मेरठ। सेंट्रल मार्केट समेत शहर के अलग-अलग इलाकों में व्यापारियों से जुड़े सीलिंग और ध्वस्तीकरण के मुद्दों को लेकर संयुक्त व्यापार संघ ने एक बार फिर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। अपार चैंबर में हुई बैठक में प्रमुख बाजारों के व्यापार संघों के पदाधिकारियों और अन्य लोगों ने आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की। तय कार्यक्रम के मुताबिक आंदोलन की शुरुआत मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के अधिकारियों के घेराव से होगी। इसके बाद जुलूस, विशाल मानव शृंखला और दुकानों-मकानों पर काले झंडे लगाने जैसे कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं।

व्यापारी संगठन का कहना है कि यह आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध चलाया जाएगा। संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने बैठक में व्यापारियों, कर्मचारियों और आम लोगों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए एकजुटता की जरूरत बताई।

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मेडा घेराव से शुरू होगा आंदोलन

बैठक में तय रणनीति के अनुसार आंदोलन के पहले चरण में मेडा अधिकारियों का घेराव किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही गई है। व्यापारियों से दुकानों और घरों पर काले झंडे लगाने की अपील भी की गई है।

इसके साथ ही जुलूस निकालने और बड़ी मानव शृंखला बनाने का सुझाव दिया गया। बैठक में शामिल अलग-अलग बाजारों के व्यापारियों ने आंदोलन को लेकर अपने-अपने सुझाव रखे।

व्यापारी संगठन की ओर से यह आंदोलन मुख्य रूप से सेंट्रल मार्केट समेत उन मामलों को लेकर है, जिनमें सीलिंग, अवैध निर्माण और ध्वस्तीकरण से संबंधित कार्रवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों के बाद मेरठ में इन मामलों को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।

कानूनी लड़ाई के लिए पैनल बनाने की तैयारी

व्यापारियों ने सड़क पर आंदोलन के साथ कानूनी स्तर पर भी अपनी बात रखने की तैयारी की है। बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ताओं का एक कानूनी पैनल तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया। व्यापारियों का कहना है कि इस पैनल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष मजबूती से रखने का प्रयास किया जाएगा।

छावनी रामलीला कमेटी के महामंत्री गणेश अग्रवाल ने सामूहिक रूप से लड़ाई लड़ने की बात कही। जागृति विहार के केपी सिंह ने आवंटन के समय सेटबैक के प्रावधान से जुड़े तथ्यों को सामने रखने का सुझाव दिया।

कंकरखेड़ा के मुकेश शर्मा ने तीन दिन या उससे अधिक समय तक बाजार बंद रखने का सुझाव दिया। वहीं माधवपुरम के तरुण गोयल ने मौजूदा परिस्थितियों में आंदोलन को जरूरी बताया। कंकरखेड़ा के राजदीप गुप्ता ने कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विरोध दर्ज कराने पर जोर दिया।

बाजार बंदी को अंतिम चरण में रखने का सुझाव

बैठक में बाजार बंदी को लेकर भी चर्चा हुई। प्रभात नगर के तुषार, शास्त्रीनगर के मनोज अग्रवाल, सदर सराफा के अनिल जैन और आबू लेन अध्यक्ष आकाश खन्ना ने पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष ओपी खन्ना के विचारों का हवाला देते हुए बाजार बंदी को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने का सुझाव दिया।

हापुड़ रोड के व्यापारी अकरम गाजी ने भी आंदोलन की आगे की रणनीति पर अपने विचार रखे।

इससे स्पष्ट है कि व्यापारियों के बीच आंदोलन के तरीके और उसकी तीव्रता को लेकर अलग-अलग सुझाव हैं, लेकिन बैठक में चरणबद्ध तरीके से विरोध आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखने का दावा

मेरठ व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखकर सेंट्रल मार्केट को बचाने की गुहार लगाने की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि शहर के अन्य हिस्सों में भी सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का खतरा है।

