मेरठ शहर के जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित सुमित्रा सत्संग भवन के प्रांगण में शुक्रवार, 25 सितंबर को अत्यधिक धार्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ श्रीमद् भागवत पुराण कथा सप्ताह का भव्य शुभारंभ हुआ। वेदांत सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित इस सात दिवसीय कथा सप्ताह का मुख्य उद्देश्य पितृ पक्ष (Pitru Paksha) के विशेष अवसर पर पूर्वजों की शांति, मोक्ष प्राप्ति और समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है। कथा के पहले दिन बड़ी संख्या में शहर के श्रद्धालु सुमित्रा सत्संग भवन पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होकर कथा का रसास्वादन किया।
भागवत पुराण है भगवान कृष्ण का वांग्मय स्वरूप कार्यक्रम के प्रथम दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्रीमद् भागवत महापुराण के महात्म्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। सायं 4 बजे से 6:30 बजे तक चले इस मंगलमय कथा सत्र में स्वामी जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत पुराण केवल एक ग्रंथ या पुस्तक नहीं है, बल्कि यह साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय (शब्दमयी) स्वरूप है। उन्होंने बताया कि यह परम हंसों की संहिता है, जिसकी रचना महर्षि वेदव्यास जी ने लोक कल्याण और मनुष्य के उद्धार के लिए की थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलियुग में भागवत कथा का श्रवण मात्र ही मनुष्य के सभी पापों का नाश कर उसे मोक्ष के मार्ग पर ले जाता है। विशेष रूप से पितृ पक्ष में भागवत कथा सुनने और आयोजित कराने से पितरों को असीम शांति और सद्गति प्राप्त होती है।

12 स्कंधों और 18 हजार श्लोकों में समाहित है जीवन का सार कथा व्यास स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी ने कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए भागवत के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि इस महापुराण में मुख्य वक्ता परमहंस शुकदेव जी महाराज ने श्रापग्रस्त राजा परीक्षित को उनके जीवन के अंतिम सात दिनों में मोक्ष का मार्ग दिखाया था। शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को 12 स्कंधों और 18,000 श्लोकों के माध्यम से जो दिव्य और दुर्लभ ज्ञान प्रदान किया, वही आज श्रीमद् भागवत के रूप में हमारे बीच उपलब्ध है। इस ज्ञान में जीवन जीने की कला, मृत्यु का अटल सत्य, वैराग्य और भगवान की विविध लीलाओं का अद्भुत वर्णन है। इसे पूरी श्रद्धा के साथ सुनकर मनुष्य जन्म-मरण के कष्टदायी चक्र से मुक्त हो सकता है।
भक्तिभाव से संपन्न हुआ व्यास पूजन कथा के विधिवत शुभारंभ से पहले मुख्य यजमान श्री मुकेश शर्मा ने सपरिवार पूरी श्रद्धा, आस्था और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यास पूजन किया। उन्होंने व्यासपीठ पर विराजमान महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी का माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर सुमित्रा सत्संग भवन का पूरा प्रांगण भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भजनों से गूंज उठा, जिससे वहां का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने और इसे सफल बनाने में वेदांत सत्संग समिति के सदस्यों का विशेष व सक्रिय योगदान रहा। इस पावन अवसर पर कर्णप्रिया विश्नोई, बी.डी. पाण्डेय, विपिन कुमार और सन्थर पाल सहित अनेक गणमान्य लोग एवं सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। वेदांत सत्संग समिति की ओर से बताया गया है कि यह कथा सप्ताह प्रतिदिन इसी समय और उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी धर्मप्रेमी सादर आमंत्रित हैं।
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