शहर में CM Grid योजना के तहत बन रही सड़कों में अब ऐसी मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो सड़क पर डामर की परत बिछाते समय लेवल, ढलान और मोटाई को नियंत्रित करने में मदद करती है। मेरठ में नगर निगम ने पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। इसकी शुरुआत गढ़ रोड पर गांधी आश्रम से तेजगढ़ी चौराहे के बीच सड़क निर्माण से हुई है।
मशीन का नाम Sensor Paver Machine है। आम तौर पर सड़क बनाने में Paver Finisher गर्म डामर को सड़क पर फैलाकर एक समान सतह तैयार करता है। Sensor Paver में इसके साथ सेंसर आधारित ऑटोमैटिक लेवलिंग और Grade-Slope Control सिस्टम जुड़ा होता है। यही सिस्टम सड़क की निर्धारित ऊंचाई और ढलान बनाए रखने में मशीन की मदद करता है।
आखिर Sensor Paver Machine है क्या?
आसान भाषा में समझें तो यह सड़क पर डामर बिछाने वाली हाईटेक Paver Finisher है। इसके सेंसर सड़क की मौजूदा सतह या तय Reference को पढ़ते हैं। कंट्रोल सिस्टम इस जानकारी के आधार पर मशीन के Screed को एडजस्ट करता है।
Screed वह हिस्सा है जो गर्म डामर को सड़क पर फैलाकर उसकी मोटाई और शुरुआती सतह का आकार तय करता है। ऑटोमैटिक सिस्टम जरूरत के अनुसार Screed की स्थिति में बदलाव कर सकता है। इससे ऑपरेटर को हर जगह मैनुअल तरीके से लेवल ठीक करने पर कम निर्भर रहना पड़ता है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›सड़क की मोटाई कैसे नियंत्रित होती है?
मान लीजिए सड़क पर कहीं डामर की परत तय मोटाई से ज्यादा और कहीं कम बिछ रही है। ऐसी स्थिति में सड़क की सतह एक जैसी नहीं रहेगी।
Sensor Paver में Grade Sensor और दूसरे नियंत्रण सिस्टम लगातार Reference Level को देखते हैं। सिस्टम में बदलाव मिलने पर मशीन के Screed को हाइड्रोलिक या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से समायोजित किया जा सकता है। इससे डामर की परत को निर्धारित प्रोफाइल के करीब रखने में मदद मिलती है।
मेरठ नगर निगम के अभियंताओं के अनुसार, शहर में इस्तेमाल की जा रही मशीन का उद्देश्य सड़क निर्माण के दौरान मोटाई और लेवल को अधिक नियंत्रित तरीके से बनाए रखना है।
सड़क की ढलान भी मशीन संभालती है
सड़क सिर्फ सीधी और सपाट नहीं होती। बारिश का पानी सड़क से किनारे की ओर निकल सके, इसके लिए सड़क की Cross Slope यानी एक तरफ की ढलान जरूरी होती है।
Sensor Paver में Grade के साथ Slope Control भी लगाया जा सकता है। सेंसर सड़क की तय ढलान के अनुसार Screed को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इससे सड़क की सतह का प्रोफाइल डिजाइन के मुताबिक रखने में मदद मिलती है।
यही वजह है कि सड़क निर्माण में सही ढलान होने पर बारिश के पानी की निकासी बेहतर तरीके से हो सकती है। हालांकि इसके लिए सड़क के साथ Drainage System भी सही तरीके से बनाया जाना जरूरी है।
क्या मशीन खुद बता देती है कि सड़क खराब है?
यह समझना जरूरी है कि Sensor Paver कोई ऐसी मशीन नहीं है जो पूरी सड़क की गुणवत्ता की जांच करके खुद पास या फेल कर दे।
इसका मुख्य काम Paving के दौरान Grade, Slope और Screed Control को अधिक सटीक बनाना है। सड़क की अंतिम गुणवत्ता पर Material Quality, सड़क की Base Preparation, डामर का तापमान, Paver की Speed और बाद में होने वाली Roller Compaction जैसी कई चीजों का असर पड़ता है।
इसलिए Sensor Paver को सड़क की गुणवत्ता सुधारने वाला एक तकनीकी साधन समझना ज्यादा सही होगा, न कि सड़क की मजबूती की अकेली गारंटी।
मेरठ में कहां हो रहा इस्तेमाल?
मेरठ में Sensor Paver से CM Grid योजना की सड़क बनाने की शुरुआत गढ़ रोड पर गांधी आश्रम से तेजगढ़ी चौराहे के बीच की गई है। CM Grid के तहत शहर के कई प्रमुख मार्गों का Integrated Development और Upgradation किया जा रहा है।
इस योजना में गांधी आश्रम से बच्चा पार्क और जेलचुंगी से तेजगढ़ी समेत कई मार्गों के लिए अलग-अलग टेंडर भी जारी किए गए हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के आधिकारिक ई-टेंडर पोर्टल पर जेलचुंगी चौराहे से तेजगढ़ी चौराहे तक सड़क के Integrated Development and Upgradation का टेंडर दर्ज है।
तो क्या इससे सड़क ज्यादा टिकेगी?
संभावना बेहतर हो सकती है, लेकिन सिर्फ मशीन की वजह से इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती।
Sensor Paver का फायदा यह है कि डामर की परत का Level, Grade और Slope अधिक नियंत्रित तरीके से रखा जा सकता है। लेकिन सड़क की उम्र इस बात पर भी निर्भर करेगी कि नीचे की Base Layer कैसी तैयार हुई, इस्तेमाल हुआ Material मानक के अनुरूप है या नहीं, डामर सही तापमान पर बिछाया गया या नहीं और Roller से पर्याप्त Compaction हुआ या नहीं।
यानी मेरठ की सड़कों में Sensor Paver का इस्तेमाल तकनीक की दिशा में एक बदलाव है। अब असली सवाल यह होगा कि सेंसर से मिली सटीकता के साथ-साथ Material, Base, Drainage और Compaction की गुणवत्ता भी उसी स्तर पर रखी जाती है या नहीं।
Sabse pehle comment karne wale banein.