नई दिल्ली (Business Desk): क्या 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को जब आप बाजार में खरीदारी करने जाएंगे, तो दुकानदार आपका UPI पेमेंट लेने से मना कर देंगे? पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही 'नो यूपीआई डे' (No UPI Day) की खबरों ने ग्राहकों और व्यापारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
इस बीच, देश के सबसे बड़े व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT - कैट) ने आगे आकर एक बड़ा बयान जारी किया है। CAIT ने स्पष्ट किया है कि 2 अक्टूबर को देशभर में 'नो UPI डे' मनाने का संगठन का कोई इरादा नहीं है और मीडिया में चल रही ये खबरें पूरी तरह से भ्रामक और गलत हैं।
CAIT के बयान की 3 बड़ी बातें: "हम डिजिटल इंडिया के साथ हैं"
CAIT ने इस मुद्दे पर अपना रुख पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए कहा है कि डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है और संगठन इसके पूर्ण समर्थन में है।
'नो UPI डे' से कोई लेना-देना नहीं: CAIT ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि संगठन ने 2 अक्टूबर को UPI के बहिष्कार या किसी भी प्रकार के 'नो UPI डे' का कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया है। CAIT के नाम से फैलाई जा रही ऐसी खबरें पूरी तरह से आधारहीन हैं।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›क्षेत्रीय संगठनों का व्यक्तिगत विरोध: CAIT ने यह भी साफ किया कि UPI पर लगाए जा रहे नए MDR चार्ज (Merchant Discount Rate) के मुद्दे पर यदि कुछ क्षेत्रीय या स्थानीय व्यापारिक संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, तो यह उनका अपना 'व्यक्तिगत फैसला' है। इसे किसी भी तरह से राष्ट्रीय स्तर पर CAIT का रुख नहीं माना जाना चाहिए।
मीडिया और जनता से अपील: संगठन ने मीडिया हाउसेस से अपील की है कि वे CAIT के नाम से कोई भी खबर प्रकाशित करने से पहले ऑफिशियल सोर्स से तथ्यों की पुष्टि (Fact Check) जरूर करें। आम जनता और व्यापारियों को भी केवल आधिकारिक बयानों पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।
विरोध क्यों हो रहा है? 'काले कपड़े से QR कोड ढकने' की चेतावनी
दरअसल, 2 दिन पहले यह खबरें सामने आई थीं कि सरकार द्वारा 15 अक्टूबर 2026 से UPI ट्रांजैक्शन पर लागू किए जा रहे नए चार्जेस के विरोध में व्यापारी 2 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन करेंगे। योजना यह थी कि इस दिन व्यापारी अपनी दुकानों पर लगे UPI QR कोड (QR Code), स्कैनर, साउंड बॉक्स और अन्य डिजिटल पेमेंट डिवाइसेस को काले कपड़े से ढक देंगे और ग्राहकों से केवल कैश में पेमेंट मांगेंगे।
महाराष्ट्र संगठन (MACCIA) का दावा: महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने दावा किया था कि 0.4% चार्ज का यह विरोध केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर के लगभग 500 से ज्यादा प्रमुख व्यापारी संगठन इस आंदोलन में हिस्सा लेंगे। अब CAIT के खंडन के बाद, व्यापारी संगठनों के बीच इस मुद्दे पर 'दो फाड़' साफ नजर आ रही है।
क्या है व्यापारियों का तर्क? "डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देना है या सजा देना?"
