दिल्ली के वजीराबाद इलाके के एक होटल में नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी और पीड़िता दोनों वजीराबाद क्षेत्र के रहने वाले हैं। दोनों की पहचान सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। आरोपी ने मंगलवार को नाबालिग को होटल में बुलाया, जहां उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया। पुलिस ने पीड़िता के बयान और मेडिकल जांच के आधार पर पॉक्सो एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी घटना के बाद से फरार है और उसकी तलाश में पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
घर पहुंचकर परिवार को बताई घटना
पुलिस के अनुसार, होटल से लौटने के बाद नाबालिग अपने घर पहुंची और परिवार को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और उसका बयान दर्ज किया। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर वजीराबाद थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
होटल के रिकॉर्ड और CCTV की जांच
मामले की जांच के दौरान पुलिस यह भी पता लगा रही है कि नाबालिग को होटल में प्रवेश कैसे मिला। इसके लिए होटल का रजिस्टर, CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस घटना से जुड़े अन्य तथ्यों और आरोपी की भूमिका की भी जांच कर रही है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
NCRB आंकड़ों में POCSO की स्थिति
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में पॉक्सो एक्ट के तहत 1,553 मामले दर्ज हुए थे। यह औसतन प्रतिदिन चार से अधिक मामलों के बराबर है। दिल्ली के उपराज्यपाल की समीक्षा से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, इन 1,553 मामलों में 1,038 मामलों में पॉक्सो की धारा 4 या 6 यानी penetrative sexual assault से संबंधित धाराएं भी लगाई गई थीं।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›NCRB के 2024 के राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, पॉक्सो की धाराओं 4 और 6 के तहत दर्ज मामलों में 96.6 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चे को पहले से जानता था। इनमें दोस्त, ऑनलाइन दोस्त, पड़ोसी, परिवार के परिचित और अन्य जान-पहचान वाले लोग शामिल थे।
डिस्क्लेमर: यह खबर पुलिस और उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में दर्ज प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी। नाबालिग पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना कानूनन आवश्यक है।