मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट से शुरू हुआ अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल का मामला अब पूरे शहर पर भारी पड़ता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और सख्त निर्देशों के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश शासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। शासन ने मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के सचिव अर्पित गुप्ता को उनके पद से हटाकर लखनऊ संबद्ध कर दिया है।
गौरतलब है कि सचिव अर्पित गुप्ता का मेरठ में कार्यकाल मात्र तीन महीने ही रहा। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सर्वे रिपोर्ट और सुनवाई के दौरान पीठ के कड़े रुख को देखते हुए शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया, जिससे विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
16,726 संपत्तियों को तुरंत सील करने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेबी पाडीवाला और न्यायमूर्ति के. विश्वनाथन की पीठ के समक्ष मेरठ में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों को लेकर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एमडीए द्वारा प्रस्तुत सर्वे रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए पीठ ने जोन-ए में चिन्हित 16,726 ऐसी संपत्तियों को तुरंत सील करने का आदेश दिया, जिनमें आवासीय अनुमति के विपरीत अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
अदालत ने केवल जोन-ए तक ही अपनी सख्ती सीमित नहीं रखी, बल्कि एमडीए को निर्देश दिया है कि वह शहर के अन्य हिस्सों यानी जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी में भी इसी तरह की अवैध व्यावसायिक संपत्तियों को चिन्हित कर सूची तैयार करे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 9 दिसंबर को होगी।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों से शुरू हुआ था मामला
यह पूरा कानूनी विवाद शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण और रिहायशी मकानों में दुकानें-शोरूम चलाने की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। शुरुआत में अदालत के आदेश पर 44 चुनिंदा संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी।
आवास एवं विकास परिषद द्वारा प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट में बताया गया कि इन 44 में से 20 संपत्तियों से अवैध निर्माण पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है, जबकि बाकी 24 संपत्तियों को भी अवैध निर्माण हटाने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, सोमवार की सुनवाई के बाद अब यह मामला पूरी तरह व्यापक हो गया है और एमडीए के अंतर्गत आने वाले शहर के आधे से अधिक हिस्से पर सीलिंग की गाज गिरना तय माना जा रहा है।
व्यापारियों और मकान मालिकों की बढ़ी चिंताएं
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मेरठ के व्यापारिक वर्ग और मकान मालिकों में गहरी चिंता की लहर दौड़ गई है। शहर में बड़े पैमाने पर सर्वे, चिन्हांकन और सीलिंग की कार्रवाई से हजारों दुकानों और कारोबार पर असर पड़ेगा। प्राधिकरण के सामने भी इतने बड़े पैमाने पर एक साथ कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई को अंजाम देने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह समाचार सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई और शासन द्वारा की गई प्रशासनिक कार्रवाई के विवरण पर आधारित है। सीलिंग और सर्वे प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत कानूनी जानकारी व दिशा-निर्देशों के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) या संबंधित न्यायालय के आधिकारिक आदेश का अवलोकन करें।