मेरठ में कच्ची कॉलोनियों और पुराने वाहनों पर कार्रवाई के मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने आंदोलन की रणनीति तैयार की है। संगठन की समीक्षा बैठक जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में हुई। इसमें जिले के अलग-अलग गांवों से पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
बैठक में मुख्य रूप से मेरठ विकास प्राधिकरण (MEDA) की कार्रवाई और परिवहन विभाग की ओर से पुराने वाहनों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर चर्चा हुई। पदाधिकारियों ने दोनों मुद्दों को लेकर किसानों और आम लोगों की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि सोमवार, 28 सितंबर 2026 को MEDA और आरटीओ कार्यालय का घेराव किया जाएगा। भाकियू के पदाधिकारी और कार्यकर्ता ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
पुराने वाहनों पर कार्रवाई का भी विरोध
मेरठ में परिवहन विभाग ने निर्धारित आयु सीमा पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। रिपोर्टों के मुताबिक, विभाग 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को लेकर अभियान चला रहा है। कई स्थानों पर घरों और सार्वजनिक जगहों पर खड़े ऐसे वाहनों को भी क्रेन से उठाए जाने की कार्रवाई सामने आई है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›इस कार्रवाई को लेकर वाहन मालिकों और कुछ संगठनों की ओर से आपत्ति भी सामने आई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश युवा अधिवक्ता एसोसिएशन ने 23 सितंबर को आरटीओ कार्यालय पहुंचकर पुराने वाहनों को दूसरे राज्यों या जिलों में ले जाने और बेचने का विकल्प देने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया था।
भाकियू टिकैत की बैठक में भी इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन की रणनीति पर चर्चा हुई। जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने कहा कि संगठन के अनुसार परिवहन विभाग की नीतियों से किसानों और आम लोगों को परेशानी हो रही है।

कच्ची कॉलोनियों की कार्रवाई पर भी नाराजगी
दूसरा प्रमुख मुद्दा मेरठ में अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के खिलाफ चल रही कार्रवाई है। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के अवैध निर्माण और कॉलोनियों से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाया है। 21 सितंबर की सुनवाई के बाद जोन-ए में चिह्नित 16,726 अनधिकृत भवनों को सील करने के आदेश की रिपोर्ट सामने आई। वहीं उल्देपुर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित करने का आदेश भी दिया गया।
उल्देपुर मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया था कि संबंधित आवासीय कॉलोनियों के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण से नक्शे स्वीकृत नहीं कराए गए थे। अदालत ने मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
भाकियू की बैठक में इन कार्रवाईयों के बीच कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के घरों को लेकर किसानों और कार्यकर्ताओं की चिंताओं पर चर्चा की गई। संगठन ने इसे लेकर MEDA कार्यालय के घेराव का निर्णय लिया है।
सम्मानजनक समाधान नहीं तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने बैठक में कहा कि सोमवार को संगठन के कार्यकर्ता शहर पहुंचकर MEDA और परिवहन विभाग के कार्यालयों का घेराव करेंगे और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि दोनों मुद्दों का सम्मानजनक तरीके से समाधान नहीं हुआ तो संगठन आगे अनिश्चितकालीन आंदोलन की तैयारी करेगा। प्रदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुंचने की बात कही गई है।
बैठक में हर्ष चहल, मेजर सुरेंद्र, विनेश, देशपाल, ऋषिपाल, मोनू, सत्येंद्र, मनोज, सरदार जज सिंह, बंटी प्रधान, वीरेंद्र, कृष्णपाल, जगत सिंह और रामफल शर्मा समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
डिस्क्लेमर: भाकियू के 28 सितंबर को प्रदर्शन और घेराव से जुड़े विवरण संगठन की बैठक में लिए गए निर्णय पर आधारित हैं। पुराने वाहनों और अवैध निर्माणों पर सरकारी कार्रवाई से संबंधित तथ्य उपलब्ध न्यायिक आदेशों और प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित हैं। कच्ची कॉलोनियों के सभी मकानों पर एक समान कार्रवाई होगी, ऐसा निष्कर्ष इस खबर से नहीं निकाला जाना चाहिए।
Sabse pehle comment karne wale banein.