त्तर प्रदेश के नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे (Yamuna Expressway) पर बुधवार (23 सितंबर 2026) की रात एक ऐसा खौफनाक हादसा हुआ, जिसने इंसानियत और यातायात सुरक्षा व्यवस्था दोनों को शर्मसार कर दिया। दिल्ली के कश्मीरी गेट से उत्तर प्रदेश के महोबा जा रही एक प्राइवेट एसी स्लीपर बस रात के अंधेरे में अचानक धू-धू कर जल उठी और आग का गोला बन गई।

इस दिल दहला देने वाले हादसे में बस में सवार 35 यात्रियों में से 9 लोगों की जिंदा जलकर बेहद दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। लेकिन इस हादसे से भी ज्यादा खौफनाक है उन बचे हुए यात्रियों की आपबीती, जिन्होंने आरोप लगाया है कि ड्राइवर और कंडक्टर की लापरवाही और हठधर्मी ने मासूम यात्रियों की जान ले ली।

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हादसे की टाइमलाइन: कब, कहां और कैसे हुआ यह भयानक अग्निकांड?

  • रवानगी (रात 9:30 बजे): राज कल्पना ट्रैवल्स (Raj Kalpana Travels) की यह प्राइवेट स्लीपर एसी बस दिल्ली के कश्मीरी गेट आईएसबीटी (ISBT) से बुधवार रात करीब 9:30 बजे उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के लिए रवाना हुई थी। बस में कुल 35 यात्री सवार थे, जिनमें से ज्यादातर गहरी नींद में सो रहे थे।

  • हादसे का स्थान (रात 11:30 बजे): करीब दो घंटे के सफर के बाद, रात 11:30 बजे यह बस यमुना एक्सप्रेस-वे पर जेवर थाना क्षेत्र (Jewar Police Station) में किलोमीटर-33 के पास (जेवर एयरपोर्ट से करीब 500 मीटर पहले) पहुंची थी।

  • आग की शुरुआत: शुरुआती जानकारी और यात्रियों के अनुसार, बस के एसी (AC) कंप्रेसर में स्पार्क या ब्लास्ट हुआ, जिसके कारण इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल ने आग पकड़ ली। केबिन से उठी यह आग चंद सेकंडों में बस के अंदर स्लीपर कोच तक पहुंच गई।

  • चीख-पुकार और भगदड़: जैसे ही बस में धुआं भरा, अंदर सो रहे यात्रियों में चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। जान बचाने की जद्दोजहद में कुछ यात्रियों ने हिम्मत दिखाई और बस के शीशे/खिड़कियां तोड़कर बाहर सड़क पर छलांग लगा दी।

यात्री का सनसनीखेज आरोप: "ड्राइवर सिगरेट पी रहा था, कंडक्टर बोला- मरना है तो मरो"

इस हादसे के बाद जो एफआईआर (तहरीर) दर्ज कराई गई है, उसमें बस के क्रू (ड्राइवर और कंडक्टर) पर हत्या जैसी लापरवाही के बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगे हैं।

हमीरपुर के राठ निवासी और इस हादसे में बाल-बाल बचे सुनील कुमार ने जेवर थाने में दी गई अपनी लिखित तहरीर में बताया है: "हादसे से कुछ देर पहले ही बस के केबिन (ड्राइवर साइड) से प्लास्टिक और वायर जलने की तेज बदबू आने लगी थी। मुझे और कुछ अन्य यात्रियों को शक हुआ तो हमने तुरंत ड्राइवर और कंडक्टर को इसकी जानकारी दी और बस रोकने को कहा। लेकिन हमारी बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया गया। हमने देखा कि ड्राइवर और कंडक्टर आराम से केबिन में बैठकर सिगरेट पी रहे थे।"

सुनील ने आगे बताया, "कुछ ही देर बाद ड्राइवर की सीट के पास से अचानक तेज आग की लपटें निकलने लगीं। पूरी बस में दहशत फैल गई और यात्रियों ने बस रोकने के लिए शोर मचाया। लेकिन, बस रोकने के बजाय परिचालक (कंडक्टर) ने यात्रियों को डांटना शुरू कर दिया। उसने बड़ी बेशर्मी से कहा— 'मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे।'"

