मेरठ (Political Desk): मेरठ के उल्देपुर (Uldepur) क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश और संभावित ध्वस्तीकरण (Demolition) के बाद से ही यहां एक बड़ा जन-आंदोलन चल रहा है। लेकिन अब यह आंदोलन आम जनता के अधिकारों से ज्यादा राजनीतिक बयानों और आपसी खींचतान का अखाड़ा बनता जा रहा है।
हाल ही में उल्देपुर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे चर्चित चेहरे रविंद्र गुर्जर (Ravindra Gurjar) ने प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर एक विवादित और कथित 'धमकी भरा' बयान दिया था, जिसके बाद से मेरठ की राजनीति गरमा गई है। इस मामले में अब समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेता और मेरठ व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा (Shanky Verma) ने कड़ा ऐतराज जताते हुए रविंद्र गुर्जर पर सीधा और तीखा पलटवार किया है। उन्होंने न केवल इस हिंसक बयान की निंदा की है, बल्कि गुर्जर के आंदोलन की मंशा (Intention) पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
"फांसी पर चढ़ा देंगे जैसी भाषा किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं"
सपा नेता शैंकी वर्मा ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए रविंद्र गुर्जर के उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ असंसदीय और हिंसक भाषा का प्रयोग किया था।
शैंकी वर्मा ने स्पष्ट किया कि, "आंदोलन करना और जनहित (Public Interest) के मुद्दों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उठाना इस देश के हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। लेकिन, अपनी मांगे मनवाने के लिए किसी अधिकारी या व्यक्ति के खिलाफ हिंसा भड़काने या 'फांसी पर चढ़ा देंगे' जैसी असंवैधानिक भाषा का इस्तेमाल करना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।"
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›उन्होंने कहा कि आंदोलन में जनता संघर्ष करने के लिए तैयार है, लेकिन यह संघर्ष संविधान, मर्यादा और कानून के दायरे में ही किया जाना चाहिए।
सपा नेता शैंकी वर्मा के रविंद्र गुर्जर से 3 'सीधे सवाल'
शैंकी वर्मा ने रविंद्र गुर्जर से जनता के सामने जवाब मांगते हुए कुछ ऐसे तीखे सवाल दागे हैं, जिन्होंने इस आंदोलन की दिशा और इसके पीछे के असली 'खेल' को उजागर कर दिया है:
सवाल 1: सरकार कुछ नहीं करेगी, यह अति-विश्वास (Overconfidence) कहां से आया?
शैंकी वर्मा ने पूछा, "रविंद्र गुर्जर से हमारा सीधा सवाल है कि यदि उन्हें यह पूर्ण विश्वास है कि मौजूदा प्रशासन और सरकार उनके या उनके समर्थकों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकती, तो वह मंच से जनता को खुलकर बताएं कि यह विश्वास उन्हें किस आधार पर है? क्या शासन, सत्तापक्ष या प्रशासन के किसी बड़े जिम्मेदार अधिकारी से 'बंद कमरे' में इस संबंध में उनकी कोई गुप्त बातचीत या सेटिंग (आश्वासन) हुई है?"
सवाल 2: अगर सरकार के खिलाफ नहीं बोलना, तो आंदोलन किससे है?
यह इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है। शैंकी वर्मा ने रविंद्र गुर्जर की दोहरी नीति को बेनकाब करते हुए कहा, "जब रविंद्र गुर्जर सार्वजनिक मंचों और मीडिया के सामने यह कहते हैं कि वे जनप्रतिनिधियों (सत्ता पक्ष) और 'सरकार' के बारे में एक भी शब्द नहीं बोलेंगे, तो फिर उनका यह आंदोलन आखिर किसके खिलाफ है? उनकी वास्तविक मांग किससे है?"
सपा नेता ने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए खुलासा किया, "2 तारीख को जब मैं आंदोलन के मंच पर गया था, तब भी उन्होंने मुझे स्पष्ट हिदायत दे दी थी कि 'आप यहां सरकार के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे।' इसी कारण से मैंने मंच पर माइक तक नहीं पकड़ा था। तो अब रविंद्र गुर्जर यह स्पष्ट करें कि उनका यह तथाकथित आंदोलन अधिकारियों के खिलाफ है, शासन के खिलाफ है, किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ है, या फिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेशों के खिलाफ है?"
सवाल 3: सरकार को बदनाम करने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं करते?
शैंकी वर्मा ने रविंद्र गुर्जर को चुनौती देते हुए कहा कि, "हम उनसे कहना चाहते हैं कि यदि उन्हें लगता है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी जानबूझकर उनकी सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं, तो वे उन अधिकारियों के नाम जनता के सामने सार्वजनिक (Public) करें। और जब 'सरकार' उनकी अपनी है, तो वे सिर्फ मंच से धमकियां देने के बजाय, उन भ्रष्ट अधिकारियों पर विभागीय या कानूनी कार्यवाही (Action) करवा कर दिखाएं।"
आंदोलन की आड़ में क्या हो रही है राजनीति?
उल्देपुर का मामला उस समय तूल पकड़ा जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एमडीए (MDA) अधिकारियों की मिलीभगत से निजी जमीनों पर बनी अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त करने और पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए। इसके बाद से ही जो लोग इन कॉलोनियों में मकान बनाकर रह रहे हैं, उनके सिर पर बेघर होने की तलवार लटक रही है।
लेकिन शैंकी वर्मा के इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या कुछ लोग भोली-भाली जनता की मजबूरी का फायदा उठाकर अपना राजनीतिक कद (Political Stature) बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं? जब आंदोलन का नेता ही यह कह दे कि वह सत्ता पक्ष और सरकार के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलेगा, तो फिर न्याय की गुहार किससे लगाई जा रही है? यह अपने आप में एक बड़ा विरोधाभास (Contradiction) है।
अब सभी की निगाहें रविंद्र गुर्जर पर टिकी हैं कि वे सपा नेता शैंकी वर्मा के इन तीखे और सीधे सवालों का क्या और कैसे जवाब देते हैं। फिलहाल, उल्देपुर के आंदोलन में जनता के हक की लड़ाई अब नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में उलझती हुई नजर आ रही है।
Sabse pehle comment karne wale banein.