व्यापारी संगठनों (जो विरोध कर रहे हैं) का तर्क है कि यह नया चार्ज उनके व्यापार के लिए नुकसानदायक है:
मार्जिन कम, लागत ज्यादा: रिटेल व्यापारी और छोटे डिस्ट्रीब्यूटर बहुत कम प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर काम करते हैं। डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त चार्ज थोपने से उनकी लागत बढ़ जाएगी।
पारदर्शिता की सजा: व्यापारियों का कहना है कि UPI के इस्तेमाल से देश में कैश (Cash) का चलन घटा है और सिस्टम पारदर्शी (Transparent) हुआ है। व्यापारी इसमें पूरा सहयोग कर रहे हैं, तो उन पर शुल्क लगाना सही नहीं है। इसे डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के बजाय व्यापारियों को सजा देने जैसा माना जा रहा है।
आंदोलन की चेतावनी: संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
व्यापारियों पर UPI के नए MDR नियम क्या हैं? (15 अक्टूबर से लागू)
सरकार और बैंकों ने UPI पेमेंट्स पर व्यापारियों से शुल्क वसूलने के लिए कुछ नए नियम तय किए हैं। आइए जानते हैं ये नियम क्या हैं और किस पर लागू होंगे:
बड़े व्यापारियों पर 0.4% चार्ज: जो व्यापारी (Person-to-Merchant) महीने में UPI के जरिए ₹1 लाख से ज्यादा का पेमेंट लेते हैं, उन्हें अब ₹2,000 से ज्यादा के हर सिंगल ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR + GST देना होगा।
छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत: जिन व्यापारियों की महीने में UPI से कुल कमाई (कलेक्शन) ₹1 लाख या उससे कम है, उन पर यह नियम बिल्कुल लागू नहीं होगा। वे ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट भी बिना किसी चार्ज के ले सकेंगे।
ऑटोमेटिक कैटेगरी चेंज: अगर कोई छोटा दुकानदार लगातार 3 महीने तक अपनी दुकान पर ₹1 लाख से ज्यादा का UPI कलेक्शन प्राप्त करता है, तो बैंक का सिस्टम उसे ऑटोमेटिक तरीके से 'बड़े मर्चेंट' (Large Merchant) की कैटेगरी में शिफ्ट कर देगा। इसके बाद उस दुकानदार को भी 0.4% चार्ज देना होगा।
₹2,000 तक की बिक्री फ्री: यह चार्ज केवल तभी लगेगा जब ग्राहक ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करेगा। बड़े व्यापारियों को भी ₹2,000 या उससे कम के छोटे पेमेंट्स (जैसे 100, 500 या 1900 रुपये) पर कोई फीस नहीं देनी होगी।
मैक्सिमम चार्ज (Cap): अगर कोई ग्राहक ₹75,000 या उससे भी बड़ा ट्रांजैक्शन करता है, तो मर्चेंट से अधिकतम ₹300 + GST ही चार्ज लिया जाएगा। 0.4% का नियम ₹75,000 के बाद रुक जाएगा।
खास सेक्टर्स के लिए फ्लैट ₹5 फीस: पेट्रोल पंप, रेलवे, टेलीकॉम, एजुकेशन, इंश्योरेंस और बिल पेमेंट से जुड़े व्यापारियों को बड़ी राहत दी गई है। इन्हें ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.40% के बजाय केवल ₹5 की फ्लैट फीस (Flat Fee) देनी होगी।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह निर्धारित फीस होती है जो कोई व्यापारी या दुकानदार अपने ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट (जैसे डेबिट/क्रेडिट कार्ड या UPI) की सुविधा स्वीकार करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (Payment Service Providers - PSP) को देता है।
यह फीस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (सर्वर, डेटा सुरक्षा) और ट्रांसफर नेटवर्क (Transfer Network) को सुचारू और सुरक्षित रूप से चलाने की लागत को पूरा करने के लिए ली जाती है। ध्यान रहे, यह चार्ज सीधे तौर पर व्यापारी के खाते से काटा जाता है, ग्राहक को इसका कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होता है। कार्ड्स (क्रेडिट कार्ड पर 1.5%-2.5% और डेबिट कार्ड पर 0.90%) के मुकाबले, UPI पर लगने वाला यह 0.4% MDR चार्ज फिर भी काफी कम है।
Sabse pehle comment karne wale banein.