नई दिल्ली/लखनऊ। उपभोक्ताओं को पैकेज्ड दैनिक उपयोग की वस्तुओं के बारे में जानकारी देने से जुड़े नियमों में केंद्र सरकार ने बदलाव किया है। Legal Metrology (Packaged Commodities) Fourth Amendment Rules, 2026 के तहत साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, अन्य कॉस्मेटिक्स और प्रसाधन सामग्री पर शाकाहारी या मांसाहारी मूल की पहचान के लिए रंगीन प्रतीक का प्रावधान किया गया है। अधिसूचना 21 सितंबर 2026 को जारी हुई और नियम उसी दिन से प्रभावी हो गए।
पैकेज पर हरा और लाल-भूरा डॉट
नई अधिसूचना में नियम 6 के उप-नियम 4A में नया क्लॉज जोड़ा गया है। इसके मुताबिक संबंधित उत्पाद के मुख्य डिस्प्ले पैनल के शीर्ष पर शाकाहारी उत्पाद के लिए हरा बिंदु और मांसाहारी मूल वाले उत्पाद के लिए लाल या भूरा बिंदु प्रदर्शित करना होगा। यह प्रावधान साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, अन्य कॉस्मेटिक्स और toiletries पर लागू है। साथ ही पुराने नियम 6(8) को हटा दिया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसे पूरी तरह नया उपभोक्ता-चिह्न कहना सही नहीं होगा। उपभोक्ता मामले विभाग की पुरानी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और अन्य कॉस्मेटिक्स पर हरा तथा लाल/भूरा डॉट लगाने की व्यवस्था 2014 के संशोधन से ही अनिवार्य की गई थी। 2026 का संशोधन मुख्य रूप से इस प्रावधान को नियम 6(4A)(d) में स्थानांतरित करता है और पुराने उप-नियम 6(8) को हटा देता है।
इस बदलाव का मतलब यह है कि कंपनियों को पैकेजिंग पर उत्पाद के शाकाहारी या मांसाहारी मूल से जुड़ा निर्धारित प्रतीक स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा। उपभोक्ता मामलों के विभाग की वेबसाइट पर Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules से संबंधित अधिसूचनाएं उपलब्ध हैं।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›यूपी में होटल-रेस्तरां की रसोई पर भी निगरानी
उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यानी FSDA ने होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण में भोजन की तैयारी और स्टोरेज की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार निरीक्षण के दौरान यह देखा जा रहा है कि शाकाहारी और मांसाहारी भोजन को उचित तरीके से अलग रखा और तैयार किया जा रहा है या नहीं।
खाद्य सुरक्षा के मौजूदा मानकों में कच्चे मांस, पोल्ट्री और सीफूड के लिए अलग क्षेत्र तथा अलग कटिंग बोर्ड, चाकू और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। FSSAI की निरीक्षण चेकलिस्ट में भी कच्चे और पके भोजन तथा शाकाहारी और मांसाहारी भोजन को उचित रूप से अलग रखने की जांच का प्रावधान है।
FSSAI के खाद्य सुरक्षा मानकों में शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों की तैयारी, प्रसंस्करण और कुकिंग को अलग रखने तथा कच्चे मांस और पोल्ट्री को दूसरे खाद्य पदार्थों से अलग रखने की व्यवस्था भी दी गई है।
नवंबर से जांच अभियान की तैयारी
उत्तर प्रदेश में 1 नवंबर 2026 से होटल-रेस्तरां और अन्य खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों के निरीक्षण को लेकर विशेष अभियान की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक जांच में खाद्य लाइसेंस, पानी की गुणवत्ता, कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, कच्चे माल, स्टोरेज, साफ-सफाई, पेस्ट कंट्रोल और रसोई की व्यवस्था के साथ खाद्य पदार्थों के अलग-अलग भंडारण और तैयारी की व्यवस्था भी देखी जाएगी।
इसलिए यूपी के मामले में इसे केवल नवंबर से नया वेज-नॉनवेज कानून लागू होने के रूप में देखना उचित नहीं है। उपलब्ध दस्तावेजों और रिपोर्टों से स्पष्ट है कि खाद्य सुरक्षा मानकों में अलग तैयारी, उपकरण और स्टोरेज से जुड़े प्रावधान पहले से मौजूद हैं, जबकि अब इनके अनुपालन की जांच और निगरानी पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
नोट: पैकेज्ड कॉस्मेटिक्स पर हरे और लाल/भूरे डॉट की व्यवस्था 2014 से मौजूद थी; 21 सितंबर 2026 का संशोधन इसे नियम 6(4A)(d) में पुनर्स्थापित करता है। उत्तर प्रदेश में होटल-रेस्तरां संबंधी निरीक्षण और खाद्य सुरक्षा मानकों को भी इसी संदर्भ में समझना चाहिए।
Sabse pehle comment karne wale banein.