उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से आसमान से आफत बरस रही है। प्रदेश के लगभग हर हिस्से में 65 घंटों तक लगातार हुई मूसलाधार बारिश और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी ने जनजीवन को पूरी तरह से पंगु बना दिया है। इस भयानक प्राकृतिक आपदा के चलते पूरे राज्य में भारी तबाही देखने को मिल रही है, जिसमें अब तक 60 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। शहरों में जलभराव की स्थिति इतनी भयावह है कि लोगों के घरों के बेडरूम और किचन तक में पानी घुस गया है।

इस चक्रवाती बारिश ने कई शहरों में बारिश के पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं:

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लखनऊ: राजधानी में बारिश ने 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 26 सितंबर को एक ही दिन में सबसे ज्यादा 135.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। इससे पहले 14 सितंबर 2012 को 138 मिमी बारिश हुई थी।

कानपुर: यहां 45 साल का रिकॉर्ड टूटा है। 1981 के बाद पहली बार 24 घंटे के भीतर 175.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। भारी जलभराव और तेज बहाव के कारण कानपुर-इटावा हाईवे का 200 मीटर का हिस्सा बुरी तरह धंस गया है, जिससे यातायात बाधित हुआ है।

पश्चिमी यूपी (West UP) का हाल

नदियों का जलस्तर बढ़ा, तापमान में भारी गिरावट

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह से बिगड़ चुका है

संभल: लगातार 30 घंटे हुई बारिश के कारण तापमान में 14 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट आई है, जिससे तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है।

बरेली: शहर में रुक-रुक कर बारिश जारी है। अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है, जबकि नमी का स्तर 94% तक पहुंच गया है।

अमरोहा और पीलीभीत: पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण अमरोहा में गंगा नदी का जलस्तर 199.40 मीटर पर पहुंच गया है, जो 202.00 मीटर के खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बिजनौर बैराज से 60 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद पीलीभीत में शारदा और देवहा नदियां भी उफान पर आ गई हैं।

पूर्वी यूपी (East UP) का हाल: 22 जिलों में बाढ़ का अलर्ट

गोरखपुर और कुशीनगर: गोरखपुर के शहरी इलाकों में भीषण जलभराव के चलते कारें और दोपहिया वाहन पानी में डूब गए हैं। कुशीनगर में गंडक बैराज के 36 फाटक एक साथ खोल दिए गए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने 22 जिलों में अचानक बाढ़ (Flash Flood) का खतरा घोषित कर दिया है।

श्रावस्ती: तराई इलाकों में बिगड़ते हालात और खराब मौसम को देखते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का श्रावस्ती दौरा रद्द कर दिया गया है।

वाराणसी (राहत की खबर): बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती सिस्टम अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। 28 सितंबर से राज्य में केवल हल्की बारिश की उम्मीद है और अक्टूबर की शुरुआत से मौसम पूरी तरह साफ हो जाएगा।

कुदरत का कहर: हादसों में 42 लोगों की दर्दनाक मौत

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दिनों में बारिश, तेज हवाओं और खराब मौसम के कारण पूरे प्रदेश में 60 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। ये सभी हादसे मुख्य रूप से पेड़ गिरने, मकान ढहने और बिजली गिरने के कारण हुए हैं।

जिलों के अनुसार मृतकों का आंकड़ा:

  • लखीमपुर खीरी: 6 मौतें
  • सीतापुर: 6 मौतें
  • गोरखपुर: 5 मौतें
  • बहराइच: 5 मौतें
  • बलरामपुर: 4 मौतें
  • हरदोई: 4 मौतें
  • अयोध्या: 4 मौतें
  • बाराबंकी: 4 मौतें
  • हमीरपुर: 3 मौतें
  • गोंडा: 2 मौतें
  • मैनपुरी: 2 मौतें
  • कानपुर शहर: 2 मौतें
  • कानपुर देहात: 2 मौतें

अमेठी, श्रावस्ती, एटा, महोबा, बांदा, जौनपुर, संतकबीरनगर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, फर्रुखाबाद और फतेहपुर में 1-1 व्यक्ति की मौत दर्ज की गई है।

नोट:-ये सभी हादसे बिजली, पेड़ और मकान गिरने हुए हैं।

राहत बचाव कार्य और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर

आपदा की इस घड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें और जर्जर इमारतों व जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।

लखनऊ नगर निगम और प्रशासन ने आपातकालीन स्थितियों, जलभराव और पेड़ गिरने जैसी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं। नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कराने और सहायता प्राप्त करने के लिए टोल-फ्री नंबर 1533 पर कॉल कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त आपात स्थिति के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित नंबर भी जारी किए हैं:

  • 9219902911
  • 9219902912
  • 9219902913
  • 9219902914

नोट/डिस्क्लेमर: मौतों और स्थानीय नुकसान के आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। इस रिपोर्ट में 27 सितंबर 2026 तक उपलब्ध ताजा सार्वजनिक रिपोर्टों और IMD के मौसम संबंधी आंकड़ों का उपयोग किया गया है। 

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