बिजनौर की वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवयित्री डॉ. सारंगादेश असीम ‘सारंगा’ ने भूटान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन में जिले का नाम रोशन किया। भूटान की राजधानी थिम्फू में आयोजित छह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन में उन्हें ‘भूटान भारत अंतरराष्ट्रीय साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से अलंकृत किया गया।

इसी आयोजन के तहत आयोजित अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन की अध्यक्षता भी डॉ. सारंगा ने की। कार्यक्रम में देश-विदेश के करीब 80 साहित्यकारों ने हिस्सा लिया।

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डॉ. सारंगा ने की कवि सम्मेलन की अध्यक्षता

आयोजित कवि सम्मेलन में डॉ. सारंगादेश असीम ‘सारंगा’ ने अध्यक्षता की। उन्होंने मां शारदे के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर ‘शारदे वंदन’ के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

आयोजक के अनुसार, डॉ. सारंगा की गीत प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं को भावविभोर किया। अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कवियों की प्रस्तुतियों की समीक्षा भी की।

कार्यक्रम में संयोजक डॉ. हरेंद्र हर्ष, सहसंयोजिका ललिता कश्यप, भूटान ब्रॉडकास्टिंग के वरिष्ठ पदाधिकारी हरिमन राय, अच्युत धीमर और वरिष्ठ कवि डॉ. वीरेंद्र सिंह ‘वीर’ सहित अन्य साहित्यकार मंच पर मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन राजपाल यादव ‘राज़’ ने किया।

करीब 80 साहित्यकारों ने लिया हिस्सा

अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन में भारत सहित देश-विदेश के करीब 80 साहित्यकारों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान दोनों देशों के साहित्यकारों को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विचारों को साझा करने का अवसर मिला।

सम्मेलन में साहित्य के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी जोर रहा। प्रतिभागी साहित्यकारों ने भूटान के विभिन्न प्रसिद्ध क्षेत्रों का भ्रमण किया और वहां की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को जानने का अवसर प्राप्त किया।

आयोजन को साहित्यकारों के बीच आपसी संवाद और सांस्कृतिक मैत्री के अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया।

साहित्यकारों को स्मृति चिह्न और सम्मान पत्र दिए

कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. सारंगादेश असीम ‘सारंगा’, मुख्य अतिथि रविंद्र सिंह ‘रवि’, अति विशिष्ट अतिथि हरिमन राय और अच्युत धीमर ने प्रतिभागी साहित्यकारों को स्मृति चिह्न और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया।

इस दौरान डॉ. सारंगा को ‘भूटान भारत अंतरराष्ट्रीय साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से अलंकृत किया गया।

आयोजकों के अनुसार, भूटान में हुए इस साहित्यिक आयोजन के माध्यम से दोनों देशों के साहित्यकारों को एक-दूसरे की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपराओं को समझने तथा विचार साझा करने का अवसर मिला।

नोट: यह खबर उपलब्ध आयोजन/प्रेस सामग्री के आधार पर तैयार की गई है। सम्मान, प्रतिभागियों और कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी उसी सामग्री के अनुसार प्रस्तुत की गई है।

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