वहीं, व्यापारियों के बीच आंदोलन के लिए जमा किए गए करीब दो करोड़ रुपये के चंदे को लेकर भी मतभेद सामने आने की बात कही जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ व्यापारी रकम वापस मांग रहे हैं, जबकि कुछ लोगों की ओर से आंदोलन को लेकर कड़े कदम उठाने की चेतावनी भी दी गई है।

इन दावों की स्वतंत्र वित्तीय पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है, इसलिए चंदे की राशि और उससे जुड़े विवाद को संबंधित व्यापारियों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों पर कार्रवाई का मामला

Meerut Central Market विवाद की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद सील की गई संपत्तियों पर कार्रवाई का मामला भी महत्वपूर्ण है। इससे पहले सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में 44 संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई हुई थी। सितंबर में इनमें से छह भवनों के अवैध हिस्सों को हटाने के लिए ध्वस्तीकरण कार्रवाई भी की गई थी।

व्यापारियों की बैठक में 18 भवनों को ध्वस्त किए जाने की संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि, उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि इन 18 भवनों के संबंध में अंतिम ध्वस्तीकरण आदेश अलग से जारी हो चुका है। इसलिए इसे फिलहाल चर्चा और संभावित कार्रवाई के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

16,726 भवनों का मामला भी आंदोलन के केंद्र में

सेंट्रल मार्केट विवाद का असर अब शहर के दूसरे क्षेत्रों में चिन्हित भवनों तक भी पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट की 21 सितंबर 2026 की कार्यवाही के बाद मेरठ के जोन-ए में चिन्हित 16,726 भवनों को लेकर कार्रवाई का मुद्दा सामने आया। न्यायालय के आदेश के बाद इन भवनों की स्थिति को लेकर प्रशासन और मेडा के स्तर पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

हाल की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि इन भवनों की सूची में पुराने निर्माण शामिल होने को लेकर सवाल उठे हैं। मेडा स्तर पर पुराने निर्माणों की स्थिति को लेकर दोबारा सर्वे की तैयारी की खबरें हैं।

व्यापारियों की ओर से इसी तरह के मामलों में पुराने निर्माण, आवंटन के समय लागू नियमों और सेटबैक से जुड़े रिकॉर्ड को भी सामने रखने की मांग की जा रही है।

उल्देपुर में कार्रवाई और न्यायिक आयोग

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में मेरठ के उल्देपुर क्षेत्र का मामला भी सामने आया है। न्यायालय ने वहां अवैध कॉलोनियों और निर्माण से जुड़े मामलों की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने का निर्देश दिया है। पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में आयोग गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

उल्देपुर में कार्रवाई को लेकर भी मेडा की ओर से तैयारी की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में पहले चरण में 15 अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी का उल्लेख है।

सोमवार को आंदोलन कर रहे किसानों की ओर से मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना से न्यायिक आयोग से मुलाकात कराने की मांग किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

वैधानिक समाधान की मांग

व्यापारियों की ओर से केवल आंदोलन ही नहीं, बल्कि समस्या के वैधानिक समाधान की मांग भी की जा रही है। शहर सराफा बाजार व्यापार एसोसिएशन के महामंत्री नरेश माहेश्वरी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अवैध निर्माणों से जुड़े मामलों में वैधानिक समाधान निकालने का सुझाव दिया है।

उन्होंने संपत्तियों को कानूनी आधार पर बचाने के लिए आवश्यक संशोधनों और कंपाउंडिंग जैसे प्रावधानों पर विचार करने की मांग की है।

फिलहाल व्यापारियों की बैठक के बाद आंदोलन की रणनीति सामने आ गई है। पहला चरण मेडा अधिकारियों के घेराव से शुरू करने की बात कही गई है। आगे जुलूस, मानव शृंखला और काले झंडे लगाने जैसे कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े मामलों में कानूनी पक्ष भी व्यापारियों के आंदोलन का अहम हिस्सा रहेगा।

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