मेरठ के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रोडरेज के बाद हुई मारपीट में घायल युवक गौरव चौधरी की मौत के मामले में करीब एक महीने से फरार चल रहे आरोपी बॉक्सर अमर ने गुरुवार को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। आरोपी पुलिस को चकमा देकर कचहरी पहुंचा और सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मामले में आरोपी के सरेंडर के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं।

इस मामले की शुरुआत 22 अगस्त 2026 को सुशीला जसवंत राय अस्पताल के पास बाइक और स्कूटी की टक्कर के बाद हुए विवाद से हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, न्यू सर्वोदय कॉलोनी निवासी गौरव चौधरी अपने दोस्त सनी कुमार के साथ स्कूटी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रही बाइक की स्कूटी से टक्कर हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और मारपीट हुई।

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आगे चल रहे गौरव-सनी की स्कूटी में पीछे से अमर की बाइक टकरा गई।

टक्कर के बाद शुरू हुई थी मारपीट

परिवार की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, बाइक सवार आरोपी अमर की स्कूटी से टक्कर होने के बाद विवाद बढ़ गया। आरोप है कि कहासुनी के दौरान अमर ने गौरव के साथ मारपीट की और उन्हें कई मुक्के मारे। घटना में गौरव गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक फुटेज में बाइक और स्कूटी की टक्कर के बाद दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की दिखाई देती है। इसके बाद मारपीट होती है और गौरव सड़क पर गिर जाते हैं। पूरी घटना के बाद आरोपी के मौके से चले जाने की बात भी सामने आई है।

गौरव को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब एक महीने तक उनका उपचार चला। इस दौरान उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और 22 सितंबर की रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और पहले दर्ज मुकदमे में हत्या की धारा की बढ़ोतरी की।

करीब एक महीने तक फरार रहा आरोपी

पुलिस के मुताबिक, गौरव की मौत से पहले आरोपी अमर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। उसकी तलाश में पुलिस टीमों ने दबिश दी थी। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने 23 सितंबर को बताया था कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमर पूर्व में बॉक्सिंग से जुड़ा रहा है और वर्तमान में ई-कॉमर्स कंपनी में काम करता था। पुलिस की तलाश के बावजूद वह करीब एक महीने तक सामने नहीं आया। गौरव की मौत के बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई तेज की।

तेरह न्यायालय भवन स्थित एक कोर्ट में अमर द्वारा सरेंडर किया गया। - Dainik Bhaskar

इसी बीच बुधवार रात पुलिस को सूचना मिली कि अमर अदालत में आत्मसमर्पण करने की तैयारी में है। पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि वह मेरठ कचहरी में सीजेएम कोर्ट के सामने पेश हो सकता है। इसके बाद कचहरी परिसर में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मियों को लगाया गया।

पुलिस की घेराबंदी के बावजूद कोर्ट पहुंचा

गुरुवार दोपहर आरोपी के कचहरी पहुंचने की सूचना पुलिस को मिली। इसके बाद परिसर में निगरानी और घेराबंदी और कड़ी की गई। इसके बावजूद अमर अधिवक्ताओं के साथ कचहरी परिसर में पहुंच गया और अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।

आरोपी के कोर्ट में पहुंचने तक पुलिस उसे हिरासत में नहीं ले सकी। अदालत में आत्मसमर्पण की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

यह स्थिति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पुलिस को आरोपी के संभावित सरेंडर की जानकारी पहले से होने की बात सामने आई है। पुलिस की मौजूदगी और घेराबंदी के बावजूद आरोपी का कचहरी परिसर में पहुंचकर अदालत के सामने पेश हो जाना सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी से जुड़े सवाल खड़े करता है।

हालांकि, आरोपी के अधिवक्ताओं के साथ अदालत तक पहुंचने और उसके सरेंडर की प्रक्रिया को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में विस्तृत आधिकारिक पुलिस स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए इस स्तर पर यह कहना उचित नहीं होगा कि पुलिस की ओर से किस स्तर पर चूक हुई।

सीसीटीवी फुटेज बना जांच का अहम हिस्सा

इस घटना का सीसीटीवी फुटेज मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार फुटेज में टक्कर के बाद विवाद, धक्कामुक्की और मारपीट का घटनाक्रम दिखाई देता है। पुलिस ने गौरव की मौत के बाद मामले में धाराएं भी बदली हैं।

गौरव की पत्नी बरखा चौधरी की शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शुरुआत में मामला गंभीर मारपीट और हत्या के प्रयास की धाराओं में दर्ज था। गौरव की मौत के बाद इसे हत्या की धारा में तरमीम किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामले में परिवार की ओर से पुलिस अधिकारियों के सामने आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर शिकायत किए जाने की बात भी सामने आई है। वहीं, पुलिस ने आरोपी की तलाश में दबिश देने की जानकारी दी थी।

गौरव की मौत के बाद परिवार के सामने अब न्याय की लड़ाई है। दूसरी ओर, आरोपी के अदालत में सरेंडर करने के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया कोर्ट के स्तर पर चलेगी। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 22 अगस्त को हुए सड़क विवाद के बाद गौरव गंभीर रूप से घायल हुए, करीब एक महीने उपचार के बाद उनकी मौत हुई और 24 सितंबर को आरोपी अमर ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अब जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान घटना की परिस्थितियों तथा आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर होगी।

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