित करने का विकल्प शामिल किया गया है।

इससे रेलवे कर्मचारियों और उनके पात्र परिजनों के ई-पास की जांच के दौरान मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उपलब्ध CRIS दस्तावेज इसे HHT 2.9.0 का फीचर बताता है और यह भी कहता है कि जोनल रेलवे से फीडबैक के आधार पर सुविधाओं को सभी ट्रेनों में रोलआउट किया जाएगा। इसलिए इसे हर ट्रेन में एक साथ पूरी तरह लागू हो चुका सिस्टम मानना उचित नहीं होगा।

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HHT से कैसे होगा ई-पास का सत्यापन?

रेलवे के HHT सिस्टम में EPASS Verification का विकल्प जोड़ा गया है। CRIS के 1 सितंबर 2026 के दस्तावेज के अनुसार, TTE UPN नंबर का इस्तेमाल करके ई-पास का सत्यापन कर सकेंगे। HHT एप्लीकेशन को टिकट जांच की अलग-अलग डिजिटल सुविधाओं के लिए लगातार अपडेट किया जा रहा है।

HHT Version 2.9.0 में केवल ई-पास सत्यापन ही नहीं, बल्कि मोबाइल UTS टिकटों पर यात्री की तस्वीर के जरिए सत्यापन, कन्सेशन यात्रियों के दस्तावेजों की पुष्टि, एक्सपायर्ड UTS टिकट स्कैन होने पर अलर्ट और UTS/PRS टिकट स्कैनिंग को तेज करने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य टिकट जांच के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंच को आसान बनाना है। रेलवे का HRMS पहले से ही कर्मचारियों के ई-पास और अन्य सेवा संबंधी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण में इस्तेमाल हो रहा है। रेलवे बोर्ड ने 2020 में E-Privilege Pass/PTO मॉड्यूल को लागू किया था और इसे पेपरलेस टिकटिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।

फर्जी या गलत पास की जांच में मिलेगी मदद

ई-पास व्यवस्था में कर्मचारी HRMS के जरिए पास के लिए आवेदन करते हैं। रेलवे के प्रशिक्षण दस्तावेजों के अनुसार ई-पास या ई-PTO के साथ संबंधित टिकट और मूल पहचान पत्र यात्रा प्राधिकरण का हिस्सा होते हैं।

नए HHT फीचर के जरिए UPN के आधार पर ई-पास का डिजिटल सत्यापन संभव होगा। इससे TTE को पास की जानकारी जांचने में सुविधा मिल सकती है। किसी पास की वैधता या विवरण में गड़बड़ी पाए जाने पर आगे की जांच रेलवे के निर्धारित नियमों के अनुसार की जा सकेगी।

यह कहना फिलहाल सही नहीं होगा कि HHT हर फर्जी ई-पास को स्वतः ही “लाल बत्ती” दिखाकर पकड़ लेगा। उपलब्ध CRIS दस्तावेज में EPASS Verification का विकल्प दर्ज है, लेकिन “फर्जी पास पर लाल बत्ती” जैसी विस्तृत कार्यप्रणाली का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस हिस्से को लेकर सोशल मीडिया या अन्य रिपोर्टों में किए गए दावों को सावधानी से देखना चाहिए।

HHT सिस्टम में लगातार हो रहे डिजिटल बदलाव

रेलवे के टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए HHT पहले से ही कई कामों में इस्तेमाल हो रहा है। इसमें टिकट जांच, सीट और कोच से संबंधित जानकारी तथा अन्य डिजिटल प्रक्रियाएं शामिल हैं। CRIS के नए अपडेट में UTS और PRS टिकट स्कैनिंग को बेहतर बनाने के साथ PNR Enquiry और इलेक्ट्रॉनिक Excess Fare Ticket (e-EFT) से जुड़े फीचर भी जोड़े गए हैं।

CRIS ने HHT Client Version 2.9.0 को 1 सितंबर 2026 को बीटा संस्करण के रूप में जारी किया था। पत्र में जोनल रेलवे से नई सुविधाओं के इस्तेमाल और फीडबैक देने को कहा गया है। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि फीडबैक के आधार पर सुविधाओं को भारतीय रेलवे की सभी ट्रेनों में रोलआउट किया जाएगा।

इसलिए रेलवे कर्मचारियों के लिए ई-पास की डिजिटल जांच व्यवस्था एक महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव है, लेकिन इसके पूर्ण देशव्यापी लागू होने की स्थिति को संबंधित रेलवे के आगे के निर्देशों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

नोट: ई-पास का डिजिटल सत्यापन रेलवे के HHT सिस्टम में जोड़े गए आधिकारिक CRIS फीचर पर आधारित है। उपलब्ध 1 सितंबर 2026 के दस्तावेज में इसे HHT Version 2.9.0 के बीटा फीचर के रूप में बताया गया है। सभी ट्रेनों में इसके पूर्ण रोलआउट की पुष्टि संबंधित आगे के रेलवे निर्देशों से होगी।

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