उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पुलिस ने ब्लैकमेलिंग और रंगदारी वसूलने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस Bijnor Honeytrap Case में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है और अब तक 15 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बिजनौर के तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक (एसपी) के.के. बिश्नोई ने खुद इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) की विस्तृत जानकारी दी।

अमीरजादों को बनाते थे अपना शिकार एसपी के.के. बिश्नोई के मुताबिक, यह हनीट्रैप गैंग पूरी प्लानिंग के साथ बेकसूर और अमीर लोगों (अमीरजादों) को अपने जाल में फंसाता था। गिरोह के सदस्य पहले शिकार को अपने झांसे में लेते और फिर उन पर गैंगरेप, रेप (बलात्कार) या छेड़खानी जैसे गंभीर और झूठे मुकदमे दर्ज कराने की धमकी देते थे। समाज में बदनामी के डर का फायदा उठाकर यह गैंग बेकसूर लोगों पर भारी मानसिक दबाव बनाता था।

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लाखों रुपये ऐंठकर करते थे 'फैसला' पुलिस की जांच में सामने आया है कि झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने के बाद गिरोह के सदस्य 'समझौता' या 'फैसला' करने का दबाव बनाते थे। केस रफा-दफा करने के एवज में पीड़ितों से लाखों रुपये की मोटी रकम ऐंठी जाती थी। कई लोग अपनी इज्जत और सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए इस गैंग को पैसे दे चुके थे।

गिरोह में तथाकथित पत्रकार और महिला भी शामिल इस सनसनीखेज Bijnor Honeytrap Case की सबसे अहम कड़ी यह है कि इस गैंग में एक महिला और एक तथाकथित पत्रकार भी सक्रिय रूप से शामिल थे। महिला का इस्तेमाल शिकार को फांसने के लिए किया जाता था, जबकि फर्जी पत्रकार अपनी पहचान का रौब दिखाकर पीड़ितों को डराने-धमकाने और पुलिस केस से बचाने का लालच देकर वसूली का काम करता था।

बिजनौर पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए इस गैंग के 15 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। एसपी ने स्पष्ट किया है कि ऐसे संगठित अपराध करने वाले गिरोहों के खिलाफ पुलिस का अभियान सख्ती से जारी रहेगा।

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