मेरठ में शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट और शहर में अनधिकृत निर्माण के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हलचल तेज हो गई है। 21 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के जोन-A में सर्वे के दौरान चिन्हित 16,726 अनधिकृत ढांचों के संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कोर्ट के सामने रखी गई रिपोर्ट के अनुसार इनमें 12,907 आवासीय, 874 मिश्रित उपयोग और 2,945 गैर-आवासीय निर्माण शामिल हैं।

कोर्ट ने पहले चरण में इन परिसरों को खाली कराने और सील करने तथा जोन-A में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं जोन-B, C और D की स्थिति पर अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होनी है।

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आदेश के बाद लोगों में चिंता, विरोध प्रदर्शन

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित संपत्तियों से जुड़े लोगों में चिंता देखी जा रही है। इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुआ। प्रदर्शनकारियों की ओर से डीएम डॉ. वीके सिंह से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी गईं। प्रशासन की ओर से लोगों से अपनी मांगें लिखित रूप में देने को कहा गया, ताकि उन्हें शासन स्तर पर भेजा जा सके।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे और उसके क्रियान्वयन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होने की प्रक्रिया जारी है। खास तौर पर यह सवाल बना हुआ है कि सर्वे में चिन्हित संपत्तियों की वास्तविक स्थिति क्या है और री-सर्वे के बाद इनमें से किन निर्माणों पर कार्रवाई की आवश्यकता होगी।

मंत्री बोले- जोन A, B, C, D में दोबारा होगा सर्वे

23 सितंबर को मेरठ सर्किट हाउस में हुई प्रेसवार्ता में राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि MDA द्वारा जोन-A, B, C और D में दोबारा री-सर्वे कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रभावित व्यापारियों और आम लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार काम करेगी।

मंत्री के अनुसार, शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट से प्रभावित व्यापारियों के लिए पुनर्वास नीति लाई जा रही है। लगभग 650 व्यापारियों के लिए सरकारी जमीन पर दुकानों की व्यवस्था करने की योजना भी बताई गई है। इन दुकानों को लीज पर देने और नाममात्र का किराया लेने की बात कही गई है।

24 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने यह भी कहा था कि सभी जोन का री-सर्वे दिसंबर से पहले कराने की योजना है। हालांकि, री-सर्वे की विस्तृत प्रक्रिया और उसके आधार पर प्रत्येक संपत्ति की स्थिति क्या होगी, यह प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

उल्देपुर मामले में न्यायिक आयोग भी गठित

मेरठ के बाहरी क्षेत्र उल्देपुर में अवैध आवासीय कॉलोनियों के विकास के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया है। आयोग इस मामले में जमीन की प्रकृति, अवैध कॉलोनियों के विकास और संबंधित पहलुओं की जांच करेगा।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जोन-B, C और D से संबंधित विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में पेश की जाए। इसलिए फिलहाल 16,726 का आंकड़ा जोन-A के सर्वे से संबंधित है, इसे पूरे मेरठ की कुल अनधिकृत संपत्तियों का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

अब री-सर्वे और आगे की कार्रवाई पर नजर

एक ओर प्रशासन के सामने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कराने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोगों की संपत्तियों और दस्तावेजों की स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। मंत्री की ओर से री-सर्वे और पुनर्वास नीति को लेकर दिए गए बयानों के बाद अब इसकी प्रक्रिया शुरू होने और रिपोर्ट सामने आने का इंतजार है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित री-सर्वे के बीच आगे की कार्रवाई किस तरह होती है, इस पर मेरठ के प्रभावित निवासियों और व्यापारियों की नजर बनी हुई है।

डिस्क्लेमर: इस रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश, प्रशासनिक कार्रवाई और मंत्री के सार्वजनिक बयानों के आधार पर जानकारी दी गई है। री-सर्वे की अंतिम रिपोर्ट और प्रत्येक संपत्ति की स्थिति अभी अलग-अलग जांच और संबंधित प्राधिकरण की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

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