मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित सुमित्रा सत्संग भवन में मंगलवार को पितृ पक्ष के विशेष अवसर पर Meerut Bhagwat Katha का भव्य आयोजन किया गया। वेदांत सत्संग समिति के तत्वावधान में चल रहे 'श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सप्ताह' के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और भागवत कथा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
श्रीमद्भागवत है भगवान का वांगमय स्वरूप कथा व्यास पीठ से भक्तों को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वांगमय (शब्दमयी) स्वरूप है। इसके पावन पाठ और श्रवण से मनुष्य को भगवान के जन्म, उनके कर्म और दिव्य लीलाओं के वास्तविक तत्व का ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने कृष्ण लीला के मार्मिक रहस्यों को उद्घाटित करते हुए जीवन में इसके आध्यात्मिक महत्व को समझाया।

आसुरी भावनाओं का होता है नाश स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने एक सुंदर दृष्टांत देते हुए बताया कि जिस प्रकार भगवान इस जगत में अवतार लेकर असुरों का संहार करते हैं, ठीक उसी प्रकार कृष्ण कथा मनुष्य के हृदय में प्रवेश करती है। यह पवित्र कथा मन के भीतर पनपने वाले काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसी सभी आसुरी भावनाओं का जड़ से नाश कर देती है, जिससे प्राणी का अंतःकरण परम शुद्ध हो जाता है।
पितरों को मिलती है शांति पितृ पक्ष के महत्व को जोड़ते हुए महामंडलेश्वर ने स्पष्ट किया कि श्रीमद्भागवत कथा के सच्चे मन से श्रवण मात्र से सुनने वाले के पितरों (पूर्वजों) का कल्याण होता है। प्रभु की कृपा से जीवन के सभी दुख, दरिद्रता और कष्ट दूर हो जाते हैं।
इन्होंने किया व्यास पूजन कथा के पांचवें दिन का शुभारंभ पूरे विधि-विधान से किया गया। इस अवसर पर सुशील सक्सेना और ममता सक्सेना ने परम श्रद्धा के साथ व्यास पूजन संपन्न किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुशील दत्ता, शशि दत्ता, अरविंद नागर, कोमल सिंघल और पूजा सिंघल सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। इस सफल आयोजन की जानकारी वेदांत सत्संग समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांक सिंघल द्वारा दी गई।
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