मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित सुमित्रा सत्संग भवन में पितृ पक्ष के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा सप्ताह के तृतीय दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ कथा का आयोजन हुआ। रविवार, 27 सितंबर 2026 को वेदांत सत्संग समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा के आध्यात्मिक महत्व और जीवन में चार पुरुषार्थों की भूमिका के बारे में बताया।

कार्यक्रम शाम 4 बजे से 6:30 बजे तक चला। कथा के दौरान स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने कहा कि सभी जीवों की मूल चाह को चार पुरुषार्थों के रूप में समझा जाता है। इनमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अर्थ की सार्थकता धर्म में है और धर्म का अंतिम प्रयोजन मोक्ष की ओर ले जाना है।

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भागवत कथा से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश

कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से इंद्रिय भोगों में अत्यधिक आसक्त होने के बजाय स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने तथा भागवत तत्व को जानने की जिज्ञासा रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण व्यक्ति को चारों पुरुषार्थों की दिशा समझने में सहायता करता है।

स्वामी अनन्तानंद सरस्वती ने राजा परीक्षित के जन्म से लेकर उन्हें मिले श्राप तक की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने के लिए राजा परीक्षित जैसी पात्रता और जिज्ञासा आवश्यक है। उनके अनुसार, राजा परीक्षित ने भगवद्भक्ति के बल पर शुकदेव जैसे गुरु की प्राप्ति की और उनसे भागवत कथा का श्रवण किया।

कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मन के दोषों को दूर करने और आत्मिक चेतना को जागृत करने का माध्यम है। उनके अनुसार, भागवत कथा के श्रवण से मन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की स्थापना होती है। उन्होंने इसे जीवन में रहते हुए मोक्ष की अनुभूति से जोड़ते हुए जीवनमुक्ति की अवधारणा भी समझाई।

व्यास पूजन में श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम के दौरान राजीव अग्रवाल, नोएडा ने व्यास पूजन किया। कथा में अरविन्द शर्मा, विनीत कुमार, बीडी पाण्डेय, बीना पाण्डेय, राजीव शर्मा, चंद्रकान्ता नेगी और अलका गुप्ता सहित अन्य श्रद्धालु एवं समिति से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

वेदांत सत्संग समिति की ओर से आयोजित कथा सप्ताह पितृ पक्ष के अवसर पर किया जा रहा है। आयोजन के दौरान श्रद्धालु नियमित रूप से कथा का श्रवण कर रहे हैं। समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांक सिंघल ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक संदेश से जोड़ना है।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक कथा का श्रवण किया। कथा में धर्म, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष से जुड़े विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।

डिस्क्लेमर: यह समाचार वेदांत सत्संग समिति की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दिए गए वक्तव्य और कार्यक्रम संबंधी विवरण आयोजक समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं।

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