18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार बड़ा नियामकीय बदलाव करने की तैयारी में है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार, 28 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 में ऐसा प्रावधान लाने पर कदम उठाएगी, जिससे 18 साल से कम उम्र के बच्चे स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया अकाउंट न खोल सकें।
यह मामला अभी प्रस्ताव और नियमों में बदलाव की प्रक्रिया में है। इसका मतलब यह नहीं है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सभी सोशल मीडिया अकाउंट तत्काल बंद कर दिए गए हैं। केंद्र को नियमों में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।
सुप्रीम कोर्ट में मामला कैसे पहुंचा?
यह मामला Just Rights for Children Alliance की ओर से दाखिल जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में बच्चों के सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट बनाने को लेकर सुरक्षा उपायों की मांग की गई है।
याचिका में तर्क दिया गया कि 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को भारतीय कानून के तहत नाबालिग माना जाता है और वह स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने में सक्षम नहीं होता। इसके बावजूद कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चे उम्र बताकर अकाउंट बना सकते हैं।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने केंद्र से इस स्थिति को भारतीय कानून के अनुरूप बनाने के लिए statutory framework पर विचार करने को कहा।
18 साल की उम्र क्यों महत्वपूर्ण है?
इस मामले की कानूनी पृष्ठभूमि contractual capacity से जुड़ी है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सोशल मीडिया अकाउंट बनाते समय यूजर प्लेटफॉर्म की Terms of Service और दूसरे contractual terms स्वीकार करता है।
याचिका में Indian Contract Act, 1872 की Section 11 और Majority Act, 1875 का हवाला देते हुए कहा गया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे स्वतंत्र रूप से ऐसे contractual relationships में प्रवेश नहीं कर सकते।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में भी इसी सवाल पर चर्चा हुई कि जब भारतीय कानून नाबालिगों की contractual capacity को सीमित करता है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों को स्वतंत्र अकाउंट बनाने की अनुमति कैसे दे सकते हैं।
बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर क्या बदलेगा?
अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होता है, तो 18 साल से कम उम्र के बच्चे अपने नाम से स्वतंत्र सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकेंगे, जैसा कि केंद्र के मौजूदा प्रस्ताव की रिपोर्टिंग में बताया गया है। प्लेटफॉर्म को उम्र की जांच के लिए तकनीकी व्यवस्था करनी पड़ सकती है और अपने सिस्टम को नए नियमों के अनुरूप बनाना होगा।
यानी सिर्फ अकाउंट बनाते समय उम्र 18 साल या उससे ज्यादा लिख देना पर्याप्त नहीं होगा, यदि नए नियमों में प्रभावी age-assurance या verification व्यवस्था अनिवार्य की जाती है। हालांकि, इसके लिए इस्तेमाल होने वाली अंतिम तकनीकी और verification व्यवस्था संशोधित नियमों में स्पष्ट होगी।
क्या पढ़ाई के लिए सोशल मीडिया या वेबसाइट इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे?
यहां educational services के लिए अलग व्यवस्था की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि educational websites की membership माता-पिता की सहमति के जरिए ली जा सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि parental consent आधारित व्यवस्था को नियमों में शामिल किया जा सकता है।
इसका मतलब यह हो सकता है कि बच्चों की शिक्षा से जुड़ी डिजिटल सेवाओं के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की भागीदारी वाला मॉडल बनाया जाए। हालांकि, कौन-कौन से प्लेटफॉर्म इस अपवाद में आएंगे और verification किस तरीके से होगी, यह अंतिम नियम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकार को नियमों में बदलाव क्यों करना पड़ सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस मुद्दे को केवल सामान्य guideline तक सीमित न रखने और इसे statutory framework के रूप में देखने को कहा है। अदालत ने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को भारत के कानून के अनुरूप अपना software और platform तैयार करना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर कदम उठाएगी। केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि Digital Personal Data Protection Act, 2023 के तहत इस विषय के कुछ पहलुओं को देखा जा सकता है। याचिकाकर्ता की ओर से हालांकि कहा गया कि संबंधित data-protection व्यवस्था का प्रभाव बाद में होगा और मौजूदा कानूनों के आधार पर भी सुरक्षा दी जा सकती है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा
याचिका में सोशल मीडिया के इस्तेमाल से जुड़े कई जोखिमों का उल्लेख किया गया है। इनमें online grooming, cyberbullying, sexual exploitation, trafficking, personal data misuse, behavioural profiling और age-inappropriate content जैसे खतरे शामिल हैं। ये जोखिम याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के सामने रखे गए तर्कों का हिस्सा हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर की शुरुआत में भी इस मामले पर सुनवाई करते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए safeguards की जरूरत पर जोर दिया था।
अभी बच्चों और माता-पिता को क्या समझना चाहिए?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर तत्काल देशव्यापी प्रतिबंध लागू होने की घोषणा नहीं हुई है। केंद्र ने नियमों में बदलाव के जरिए इसे कानूनी रूप देने की बात कही है।
आगे संशोधित IT Rules में यह स्पष्ट हो सकता है कि उम्र की जांच कैसे होगी, पुराने अकाउंट का क्या होगा, parental consent किन सेवाओं पर लागू होगी और प्लेटफॉर्म को कौन-सी तकनीकी व्यवस्था करनी होगी।
यानी अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, केंद्र के प्रस्ताव और आगामी नियमों के बीच आगे बढ़ रहा है। अंतिम नियम सामने आने के बाद ही बच्चों, माता-पिता और सोशल मीडिया कंपनियों पर लागू होने वाली पूरी व्यवस्था स्पष्ट होगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.