शेयर बाजार में निवेश करने की योजना बना रहे निवेशकों के लिए एक और शानदार मौका आने वाला है। वायर और केबल निर्माण क्षेत्र से जुड़ी कंपनी ओरिएंट केबल्स (इंडिया) लिमिटेड का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) जल्द ही दस्तक देने वाला है। कंपनी का यह आईपीओ 25 सितंबर 2026, दिन शुक्रवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इस आईपीओ के जरिए कंपनी की योजना पूंजी बाजार से ₹552 करोड़ की बड़ी राशि जुटाने की है।

निवेश और एंकर निवेशकों के लिए अहम तारीखें आम खुदरा निवेशक (Retail Investors) इस आईपीओ में 25 सितंबर से लेकर 29 सितंबर 2026, दिन मंगलवार तक अपनी बोली लगा सकेंगे। वहीं, संस्थागत और एंकर निवेशकों (Anchor Investors) के लिए यह आईपीओ एक दिन पहले, यानी 24 सितंबर 2026 को ही खोल दिया जाएगा।

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क्या है प्राइस बैंड और लॉट साइज? ओरिएंट केबल्स ने इस इश्यू के लिए ₹258 से ₹272 प्रति इक्विटी शेयर का प्राइस बैंड (मूल्य दायरा) निर्धारित किया है। कंपनी के प्रत्येक शेयर का अंकित मूल्य (Face Value) ₹1 रखा गया है। अगर कोई खुदरा निवेशक इस आईपीओ में दांव लगाना चाहता है, तो उसे कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा। कंपनी ने न्यूनतम लॉट साइज 55 इक्विटी शेयरों का रखा है। इसका अर्थ है कि निवेशकों को कम से कम 55 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी, और अधिकतम निवेश के लिए वे 55 शेयरों के गुणक (multiples) में ही आगे की बोली लगा सकेंगे।

आईपीओ का आकार और ओएफएस (OFS) की डिटेल कंपनी के कुल ₹552 करोड़ के आईपीओ आकार को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया है। इसमें ₹320 करोड़ तक के नए शेयर (फ्रेश इश्यू) जारी किए जाएंगे, जबकि ₹232 करोड़ तक का हिस्सा ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में रखा गया है। ओएफएस के तहत कंपनी के मौजूदा प्रमोटर और शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बाजार में बेचेंगे। अपनी हिस्सेदारी बेचने वाले प्रमोटर्स में विपुल नागपाल, गरिमा नागपाल, विपुल फैमिली ट्रस्ट और गरिमा फैमिली ट्रस्ट के नाम शामिल हैं।

कहां होगा जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल? आईपीओ के तहत फ्रेश इश्यू से मिलने वाली शुद्ध धनराशि के उपयोग को लेकर भी कंपनी ने अपनी कार्ययोजना स्पष्ट कर दी है। ओरिएंट केबल्स इस प्राप्त पूंजी का एक बड़ा हिस्सा अपनी विनिर्माण सुविधाओं (Manufacturing Facilities) को उन्नत बनाने में करेगी। इसके तहत नई मशीनरी, आवश्यक उपकरण और सिविल वर्क्स की खरीद से जुड़ी पूंजीगत जरूरतों को पूरा किया जाएगा। इसके अलावा, कंपनी अपने ऊपर मौजूद कुछ वर्तमान कर्जों का पूर्ण या आंशिक पुनर्भुगतान (प्रीपेमेंट) भी करेगी, जिससे उसे कर्ज मुक्त होने में मदद मिलेगी। शेष राशि का उपयोग भविष्य के विस्तार और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों (General Corporate Purposes) को पूरा करने में किया जाएगा।

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