मुंबई की जानी-मानी पत्रकार और शोधकर्ता Dr Vaidehi Taman ने कश्मीर घाटी की सदियों पुरानी ज्ञान, दर्शन और आध्यात्मिक परंपरा को दुनिया के सामने लाने का बीड़ा उठाया है। अक्सर राजनीति और सुरक्षा से जुड़ी समसामयिक घटनाओं के लिए चर्चा में रहने वाले कश्मीर के एक बिल्कुल अलग पहलू को उन्होंने अपने लेखन का आधार बनाया है। डॉ. तमन ने अपने पांच विशेष क्रॉनिकल्स के जरिए कश्मीर के संतों, दार्शनिकों और समृद्ध सभ्यतागत विरासत को सहेजने का महत्वपूर्ण काम किया है।

​किताबों के जरिए प्राचीन ज्ञान का दस्तावेजीकरण

यह काम केवल एक सामान्य रिपोर्टिंग या पत्रकारिता असाइनमेंट नहीं है। इसके लिए डॉ. वैदेही तमन ने वर्षों तक घाटी की यात्राएं कीं और स्थानीय इतिहासकारों, विद्वानों तथा सांस्कृतिक हस्तियों के साथ संवाद स्थापित किया। उनकी सबसे चर्चित किताबों में 14वीं सदी की विख्यात संत-कवयित्री पर केंद्रित ‘लल द्यद – द मदर ऑफ कश्मीर’ शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने ‘अभिनवगुप्त – द वॉयस ऑफ इटरनल शिवा’ के जरिए कश्मीर शैव दर्शन, साहित्य और भारतीय सौंदर्यशास्त्र में आचार्य अभिनवगुप्त के बड़े योगदान को रेखांकित किया है। साथ ही, उन्होंने प्राचीन कश्मीरी समाज, अनुष्ठानों और जीवनशैली को समझने के लिए 'नीलमत पुराण' का भी गहराई से अध्ययन कर उसे अपने काम में शामिल किया है।

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​श्रीनगर में हुआ पुस्तक का विमोचन

डॉ. तमन के इस जमीनी शोध को तब एक बड़ी पहचान मिली, जब हाल ही में श्रीनगर में आयोजित 'लाल द्यद साहित्य पुरस्कार समारोह' के दौरान उनकी पुस्तक ‘लल द्यद – द मदर ऑफ कश्मीर’ का आधिकारिक लोकार्पण किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा मुख्य रूप से मौजूद रहे। उनके साथ साहित्य और अकादमिक जगत की कई अन्य हस्तियों ने भी इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन ऐतिहासिक क्रॉनिकल्स का प्रकाशन 'गुलशन बुक्स कश्मीर' द्वारा किया गया है।

​भविष्य के लिए इतिहास सहेजने का संकल्प

अपने इस बड़े वैचारिक अभियान को लेकर डॉ. तमन का स्पष्ट मानना है कि कश्मीर को महज वर्तमान की सुर्खियों के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। उनका कहना है, “कश्मीर का दिव्य इतिहास सिर्फ स्मृतियों में नहीं, बल्कि किताबों में संरक्षित किया जाना चाहिए। मेरा संघर्ष इस अनकही विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए दस्तावेजबद्ध करना है।”

​आज के डिजिटल युग में, जब खबरें पल भर में बदल जाती हैं, Dr Vaidehi Taman का यह शोधपरक काम कश्मीर की वास्तविक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को बचाए रखने का एक गंभीर प्रयास है। उनके लिए कश्मीर केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि सूफी चिंतन, ऋषि परंपरा और अध्यात्म की एक जीवंत किताब है।

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