बिजनौर में सोने की अंगूठी की ठगी के मामले में कोतवाली शहर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बहला-फुसलाकर एक व्यक्ति से अंगूठी हासिल की थी। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पीली धातु की अंगूठी और वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर प्लेट की काली पल्सर मोटरसाइकिल बरामद की है। मामले में बरामदगी के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(2) की बढ़ोतरी की गई है।
13 सितंबर को दी गई थी तहरीर
मामला बिजनौर के थाना कोतवाली शहर क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, 13 सितंबर 2026 को नगर पालिका और टाउन हॉल के सामने रहने वाले सुभाष कुमार वर्मा ने पुलिस को तहरीर दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दो अज्ञात लोगों ने उन्हें बातों में उलझाकर धोखाधड़ी के जरिए उनकी अंगूठी ले ली।
#BijnorPolice
थाना कोतवाली शहर पुलिस द्वारा मु0अ0स0 754/2026 धारा 310(2)/3(5)/317(3)/ 115(2)/351(2) बी.एन.एस. से सम्बन्धित 01 अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। #UPPolice pic.twitter.com/KpQFJ2nie0— BIJNOR POLICE (@bijnorpolice) September 24, 2026
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इस घटना की रिपोर्ट सामने आने के एक दिन बाद प्रकाशित विवरण में बताया गया था कि बाइक सवार दो लोगों ने सुभाष कुमार वर्मा को रोककर बातचीत में उलझाया और इसी दौरान उनके हाथ से अंगूठी उतरवा ली। घटना के बाद दोनों आरोपी बाइक से फरार हो गए थे। परिवार ने आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज भी देखी थी, जिसमें दोनों संदिग्ध दिखाई दिए थे।
नैनीताल और बरेली के आरोपी गिरफ्तार
पुलिस की जांच के दौरान मामले में प्रकाश में आए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान विनोद कुमार शर्मा निवासी नैनीताल और कालीचरण निवासी बरेली के रूप में बताई गई है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से एक पीली धातु की अंगूठी और घटना में इस्तेमाल बिना नंबर प्लेट की काले रंग की पल्सर मोटरसाइकिल बरामद हुई। बरामदगी के बाद मुकदमे में BNS की धारा 317(2) जोड़ी गई है। पुलिस मामले में आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर रही है।
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब शहर कोतवाली क्षेत्र में अंगूठी से जुड़ी ठगी की शिकायत सामने आने के बाद CCTV फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान की कोशिश की जा रही थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बाद में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर बरामदगी की।
अस्वीकरण: यह खबर पुलिस के अनुसार सामने आए तथ्यों और उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपियों के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।