उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में शांति और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जिला मजिस्ट्रेट (DM) उमेश प्रताप सिंह ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर को धरना-प्रदर्शन के लिए पूर्णतः निषिद्ध (प्रतिबंधित) क्षेत्र घोषित कर दिया है। प्रशासन के नए निर्देशों के अनुसार, अब जिले में किसी भी संगठन या दल को अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करना है, तो उन्हें पूर्व अनुमति के बाद केवल 'इंदिरा बाल भवन' में ही इसके लिए स्थान मिलेगा। इसके अतिरिक्त जिले के किसी भी अन्य स्थल या कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन करना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।

कलेक्ट्रेट में अदालतों का कामकाज होता था बाधित जिला मजिस्ट्रेट ने इस निर्णय के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए बताया कि बिजनौर शांति व्यवस्था की दृष्टि से एक संवेदनशील जनपद है। जनपद मुख्यालय और कलेक्ट्रेट परिसर में आए दिन विभिन्न किसान यूनियनों, राजनीतिक दलों, नागरिक और कर्मचारी संगठनों द्वारा अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया जाता है।

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कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर ही जिलाधिकारी न्यायालय, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन वित्त एवं राजस्व) न्यायालय, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) न्यायालय, उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय, उपभोक्ता फोरम और चकबंदी न्यायालय स्थित हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा भारी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली व अन्य वाहन लेकर आने, भीड़ जुटने और लाउडस्पीकर के अत्यधिक शोर से इन सभी न्यायालयों और सरकारी कार्यालयों का कार्य बुरी तरह बाधित होता था। इसके अलावा, इसी परिसर में निर्वाचन संबंधी संवेदनशील ईवीएम (EVM) मशीनों का भंडारण भी किया जाता है, जिससे भीड़ के कारण सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा होती थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और गाइडलाइंस का दिया हवाला अपने आदेश में डीएम उमेश प्रताप सिंह ने शासन, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के विभिन्न महत्वपूर्ण निर्देशों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 'अमित साहनी बनाम स्टेट ऑफ दिल्ली' और 'माकपा बनाम भारत संघ' जैसे महत्वपूर्ण मामलों में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि किसी भी सार्वजनिक रास्ते, सार्वजनिक स्थल या कलेक्ट्रेट परिसर पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा करके बाधा उत्पन्न नहीं की जा सकती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अंतर्गत विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी नागरिकों को प्राप्त है, लेकिन यह अधिकार असीमित या पूर्ण नहीं है। इसे लोक व्यवस्था, सुरक्षा, आम जनता के अधिकारों और उनके स्वतंत्र आवागमन की सुविधा के साथ संतुलित करना अत्यंत अनिवार्य है।

अब सिर्फ इंदिरा बाल भवन में होगा प्रदर्शन जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव (गृह) द्वारा 17 मई 2018 को जारी पत्र में जनपद मुख्यालय पर एक अलग धरना स्थल चिह्नित करने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में 11 सितंबर 2023 के आदेश के तहत कलेक्ट्रेट परिसर को निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर इंदिरा बाल भवन को धरना स्थल बनाया गया था, लेकिन वर्तमान में इसका कड़ाई से पालन नहीं हो पा रहा था। अब न्यायालयों के स्पष्ट निर्देशों और शासन की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन कराते हुए कलेक्ट्रेट परिसर को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। भविष्य में बिना अनुमति या इंदिरा बाल भवन के अलावा कहीं और प्रदर्शन करने पर प्रशासन द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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