मेरठ: देश भर में डिजिटल इंडिया मुहिम के तहत डिजिटल लेन-देन को काफी बढ़ावा मिला है। वर्तमान में यूपीआई (UPI) भुगतान हर छोटे-बड़े व्यापार का एक अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन, अब यूपीआई से होने वाले मर्चेंट भुगतान पर प्रस्तावित एमडीआर (Merchant Discount Rate - MDR) शुल्क ने व्यापारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क के खिलाफ व्यापारियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) के राष्ट्रव्यापी आह्वान का समर्थन करते हुए जिला मेरठ टेलीकॉम ने आगामी 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन मेरठ में ‘नो यूपीआई डे’ (No UPI Day) मनाने का बड़ा फैसला लिया है।
काले कपड़े से क्यूआर कोड ढककर जताएंगे विरोध व्यापारियों की ओर से इस विरोध प्रदर्शन का तरीका बेहद शांतिपूर्ण और सांकेतिक रखा गया है। 2 अक्टूबर के दिन मेरठ के व्यापारी अपनी दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर (UPI QR) कोड को काले कपड़े से ढक देंगे। इसके माध्यम से व्यापारी बिना किसी हंगामे या बाजार बंदी के सरकार और संबंधित एजेंसियों तक अपना संदेश पहुंचाएंगे। जिला मेरठ टेलीकॉम के अध्यक्ष सरदार राजबीर सिंह ने जिले के सभी मोबाइल व्यापारियों के साथ-साथ अन्य कारोबारी संगठनों से भी अपील की है कि वे बड़ी संख्या में इस ‘नो यूपीआई डे’ अभियान का हिस्सा बनें और अपनी एकजुटता दिखाएं।
0.40 प्रतिशत एमडीआर शुल्क बना चिंता का कारण व्यापारियों का मुख्य विरोध ₹2,000 से अधिक के यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत एमडीआर शुल्क को लेकर है। जिला मेरठ टेलीकॉम के अध्यक्ष सरदार राजबीर सिंह का कहना है कि व्यापारियों ने सरकार की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को खुले मन से अपनाया है और इसे ग्राहकों तक पहुंचाया है। लेकिन, मोबाइल रिटेल का कारोबार पहले से ही बेहद कम मार्जिन (मुनाफे) पर चलता है। ऐसे में अगर यूपीआई लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो इसका सीधा असर व्यापारियों की सीमित कमाई पर पड़ेगा। छोटे और मध्यम स्तर के दुकानदारों के लिए यह शुल्क एक बड़ा आर्थिक बोझ बन जाएगा, जिससे उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा।
डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं हैं व्यापारी व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी तरह से डिजिटल भुगतान व्यवस्था या कैशलेस इकॉनमी के खिलाफ नहीं हैं। वे स्वयं इसे बढ़ावा देने के पक्ष में हैं, लेकिन उनका मानना है कि डिजिटल बुनियादी ढांचे का खर्च व्यापारियों की जेब पर डालना कतई उचित नहीं है। इस अभियान का मुख्य मकसद व्यापारियों की जायज चिंताओं और उनकी मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाना है, ताकि नीति निर्माता इस फैसले के जमीनी प्रभाव को समझ सकें।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›क्या हैं व्यापारियों की प्रमुख मांगें? इस विरोध प्रदर्शन के जरिए व्यापारियों ने मुख्य रूप से तीन मांगे रखी हैं:
‘नो यूपीआई डे’ अभियान के तहत व्यापारियों की प्रमुख मांगों में मोबाइल रिटेल कारोबार में UPI लेनदेन पर शून्य MDR व्यवस्था जारी रखना शामिल है। इसके अलावा ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत MDR शुल्क लगाने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
व्यापारी संगठनों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली नीतियां बनाते समय छोटे कारोबारियों के हित और कारोबार की लागत को ध्यान में रखने की मांग भी की है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान से जुड़ी नीतियों में छोटे दुकानदारों पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक प्रभाव का भी आकलन किया जाना चाहिए।
2 अक्टूबर को प्रस्तावित यह अभियान किस स्तर तक प्रभावी रहेगा और इसमें मेरठ के कितने कारोबारी संगठन शामिल होंगे, इसकी जानकारी अभियान के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल जिला मेरठ टेलीकॉम की ओर से मोबाइल व्यापारियों और अन्य कारोबारी संगठनों से इसमें शामिल होने की अपील की गई है।
डिस्क्लेमर: इस रिपोर्ट में ‘नो यूपीआई डे’, व्यापारियों की मांगों और प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत MDR शुल्क से संबंधित विवरण उपलब्ध कराई गई संगठनात्मक जानकारी पर आधारित हैं। शुल्क व्यवस्था से जुड़े आधिकारिक नियमों में बदलाव या अंतिम निर्णय की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन्हें लागू सरकारी नियम के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
Sabse pehle comment karne wale banein.