बिजनौर के कृषि विज्ञान केंद्र नगीना में 28 सितंबर 2026 को इफको की ओर से जिला सहकारी सम्मेलन एवं नैनो प्रमोशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। Nano Fertilizer Bijnor कार्यक्रम का उद्देश्य रबी फसलों में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और नैनो डीएपी के जरिए बीज उपचार जैसी तकनीकों के प्रति कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रशिक्षित करना रहा।

कार्यक्रम में कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को नैनो उर्वरक, जैव उर्वरक, जल घुलनशील उर्वरक और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। इफको की आधिकारिक जानकारी के अनुसार Nano DAP नाइट्रोजन और फास्फोरस का स्रोत है तथा इसका उपयोग बीज उपचार और फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में किया जाता है।

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गेहूं की बुवाई से पहले नैनो डीएपी से बीज उपचार की जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान किसानों तक पहुंचाई जाने वाली तकनीक पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में बताया गया कि गेहूं की बुवाई से पहले 100 किलोग्राम बीज को एक बोतल नैनो डीएपी और 500 मिलीलीटर बायो फर्टिलाइजर से उपचारित करने की जानकारी किसानों को दी जाए।

इसके साथ ही दानेदार डीएपी की मात्रा कम करने के तरीके पर भी चर्चा हुई। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अधिकारियों को एक बोरी डीएपी को दो एकड़ में इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई। इन तकनीकों का इस्तेमाल स्थानीय कृषि विभाग की अनुशंसाओं और फसल की जरूरत के अनुसार किया जाना है।

कार्यक्रम में रासायनिक डीएपी और एनपीके की खपत को 25 प्रतिशत तक कम करने के विकल्पों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। इसके लिए नैनो उर्वरक, जैव उर्वरक, इफको की नेचुरल पोटाश और जल घुलनशील उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर वैज्ञानिक जानकारी साझा की गई।

कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने बताए तकनीकी पहलू

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा ने कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से NFSM के तहत किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सहायता और रबी सीजन में गेहूं सहित आगामी फसलों के लिए नैनो डीएपी से बीज उपचार पर जोर दिया।

कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. शिवांगी ने अधिकारियों और कर्मचारियों से किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा वैकल्पिक उर्वरक तकनीकों के बारे में जागरूक करने की अपील की।

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि केंद्र के फार्म पर पिछले चार वर्षों से नैनो उर्वरकों का उपयोग किया जा रहा है। उनके अनुसार इससे उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ फसल में बीमारियों के प्रकोप में भी कमी देखी गई।

इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक जितेंद्र कुमार गंगवार ने कहा कि संस्था किसानों की लागत कम करने और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादन के लिए लगातार शोध कर रही है। उन्होंने बताया कि नैनो डीएपी की मांग बढ़ रही है और इफको जल्द नैनो एनपीके उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि नैनो एनपीके का उद्देश्य खड़ी फसल में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित आपूर्ति करना होगा। कार्यक्रम में इफको के जल घुलनशील उर्वरकों और माइक्रोनाइज तकनीक पर भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान शिवम तिवारी, जितेंद्र कुमार और डॉ. घनश्याम वर्मा ने किसानों को सहकारी समितियों पर उपलब्ध विभिन्न वैकल्पिक उत्पादों के इस्तेमाल की जानकारी दी। इनमें जैविक उर्वरक, एनपीके तरल कंसोर्टिया, सागरिका, नैनो डीएपी और एनपीके 19-19-19 शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंत में कृषि स्नातक प्रशिक्षु निशांत पटेल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताया।

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