भारतीय स्मार्टफोन बाजार में बजट फोन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए कीमतों का दबाव बढ़ रहा है। RAM और स्टोरेज यानी NAND Flash की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण स्मार्टफोन बनाने की लागत बढ़ी है।
Counterpoint Research के मुताबिक 2026 में भारत में स्मार्टफोन की औसत retail price करीब 21% बढ़ी है, जबकि लो-एंड स्मार्टफोन के component cost में एक साल में करीब 70% की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसका सबसे ज्यादा असर उन फोन्स पर पड़ा है, जिनकी कीमत कम रखकर कंपनियां बड़े mass-market segment को target करती हैं। खास तौर पर ₹15,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन memory cost बढ़ने से ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
Counterpoint के अनुसार Q2 2026 में इस segment के समान configuration वाले मॉडल की component cost में करीब 70% YoY वृद्धि हुई और इसका लगभग पूरा असर memory components से आया।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›RAM और स्टोरेज क्यों हो गए महंगे?
स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली DRAM और NAND Flash memory की मांग सिर्फ मोबाइल कंपनियों से नहीं आती। AI infrastructure और data centers के विस्तार ने memory supply chain पर अतिरिक्त दबाव बनाया है।
Counterpoint के अनुसार Q2 2026 में smartphone memory prices में तिमाही आधार पर 80% से ज्यादा वृद्धि हुई। DRAM अब smartphone Bill of Materials में सबसे महंगे individual components में से एक बन गया है।
AI data centers में इस्तेमाल होने वाली high-bandwidth memory की मांग बढ़ने से memory manufacturers के उत्पादन संसाधनों पर भी दबाव पड़ा है। TechCrunch की रिपोर्ट के मुताबिक Samsung, SK Hynix और Micron जैसी कंपनियां AI accelerators के लिए high-bandwidth memory की मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता का एक हिस्सा उस दिशा में ले जा रही हैं। इसका असर consumer electronics के लिए उपलब्ध memory पर पड़ा है।
10 हजार रुपये वाले फोन पर क्या असर?
इसका मतलब यह नहीं है कि हर ₹10,000 वाला फोन सीधे ₹20,000 या ₹25,000 का हो गया है। बाजार में अलग-अलग कंपनियों और मॉडलों पर कीमतों का असर अलग है।
Counterpoint के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 2026 के दौरान smartphone retail prices में औसतन 21% की वृद्धि हुई है। वहीं कुछ मॉडलों में कीमतों में इससे कहीं ज्यादा बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। कंपनियां बढ़ती लागत को संभालने के लिए कीमत बढ़ाने के साथ-साथ specifications और product portfolio में भी बदलाव कर रही हैं।
यानी पहले जिस कीमत में ज्यादा RAM और storage वाला मॉडल उपलब्ध था, उसी budget में अब कम storage वाला variant या पुराना मॉडल मिल सकता है।
कंपनियां कीमत रोकने के लिए क्या कर रही हैं?
बढ़ती component cost के बीच कंपनियां सिर्फ कीमत बढ़ाने पर निर्भर नहीं हैं। Counterpoint के अनुसार कुछ manufacturers कम storage capacity, सरल camera configuration और कुछ बाजारों में ज्यादा 4G models के जरिए लागत नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत में इसका असर smartphone demand पर भी दिखाई दिया है। Counterpoint के अनुसार April-June 2026 में देश में smartphone shipments में सालाना आधार पर 10% की गिरावट हुई। कंपनी ने बढ़ती device prices को कमजोर consumer demand की प्रमुख वजहों में शामिल किया है।
क्या बजट फोन बाजार खत्म हो जाएगा?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। बजट segment में demand बनी हुई है, लेकिन बढ़ती memory cost के कारण कंपनियों के लिए इस segment में कम कीमत बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।
Counterpoint ने यह भी बताया है कि 2026 में smartphone manufacturers ने कई बार कीमतों में बदलाव किया है और mass-market segment पर दबाव ज्यादा है। दूसरी तरफ कंपनियां financing, exchange offers और अलग-अलग configurations के जरिए ग्राहकों को बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।
इसका सीधा असर आने वाले महीनों में ग्राहकों के विकल्पों पर पड़ सकता है। ₹10,000–₹15,000 के बजट में फोन खरीदने वालों को कीमत के साथ RAM, storage और 5G support के बीच ज्यादा समझौता करना पड़ सकता है।
अभी ग्राहक क्या देखें?
फोन खरीदते समय सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि RAM, internal storage, chipset, 5G bands, software updates और वास्तविक street price भी देखना जरूरी होगा। खासकर ऐसे समय में जब component costs तेजी से बदल रहे हैं, launch price और sale price के बीच भी अंतर हो सकता है।
फिलहाल बाजार का संकेत यही है कि memory cost inflation ने budget smartphone segment पर सबसे ज्यादा दबाव डाला है। अगर memory prices लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो कंपनियों को या तो कीमतें बढ़ानी होंगी या कम कीमत बनाए रखने के लिए specifications में बदलाव करना होगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.