मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस समय भारतीय राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले संवैधानिक पदाधिकारियों में शामिल हैं। वजह है चुनाव आयोग की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया और चुनावी मतदाता सूची को लेकर चल रहा विवाद।
24 सितंबर 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी का दावा करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी के ये आरोप राजनीतिक दावे हैं; इन्हें साबित तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनावी रोल और SIR से जुड़े फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। यही मामला अब ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर उठ रहे सवालों का नया आधार बन गया है।
कौन हैं ज्ञानेश कुमार?
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के Kerala cadre IAS अधिकारी हैं। उन्होंने IIT Kanpur से Civil Engineering में BTech किया है। इसके अलावा उन्होंने Business Finance और Environmental Economics की पढ़ाई की है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›उनका प्रशासनिक करियर काफी लंबा रहा है। केरल में उन्होंने Sub Collector, District Collector और Cochin Corporation के Municipal Commissioner जैसे पदों पर काम किया। वह Kerala State Cooperative Bank के MD और Kerala House के Resident Commissioner भी रहे।
केंद्र सरकार में उनका करियर भी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने Ministry of Defence में Joint Secretary और Ministry of Home Affairs में Joint Secretary तथा Additional Secretary के रूप में काम किया।
इसके बाद वह Ministry of Parliamentary Affairs और Ministry of Cooperation के Secretary रहे। जनवरी 2024 में वह सरकारी सेवा से retire हुए।
Article 370 से लेकर राम मंदिर ट्रस्ट तक चर्चा में क्यों आए?
ज्ञानेश कुमार का नाम केंद्र में उनकी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण भी चर्चा में रहा है।
वह Home Ministry में जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों को देखने वाली जिम्मेदारियों में रहे। 2019 में Article 370 से जुड़े संवैधानिक बदलाव और Jammu and Kashmir Reorganisation Bill की प्रक्रिया के दौरान भी उनका काम महत्वपूर्ण था। इसके अलावा अयोध्या फैसले के बाद Ram Janmabhoomi trust से जुड़ी प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका का उल्लेख उनकी प्रशासनिक प्रोफाइल में मिलता है।
यहां यह समझना जरूरी है कि किसी अधिकारी का किसी सरकारी प्रक्रिया में प्रशासनिक भूमिका निभाना अपने आप में उस फैसले के राजनीतिक समर्थन का प्रमाण नहीं है।
Election Commission में कब आए?
सरकारी सेवा से रिटायर होने के कुछ ही समय बाद ज्ञानेश कुमार को 15 मार्च 2024 को Election Commissioner नियुक्त किया गया। उस समय लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी और उन्होंने 2024 के आम चुनाव के दौरान चुनाव आयोग में काम किया।
इसके बाद 19 फरवरी 2025 को उन्होंने भारत के 26वें Chief Election Commissioner का पद संभाला।
वर्तमान में Election Commission तीन सदस्यीय संस्था है। ज्ञानेश कुमार CEC हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी Election Commissioners हैं।
अब विवाद किस बात पर है?
विवाद का नया केंद्र SIR यानी Special Intensive Revision है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करना है।
23 सितंबर को सामने आई Indian Express की रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों Election Commissioners ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में voter registration, नाम हटाने और बहाल करने, Form 6 तथा electoral-roll database के नियंत्रण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया।
यहीं से राहुल गांधी और विपक्ष ने सवाल उठाया कि अगर दो चुनाव आयुक्तों ने लिखित आपत्तियां की थीं, तो फिर चुनाव आयोग के फैसलों को सर्वसम्मत कैसे कहा जा रहा है।
ECI का जवाब क्या है?
चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट की व्याख्या को अलग तरीके से रखा है। आयोग का कहना है कि किसी संस्था में अंतिम निर्णय से पहले अलग-अलग राय या observations आना सामान्य deliberation का हिस्सा है।
ECI के मुताबिक SIR सहित अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने यह भी कहा कि कुछ चुनिंदा internal notes को अलग करके देखने से पूरी decision-making process की तस्वीर नहीं मिलती।
इसलिए यहां दो अलग बातें हैं—आपत्तियां दर्ज होने की रिपोर्ट और अंतिम फैसलों का सर्वसम्मत होना। पहली बात रिपोर्ट में सामने आई है; दूसरी ECI का आधिकारिक पक्ष है।
राहुल गांधी का ‘Vote Chori’ आरोप कितना सच?
यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राहुल गांधी लंबे समय से चुनावी मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रहे हैं। 2025 में उन्होंने कर्नाटक के Mahadevapura विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची का उदाहरण देते हुए करीब 1,00,250 संदिग्ध entries होने का दावा किया था। इसमें duplicate voters, कथित गलत पते, एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाता और Form 6 से जुड़ी entries शामिल थीं।
लेकिन इन आंकड़ों का मतलब सीधे-सीधे 1,00,250 फर्जी वोट या 1,00,250 वोटों की चोरी साबित होना नहीं है।
यह फर्क बहुत महत्वपूर्ण है।
किसी मतदाता का नाम एक से अधिक जगह होना या किसी पते पर कई मतदाताओं का दर्ज होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उस व्यक्ति ने कई बार वोट डाला या चुनाव परिणाम बदला। ECI ने भी इसी आधार पर राहुल गांधी के दावों को चुनौती दी थी।
ECI ने राहुल गांधी से उनके आरोपों के समर्थन में शपथपत्र और संबंधित मतदाताओं के नाम देने को कहा था, ताकि शिकायतों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सके।
इसलिए इस हिस्से का निष्कर्ष यह है:
मतदाता सूची में discrepancies या संदिग्ध entries की मौजूदगी और चुनाव में ‘Vote Chori’ साबित होना—दो अलग बातें हैं।
2026 में राहुल गांधी का नया आरोप क्या है?
24 सितंबर 2026 को राहुल गांधी ने आरोपों को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई और उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कथित चुनावी गड़बड़ी को वोट, कानून और संस्थाओं से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए।
लेकिन 2024 के सभी चुनावों में ‘100 प्रतिशत rigging’ हुई—यह वर्तमान में एक राजनीतिक आरोप है, स्थापित तथ्य नहीं।
इसी तरह ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग के प्रमुख के रूप में जानबूझकर किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाया—इस निष्कर्ष के लिए स्वतंत्र और निर्णायक प्रमाण इस समय सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं है।
ज्ञानेश कुमार का विवाद केवल राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग की राजनीतिक लड़ाई तक सीमित नहीं है। इस समय असली सवाल Election Commission की internal decision-making, SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर है।
राहुल गांधी के आरोपों में कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनके पीछे मतदाता सूची की वास्तविक discrepancies और आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्टिंग मौजूद है। लेकिन इन तथ्यों से सीधे यह निष्कर्ष निकालना कि चुनावों में ‘Vote Chori’ साबित हो गई या ज्ञानेश कुमार ने किसी दल के पक्ष में चुनाव प्रभावित किया, उपलब्ध सार्वजनिक प्रमाणों से अभी उचित नहीं होगा।
यही इस Explainer का सबसे मजबूत पत्रकारिता एंगल रहेगा—न राहुल गांधी के आरोपों को बिना जांच सच मानना, न ECI के जवाब को बिना सवाल के अंतिम सत्य मानना; बल्कि हर दावे के पीछे उपलब्ध evidence दिखाना।
Sabse pehle comment karne wale banein.