मेरठ। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच अब जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों पर भी कार्रवाई का सिलसिला सामने आया है। मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के सचिव अर्पित गुप्ता को शासन ने पद से हटा दिया है और उन्हें प्रतीक्षारत रखा गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब सुप्रीम कोर्ट में मेरठ के अवैध निर्माणों और सर्वे रिपोर्ट को लेकर सुनवाई चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद सचिव हटाए गए
अर्पित गुप्ता ने मई 2026 में MDA सचिव का पद संभाला था। इससे पहले वह अमेठी में ADM वित्त एवं राजस्व के पद पर तैनात थे।
रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में मेरठ के अवैध निर्माणों से जुड़ी सूची और सर्वे रिपोर्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के दौरान MDA की भूमिका पर सवाल उठे। इसके बाद शासन स्तर पर अर्पित गुप्ता को पद से हटाने का फैसला लिया गया। उन्हें फिलहाल प्रतीक्षारत रखा गया है।
हालांकि, सचिव को हटाने के आधिकारिक आदेश में यदि अलग कारण दर्ज है तो अंतिम रूप से वही आधार माना जाएगा। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में कार्रवाई को अवैध निर्माणों की सूची और सर्वे से जोड़कर बताया गया है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›16,726 से ज्यादा निर्माणों का मामला
सेंट्रल मार्केट मामले की सुनवाई के दौरान मेरठ के जोन-ए में चिह्नित 16,726 अनधिकृत संपत्तियों का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। कोर्ट ने इन संपत्तियों को सील करने के निर्देश दिए हैं।
इसके बाद पूरे मेरठ में अवैध निर्माणों की स्थिति को लेकर भी दोबारा सर्वे की चर्चा शुरू हो गई है। यही सर्वे अब MDA और दूसरे संबंधित विभागों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाता है।
आवास विकास के अफसर भी पहले बदले गए थे
सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सिर्फ MDA ही नहीं, आवास विकास परिषद के अधिकारियों की भूमिका भी लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। मामले से जुड़ी रिपोर्टों में परिषद के कई मौजूदा और सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम भी सामने आए थे।
व्यापारियों की ओर से पहले यह आरोप भी लगाए गए थे कि सुप्रीम कोर्ट के सामने मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पक्ष पूरी तरह नहीं रखे गए। इनमें नई भवन नीति और व्यापारियों की ओर से जमा कराए गए शुल्क से जुड़ी जानकारी का मुद्दा शामिल था।
इसी पूरे घटनाक्रम के दौरान आवास विकास परिषद में भी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए गए थे। अब MDA सचिव पर हुई कार्रवाई ने इस मामले में प्रशासनिक जिम्मेदारी के सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है।
अब दोबारा सर्वे और पुनर्वास की तैयारी
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अवैध निर्माणों पर कार्रवाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार प्रभावित लोगों के पुनर्वास की योजना पर काम करने की बात कह रही है।
बुधवार को भाजपा सांसदों और विधायकों की बैठक के बाद मंत्री सोमेंद्र तोमर ने बताया कि सेंट्रल मार्केट में जिन दुकान मालिकों और किरायेदारों की दुकानें गई हैं, उन्हें न्यूनतम किराये पर वैकल्पिक दुकानें देने की योजना है।
जिन लोगों के घर कार्रवाई में प्रभावित हुए हैं, उनके लिए नए घर बनाकर पुनर्वास की बात कही गई है। दोनों व्यवस्थाओं को अगले छह महीने में तैयार करने और उसके बाद आवंटन शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है।
इस बीच जिन 16,744 अवैध निर्माणों को कार्रवाई के दायरे में बताया जा रहा है, उस क्षेत्र में दोबारा सर्वे कराने की बात भी सामने आई है।
अब सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, जिम्मेदारी का भी
सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब कार्रवाई जमीन पर दिखाई दे रही है। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि जिन निर्माणों को अब अवैध बताया जा रहा है, वे इतने लंबे समय तक विभागीय रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था के बीच कैसे बने और संचालित होते रहे।
MDA सचिव को हटाए जाने और पहले आवास विकास में अधिकारियों-कर्मचारियों के बदलाव के बाद अब दोबारा सर्वे की रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी।