बिजनौर में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों पर अपना पक्ष रखा। रोडवेज स्थित जिला पंचायत अध्यक्ष कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह ने कांग्रेस और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर बीजेपी की प्रतिक्रिया रखी।

साकेंद्र प्रताप सिंह ने कांग्रेस पर चुनावी और संगठनात्मक कमियों से ध्यान हटाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने राजनीतिक प्रदर्शन और संगठन से जुड़े मुद्दों पर आत्ममंथन करना चाहिए। ये बातें बीजेपी की ओर से प्रेस वार्ता में कही गईं।

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SIR और चुनाव आयोग के फैसलों पर बीजेपी का पक्ष

प्रेस वार्ता में बीजेपी ने 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस नोट का हवाला दिया। आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा था कि देशभर में SIR से जुड़े आदेशों को पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी। आयोग ने यह भी बताया कि 24 जून 2025 को जारी SIR आदेश सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए था, जिसकी शुरुआत बिहार से हुई और बाद में अन्य राज्यों में प्रक्रिया आगे बढ़ी।

बीजेपी ने इसी संदर्भ में कांग्रेस के उन सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिनमें चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर मतभेद का मुद्दा उठाया गया था। पार्टी ने कहा कि आयोग की ओर से जारी संयुक्त बयान उसके फैसलों की प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट करता है।

कैबिनेट सचिव को पत्र और Form-6 का मुद्दा

प्रेस वार्ता में कैबिनेट सचिव को भेजे गए कथित पत्र का मुद्दा भी उठाया गया। बीजेपी ने चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि यह पत्र आयोग की किसी नीति या IT विभाग से जुड़े निर्णय का मामला नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी से संबंधित प्रशासनिक विषय था। 26 सितंबर की आयोग की बैठक के बाद जारी जानकारी में भी इस पत्र को प्रतिनियुक्त अधिकारी से जुड़े प्रशासनिक मामले के रूप में स्पष्ट किया गया था।

Form-6 को लेकर भी बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया में कोई ऐसा बदलाव नहीं किया गया है, जैसा कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया जा रहा है। चुनाव आयोग के मौजूदा मतदाता सेवा पोर्टल पर Form-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपलब्ध है।

बीजेपी ने इस मुद्दे पर 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले में बिहार में SIR से जुड़े विभिन्न कानूनी सवालों पर विचार किया गया था। अदालत ने SIR की प्रक्रिया, दस्तावेजों और मतदाता सूची में नाम शामिल करने से संबंधित कई पहलुओं पर निर्देश दिए थे।

राहुल गांधी और कांग्रेस के बयानों पर भी निशाना

प्रेस वार्ता में बीजेपी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पर चुनाव आयोग, EVM तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सार्वजनिक सवाल उठाने का आरोप लगाया। साकेंद्र प्रताप सिंह ने कांग्रेस से अपने आरोपों पर आत्ममंथन करने और माफी मांगने की मांग रखी।

बीजेपी की ओर से लगाए गए इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग और SIR को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों की ओर से भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में बना हुआ है।

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