मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं या जिनके रिकॉर्ड में विसंगति के कारण नोटिस जारी हुआ है, उनके मामलों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर जाकर जरूरी दस्तावेज लेने में मदद करेंगे। संबंधित दस्तावेज आयोग के पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे और मामले पर निर्वाचन अधिकारी स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।

SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में नाम नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति का नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हट गया है। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाता अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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30 राज्यों में 13.37 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर

चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में करीब 13.37 करोड़ नाम शामिल नहीं हुए हैं। यह संबंधित क्षेत्रों के SIR से पहले के कुल मतदाताओं का लगभग 14.1 प्रतिशत है।

उपलब्ध आंकड़ों में महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़, उत्तर प्रदेश में करीब 2.05 करोड़ और पश्चिम बंगाल में करीब 1.74 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। इसी तरह तमिलनाडु में करीब 74 लाख और तेलंगाना में करीब 73.39 लाख नाम शामिल नहीं हुए हैं। तस्वीर में दिए राज्यवार आंकड़े भी इसी डेटा को दर्शाते हैं।

यह आंकड़ा ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए नामों का है। इसे सीधे तौर पर अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटाए गए नामों के बराबर नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि दावे और आपत्तियों के बाद पात्र लोगों के नाम अंतिम सूची में शामिल किए जा सकते हैं।

दिल्ली और महाराष्ट्र में 30 अक्टूबर तक दावा

चुनाव आयोग के ताजा फैसले के अनुसार दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। इसके बाद दोनों राज्यों में मामलों के निपटारे की अलग-अलग समयसीमा तय की गई है।

गोवा में जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में छूट गए हैं, वहां ब्लॉक स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर Form-6 एकत्र करने की प्रक्रिया में मदद करेंगे। Form-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का दावा किया जा सकता है।

आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बीच बैठक

SIR को लेकर यह प्रक्रिया ऐसे समय आगे बढ़ रही है जब चुनाव आयोग के भीतर कामकाज और कुछ फैसलों को लेकर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने अलग-अलग मौकों पर मतदाता डेटा और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे भी उठाए।

चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उसके अनुसार पिछले एक वर्ष के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। इंडियन एक्सप्रेस ने यह भी रिपोर्ट किया कि संधू और जोशी द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र चुनाव आयोग के SIR संबंधी किसी फैसले के बजाय प्रशासनिक और कार्य-वितरण से जुड़े विषयों पर थे।

इस पूरे विवाद के बीच राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि आयोग अपनी प्रक्रिया और निर्णयों को लेकर स्पष्टीकरण दे रहा है। इन राजनीतिक दावों और आरोपों को संबंधित पक्षों के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मतदाताओं के लिए जरूरी बात: यदि SIR की ड्राफ्ट सूची में आपका नाम नहीं है या आपको किसी रिकॉर्ड विसंगति के संबंध में नोटिस मिला है, तो निर्धारित समयसीमा के भीतर दावा या आपत्ति दाखिल करना महत्वपूर्ण है। दस्तावेजों और आवेदन की प्रक्रिया संबंधित निर्वाचन अधिकारी/बीएलओ के निर्देश के अनुसार पूरी की जा सकती है।

डिस्क्लेमर: SIR के दौरान ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए नामों को अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटाया गया नाम नहीं माना जाना चाहिए। दावे, आपत्तियों और सत्यापन के बाद अंतिम सूची में बदलाव संभव है। राज्यवार आंकड़े संबंधित चरण में जारी ड्राफ्ट रोल के हैं और आगे संशोधित हो सकते हैं।

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