चर्चित Saurabh Rajput Murder Case में आज यानी 30 सितंबर को जिला अदालत फैसला सुना सकती है। ब्रह्मपुरी क्षेत्र के इस मामले में करीब 13 महीने तक सुनवाई चली। इस दौरान अदालत में 126 पेशियां हुईं और 22 गवाहों की गवाही दर्ज की गई। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में अंतिम बहस पूरी होने के बाद फैसले की तारीख तय की गई थी। 

मामले में सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला आरोपी हैं। अभियोजन पक्ष ने दोनों के खिलाफ परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत के सामने रखे हैं। वहीं बचाव पक्ष ने हत्या में शामिल होने से इनकार किया है और मामले में प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने का तर्क रखा है। 

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3 मार्च की रात क्या हुआ था?

मामला 3 मार्च 2025 की रात की घटना से जुड़ा है। अभियोजन के मुताबिक, सौरभ की हत्या के बाद उसके शव को घर में रखे नीले ड्रम में छिपाया गया था। पुलिस जांच में ड्रम, सीमेंट, बालू, चाकू और उस्तरे की खरीद से जुड़े साक्ष्य सामने आए, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने अदालत में रखा। 

सौरभ की हत्या के आरोपी साहिल और मुस्कान
सौरभ की हत्या के आरोपी साहिल और मुस्कान

सौरभ 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ आया था। इसके कुछ दिन बाद 3 मार्च की रात उसकी हत्या किए जाने का आरोप है। मामले की जांच में पुलिस ने हत्या से पहले और बाद की गतिविधियों को जोड़ने वाले कई साक्ष्य जुटाए।

जांच के मुताबिक, शव को छिपाने के लिए नीले ड्रम में सीमेंट का इस्तेमाल किया गया। बाद में ड्रम को घर से बाहर ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन उसका वजन अधिक होने के कारण यह संभव नहीं हुआ। इसके बाद मुस्कान और साहिल के मेरठ से बाहर जाने की बात सामने आई। 

17 मार्च को सामने आया मामला

17 मार्च 2025 को सौरभ के घर से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसके बाद सौरभ के भाई बबलू राजपूत की शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ और मुस्कान तथा साहिल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 

मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने घटनास्थल से फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए। नीले ड्रम को काटकर खोला गया और उसके भीतर सीमेंट में दबे शव के अवशेष मिले। इस कार्रवाई से जुड़े व्यक्ति और पुलिसकर्मियों की भी अदालत में गवाही हुई। 

22 गवाहों ने अदालत में क्या बताया?

इस मुकदमे में परिवार के सदस्यों के अलावा दुकानदार, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, फोरेंसिक टीम, कैब ड्राइवर और होटल से जुड़े लोगों की गवाही हुई।

सौरभ के भाई बबलू राजपूत ने अदालत में गवाही दी। उनकी ओर से मामले की शिकायत और सौरभ से संपर्क टूटने के बाद की घटनाओं के बारे में जानकारी दी गई। सौरभ की मां रेणू राजपूत ने भी परिवार और मुस्कान-साहिल के संबंधों से जुड़े अपने आरोप अदालत के सामने रखे। 

सौरभ के एक दोस्त ने अदालत में बताया कि उसने 3 मार्च की रात साहिल को सौरभ के घर की ओर जाते हुए देखा था। यह गवाही अभियोजन पक्ष के घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों में शामिल रही। 

बिल्डिंग मटेरियल कारोबारी आशू ने सीमेंट और बालू खरीदने को लेकर गवाही दी। उनके मुताबिक एक युवक और युवती उनकी दुकान पर आए थे और निर्माण सामग्री खरीदी थी। अभियोजन पक्ष ने इस खरीद को शव छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए सामान से जोड़कर पेश किया। 

ड्रम काटने वाले की गवाही भी अहम

नीले ड्रम को काटकर खोलने वाले अशोक ने भी अदालत में बयान दिया। उसके मुताबिक ड्रम का ढक्कन जाम था, इसलिए उसे लंबाई में काटकर खोला गया। उसके अंदर सीमेंट जमा था और शव के अवशेष के साथ चाकू व उस्तरा भी बरामद होने की बात गवाही में सामने आई। 

पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और पंचनामा तैयार करने वाले पुलिस अधिकारी ने भी अदालत में बयान दर्ज कराए। अभियोजन पक्ष ने इन बयानों और फोरेंसिक साक्ष्यों को मामले की कड़ी के तौर पर प्रस्तुत किया। 

हत्या के बाद की यात्रा से जुड़े गवाह भी पेश हुए

मामले में कैब ड्राइवर की भी गवाही हुई। उसने मुस्कान और साहिल को यात्रा कराने की जानकारी अदालत में दी। इसके अलावा शिमला के एक होटल के मैनेजर ने दोनों के वहां ठहरने से संबंधित जानकारी दी। अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों को हत्या के बाद की गतिविधियों से जोड़कर अदालत के सामने रखा। 

जियो कंपनी के नोडल अधिकारी ने दोनों से जुड़ी कॉल डिटेल और लोकेशन संबंधी जानकारी भी अदालत में पेश की। इसके अलावा पुलिस और फोरेंसिक अधिकारियों की गवाही से जांच की प्रक्रिया और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर रखा गया। 

अभियोजन ने मांगी अधिकतम सजा, बचाव पक्ष ने किया इनकार

मामले की अंतिम बहस 17 सितंबर 2026 को पूरी हो गई थी। अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की है। वहीं बचाव पक्ष ने हत्या में शामिल होने से इनकार किया और अदालत के सामने अपने तर्क रखे। 

अदालत आज पहले यह तय करेगी कि आरोपियों को दोषी ठहराया जाता है या नहीं। अगर दोष सिद्ध होता है, तो सजा के बिंदु पर अलग से सुनवाई हो सकती है। इसलिए फैसला आने से पहले सजा को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। 

126 पेशियां और 22 गवाहों के बाद अब फैसला

करीब 13 महीने चली सुनवाई में 126 पेशियां और 22 गवाहों की गवाही का उल्लेख सामने आया है। अब अदालत के सामने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। 30 सितंबर की कार्यवाही में मामले का अगला और सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक चरण फैसला होगा। 

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