मेरठ (Meerut): शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट (Central Market) में सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद चली बुलडोजर की कार्रवाई से सैकड़ों व्यापारी रातों-रात बेरोजगार होकर सड़क पर आ गए थे। ध्वस्तीकरण (Demolition) की इस कार्रवाई के बाद से ही व्यापारियों में भारी हताशा और आक्रोश पनप रहा था। लेकिन अब, इन प्रभावित व्यापारियों के लिए उम्मीद की एक बड़ी और ठोस किरण नजर आई है।

राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने व्यापारियों के पुनर्वास और उन्हें राहत देने की तैयारी युद्ध स्तर पर शुरू कर दी है। योजना के तहत, जिन व्यापारियों की दुकानें टूटी हैं या सील हुई हैं, उन्हें सरकारी संपत्तियों पर बेहद कम और न्यूनतम किराये (Low Rent) पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी। ये दुकानें लंबे समय की लीज (Long-term Lease) पर आवंटित की जाएंगी। इसी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए गुरुवार (24 सितंबर 2026) को शहर के दिग्गज भाजपा नेताओं और प्रशासनिक अमले ने 6 प्रस्तावित जगहों का सघन सर्वे (Survey) किया।

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सर्वे में उतरे दिग्गज: 6 स्थानों का किया गया भौतिक निरीक्षण

व्यापारियों को जल्द से जल्द नई जगह विस्थापित करने के लिए गुरुवार सुबह मेरठ के सांसद एवं प्रसिद्ध अभिनेता अरुण गोविल (Arun Govil), प्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री और दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर (Somendra Tomar), तथा महापौर (Mayor) हरिकांत अहलूवालिया ने आवास विकास परिषद और नगर निगम की संयुक्त टीम के साथ शहर के विभिन्न स्थानों का भौतिक निरीक्षण किया।

इन प्रमुख स्थानों का किया गया निरीक्षण:

  1. रंगोली मंडप के पास (सेक्टर-7): आवास विकास का कम्युनिटी सेंटर।

  2. जागृति विहार: गोल मार्केट का एरिया।

  3. नगर निगम का नया कार्यालय (नई सड़क): इसके ठीक पीछे बन रहा नया बहुमंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स।

  4. सेक्टर-4 का कम्युनिटी सेंटर: आवास विकास की एक अन्य संपत्ति।

  5. कैंप ऑफिस के आसपास का क्षेत्र: यहां भविष्य में कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना है।

कुल मिलाकर ऐसी 6 जगहों को चिन्हित किया गया है जहां दुकानें बनाकर या बनी हुई दुकानों को व्यापारियों को सौंपा जा सकता है। इनमें से 3 जगहें नगर निगम (Nagar Nigam) के अधिकार क्षेत्र में हैं और 2 जगहें आवास विकास परिषद (Awas Vikas) की हैं।

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सांसद अरुण गोविल: "चुनाव से कोई संबंध नहीं, नगर निगम में बिल्डिंग तैयार है"

निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद अरुण गोविल ने स्पष्ट किया कि सरकार व्यापारियों के दुख-दर्द को समझती है और सकारात्मक सोच के साथ उनके समाधान के लिए काम कर रही है।

सांसद ने कहा, "नई सड़क स्थित नगर निगम परिसर में एक शानदार कमर्शियल बिल्डिंग पूरी तरह से बनकर तैयार है। हम जल्द ही यहां प्रभावित व्यापारियों के लिए आवंटन (Allotment) की प्रक्रिया शुरू करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कानूनी और तकनीकी समाधान तलाशने में थोड़ा समय जरूर लगा, लेकिन अब काम तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया गया है।"

उन्होंने विपक्ष और कुछ आलोचकों को जवाब देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि व्यापारियों के पुनर्वास की इस पूरी प्रक्रिया का आगामी किसी भी चुनाव (Election) से कोई संबंध नहीं है। यह विशुद्ध रूप से मानवीय संवेदनाओं और व्यापारियों के रोजगार को बचाने का प्रयास है।

राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर: "6 महीने में देंगे अलॉटमेंट लेटर, किरायेदारों का भी रखेंगे ध्यान"

ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने इस पूरी योजना के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं (Practical Aspects) पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि किसी भी पात्र व्यक्ति को दुकान से वंचित नहीं रखा जाएगा।

मंत्री सोमेंद्र तोमर की घोषणाओं के मुख्य बिंदु:

  • किरायेदारों को भी मिलेगा हक: सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस योजना में केवल दुकान के 'मालिकों' (Owners) को ही नहीं, बल्कि उन 'किरायेदारों' (Tenants) को भी नई दुकान उपलब्ध कराने की योजना है, जो वर्षों से सेंट्रल मार्केट में व्यापार कर रहे थे और ध्वस्तीकरण के कारण जिनका रोजगार छिन गया है।

  • न्यूनतम किराया और लंबी लीज: नई दुकानें 'फ्री' (मुफ्त) में नहीं दी जाएंगी, बल्कि इन्हें एक न्यूनतम और व्यवहारिक (Reasonable) किराये पर लंबे समय की लीज पर दिया जाएगा।

  • 6 महीने का लक्ष्य: रंगोली मंडप के पास सेक्टर-7 स्थित संपत्ति के कम्युनिटी सेंटर के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर करीब छह महीने के भीतर व्यापारियों के हाथों में अलॉटमेंट लेटर (आवंटन पत्र) सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए।

  • सुविधाएं और समिति का गठन: नई जगहों पर केवल दुकानें नहीं दी जाएंगी, बल्कि ग्राहकों के लिए पार्किंग (Parking), शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक विशेष 'समिति' (Committee) का गठन किया जाएगा।

महापौर हरिकांत अहलूवालिया: "नगर निगम बनाएगा सैकड़ों दुकानें"

व्यापारियों के पुनर्वास में नगर निगम (Meerut Municipal Corporation) सबसे अहम भूमिका निभा रहा है। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि नगर निगम अपने स्तर पर तीन बड़े कॉम्प्लेक्स की योजना पर काम कर रहा है।

महापौर ने जानकारी दी कि, "नगर निगम कॉम्प्लेक्स (नई सड़क) में करीब 72 दुकानें लगभग तैयार हैं। इसके अलावा, पीछे बन रहे दूसरे कॉम्प्लेक्स में भी बड़ी संख्या में दुकानें उपलब्ध होंगी। हमारी योजना कैंप ऑफिस के आसपास भी करीब 250 दुकानों का एक नया और आधुनिक कॉम्प्लेक्स विकसित करने की है।"

महापौर ने भी इस बात पर जोर दिया कि दुकानों का मासिक किराया इतना 'सामान्य' (Normal) रखा जाएगा कि बेघर हो चुके व्यापारियों पर कोई भारी आर्थिक बोझ न पड़े और वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

व्यापारियों में जगी आस, लेकिन 'अलॉटमेंट समिति' पर टिकी हैं निगाहें

दिग्गज नेताओं के इस सर्वे और आश्वासनों के बाद सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों में एक नई आस जगी है। हालांकि, व्यापारियों का एक धड़ा अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। उनका मानना है कि असली चुनौती 'पात्रता सूची' (Eligibility List) तैयार करने और आवंटन में होगी।

दुकान मालिकों और किरायेदारों के बीच किसका दावा ज्यादा मजबूत होगा? यह एक बड़ा सवाल है। व्यापारी अब उस विशेष समिति के गठन का इंतजार कर रहे हैं, जो आवंटन के नियम और शर्तें (Terms & Conditions) तय करेगी। फिलहाल, प्रशासन की इस सक्रियता ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए ध्वस्तीकरण भी करेगी और व्यापारियों को उजड़ने से बचाने के लिए नई छत भी मुहैया कराएगी।

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