यात्रियों के अनुसार, जब तक बस रुकी, तब तक आग पूरी बस में फैल चुकी थी और अंदर जहरीला धुआं भर गया था। जो लोग खिड़की से कूद सके, वे बच गए, लेकिन जो लोग धुएं के कारण बेहोश हो गए या स्लीपर सीट से नीचे नहीं उतर पाए, वे उसी बस में फंसकर रह गए और जिंदा जल गए।

‘मैं बाहर कैसे आई, मुझे नहीं पता; पति अभी तक नहीं मिले’

इस खौफनाक हादसे का मंजर बयां करते हुए एक घायल महिला यात्री की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे। हादसे में घायल रेखा भारद्वाज (Rekha Bhardwaj) को जेवर के आरोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रेखा ने रुंधे गले से बताया, "मैं अपने पति के साथ दिल्ली से महोबा अपने घर जा रही थी। हम दोनों सो रहे थे। अचानक बहुत जोर का शोर मचा और लोग 'बचाओ-बचाओ' चिल्लाने लगे। बस के अंदर चारों तरफ घना धुआं था और कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लोग बाहर निकलने के लिए एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर भाग रहे थे। भागते समय मैं बस के अंदर ही गिर गई और कई लोग मेरे ऊपर से कुचलते हुए निकल गए। मैं कैसे बाहर आई, मुझे कुछ याद नहीं। कुछ देर बाद जब होश आया तो मैंने खुद को सड़क पर पड़ा पाया।"

रेखा ने रोते हुए कहा, "मेरे पति अभी तक मुझे नहीं मिले हैं। मुझे डर है कि शायद उनकी मौत हो गई है।"

रेस्क्यू ऑपरेशन: बस को काटकर निकाले गए 9 जले हुए शव

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों की पहचान करना भी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। हादसे वाली जगह से महज 300 मीटर की दूरी पर पुलिस की एक पेट्रोलिंग गाड़ी मौजूद थी। सूचना मिलने के करीब 10 मिनट के भीतर ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियां और यमुना एक्सप्रेस-वे की रेस्क्यू टीमें भी आ गईं।

  • आग पर काबू: दमकल की गाड़ियों को इस भयानक आग पर काबू पाने में करीब 45 मिनट से 1 घंटे का समय लगा। लेकिन तब तक बस का अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह से खाक हो चुका था।

  • घायलों को अस्पताल भेजा: पुलिस और दमकल कर्मियों ने झुलसे हुए और खिड़की से कूदकर घायल हुए 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे से करीब 20 एंबुलेंस को मौके पर बुलाया गया।

  • शवों को निकाला गया: आग बुझने के बाद सबसे खौफनाक मंजर सामने आया। फायरकर्मियों को गैस कटर की मदद से बस के पिछले हिस्से को काटना पड़ा। जब टीम अंदर घुसी, तो वहां से एक-एक कर 9 जले हुए शव बाहर निकाले गए। मृतकों में 8 पुरुष और एक महिला शामिल हैं।

एडीएम (ADM) अजीत कुमार सिंह के मुताबिक, सभी शव पूरी तरह से जलकर कंकाल बन चुके हैं, इसलिए मौके पर उनकी शिनाख्त (पहचान) करना असंभव है। पुलिस अब डीएनए टेस्टिंग (DNA Testing) और यात्रियों की सूची के आधार पर मृतकों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। जिन घायलों को मामूली चोटें आई थीं, उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे वाहनों से महोबा भेज दिया गया है।

प्रशासन सख्त: हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी

इस पूरे मामले ने प्राइवेट स्लीपर बसों (Private Sleeper Buses) की सुरक्षा, उनमें रखे जाने वाले अवैध ज्वलनशील पदार्थों और मनमाने तरीके से बस चलाने वाले ड्राइवरों की मानसिकता पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

नोएडा पुलिस ने यात्रियों की तहरीर के आधार पर बस के ड्राइवर, कंडक्टर और राज कल्पना ट्रैवल्स के मालिक के खिलाफ गंभीर धाराओं (गैर-इरादतन हत्या) में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हादसे के बाद से बस का ड्राइवर और कंडक्टर मौके से फरार बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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