मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित सुमित्रा सत्संग भवन में शनिवार, 26 सितंबर 2026 को वेदांत सत्संग समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा सप्ताह के दूसरे दिन कथा का आयोजन किया गया। शाम 4 बजे से 6:30 बजे तक कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को नारद जी, भक्ति महारानी तथा गोकर्ण और धुंधकारी से जुड़े प्रसंग सुनाए।

पितृ पक्ष के अवसर पर आयोजित इस कथा में स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के संबंध को समझाया। उन्होंने कहा कि ज्ञान और वैराग्य भक्ति महारानी के पुत्र हैं। कथा के माध्यम से उन्होंने कलियुग में भक्ति के महत्व और आध्यात्मिक जीवन में ज्ञान तथा वैराग्य की भूमिका पर प्रकाश डाला।

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भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का प्रसंग

कथा व्यास ने कहा कि कलियुग में भक्ति युवा अवस्था में है, जबकि ज्ञान और वैराग्य वृद्ध और दुर्बल हो गए हैं। इसी कारण भक्ति महारानी दुखी हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भागवत कथा के श्रवण और सत्संग से आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का आह्वान किया।

स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने पितृ पक्ष में श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण के धार्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में भागवत कथा का श्रवण पितरों की मुक्ति और सद्गति के लिए पुण्यकारी माना जाता है।

पांच ऋणों से मुक्ति के बताए उपाय

कथा के दौरान गृहस्थ जीवन में विभिन्न दायित्वों का उल्लेख करते हुए स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने देवऋण, ऋषिऋण, पितृऋण, नृऋण और भूतऋण की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि देवऋण से मुक्ति के लिए देवयज्ञ, ऋषिऋण से उऋण होने के लिए स्वाध्याय और सत्संग, जबकि पितृऋण से मुक्ति के लिए श्राद्ध एवं तर्पण की परंपरा का पालन करना चाहिए। इसी तरह नृऋण से उऋण होने के लिए अतिथि सेवा तथा भूतऋण से उऋण होने के लिए प्राणियों की सेवा करते रहने का संदेश दिया।

कथा में गोकर्ण और धुंधकारी के प्रसंग के माध्यम से भी श्रद्धालुओं को धर्म, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े संदेश दिए गए। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक प्रसंगों का श्रवण किया।

व्यास पूजन में श्रद्धालु हुए शामिल

कार्यक्रम में कथा व्यास का व्यास पूजन मुख्य यजमान मुकेश शर्मा ने किया। इस अवसर पर अलका गुप्ता, अनुराधा माहेश्वरी, चंद्रकांता नेगी, संथरपाल सहित समिति से जुड़े अन्य लोग मौजूद रहे।

वेदांत सत्संग समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांक सिंघल ने बताया कि पितृ पक्ष के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा सप्ताह में श्रद्धालु धार्मिक प्रसंगों का श्रवण कर रहे हैं। कथा के माध्यम से लोगों को सत्संग, स्वाध्याय, सेवा और धार्मिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया जा रहा है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार वेदांत सत्संग समिति की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। धार्मिक मान्यताओं और कथाओं से जुड़े दावे आस्था एवं परंपराओं पर आधारित हैं।

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