Nishant Kumar Gaur, Special Correspondent-बारिश का मौसम वैसे तो लोगों के चेहरों पर मुस्कान और तपती गर्मी से राहत लेकर आता है, लेकिन उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर (Bijnor) जिले की धामपुर (Dhampur) तहसील के अंतर्गत आने वाली 'फ्रेंड्स कॉलोनी' (Friends Colony) के निवासियों के लिए यह मौसम किसी भयानक दुःस्वप्न (Nightmare) से कम नहीं है।READ ALSO:-बिजनौर में रफ्तार का कहर: NH-74 पर दो बाइकों की आमने-सामने भीषण टक्कर, 1 की मौके पर ही दर्दनाक मौत, मची चीख-पुकार!
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तथाकथित विकास और स्मार्ट व्यवस्थाओं के दावों के बीच, जमीनी हकीकत बेहद डरावनी और शर्मनाक है। यहां चंद घंटों की बारिश के बाद ही पूरी कॉलोनी एक गंदे और बदबूदार तालाब में तब्दील हो जाती है। यह पानी कोई एक-दो घंटे में नहीं निकलता, बल्कि कई-कई दिनों तक सड़कों और लोगों के घरों के आंगनों में भरा रहता है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अब स्थानीय नागरिकों के सब्र का बांध टूट गया है। ग्राम प्रधान से लेकर जिले के आला अधिकारियों और स्थानीय सांसद तक गुहार लगाने के बाद भी जब नतीजा 'सिफर' (शून्य) निकला, तो अब स्थानीय लोगों ने बड़े आंदोलन का बिगुल फूंकने की तैयारी कर ली है। आइए, इस पूरी समस्या के ग्राउंड जीरो की हकीकत को विस्तार से समझते हैं।
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ग्राउंड जीरो की खौफनाक हकीकत: नर्क से बदतर हुई जिंदगी

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वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय लोगों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि फ्रेंड्स कॉलोनी की सड़कें पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी हैं। गाड़ियां, दोपहिया वाहन और बाइक सवार घुटनों तक भरे पानी से रेंगते हुए निकलने को मजबूर हैं।
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सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति महिलाओं और बच्चों की है। जरूरी सामान लाने के लिए महिलाओं को इसी गंदे, कीचड़ युक्त पानी से होकर गुजरना पड़ता है। जलभराव केवल सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि नालियों का ओवरफ्लो होकर बहने वाला सीवर का गंदा पानी सीधे लोगों के घरों में घुस रहा है, जिससे घरों का कीमती सामान बर्बाद हो रहा है और लोगों का अपने ही घर में रहना मुहाल हो गया है।
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फ्रेंड्स कॉलोनी वासियों की 3 सबसे बड़ी और जानलेवा मुसीबतें

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कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि वे हर दिन एक नई जद्दोजहद से गुजर रहे हैं। उनकी मुख्य समस्याएं केवल पानी भरने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह उनके जीवन और स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी हैं:
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1. आवाजाही ठप और नौनिहालों की जान जोखिम में (आना-जाना मुश्किल)

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नौनिहालों का भविष्य इस गंदे पानी में डूब रहा है। स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे जब अपनी पीठ पर बस्ता लादकर निकलते हैं, तो उन्हें इसी दूषित जल से होकर गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव के कारण सड़क और नाले का फर्क मिट जाता है, जिससे कई बार स्कूल जाते हुए बच्चे खुले नालों में गिरते-गिरते बचे हैं। यह स्थिति किसी भी दिन किसी बड़े और जानलेवा हादसे को दावत दे सकती है। कई अभिभावकों ने तो डर के मारे बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है।
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2. बीमारियों का गढ़ और जहरीले जीवों का खौफ (जान का खतरा)

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रुका हुआ गंदा पानी बीमारियों का सबसे बड़ा घर होता है। कई दिनों तक जलभराव रहने के कारण पूरी कॉलोनी में मच्छर, मक्खी और खतरनाक बैक्टीरिया पनप रहे हैं। डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी जानलेवा महामारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे खौफनाक बात यह है कि ओवरफ्लो हो रहे नालों से अब विषैले सांप (Poisonous Snakes) और अन्य जहरीले कीड़े-मकोड़े निकलकर सीधे लोगों के घरों में घुस रहे हैं। रात के अंधेरे में लोगों को खौफ के साये में जीना पड़ रहा है।
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3. भूमाफियाओं का आतंक और बंद निकासी (घरों में घुस रहा पानी)

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इस पूरे जलभराव की जड़ प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानव निर्मित (Man-made) है। कॉलोनी वासियों का सीधा आरोप है कि इलाके के रसूखदार भूमाफियाओं ने जल निकासी वाले मुख्य नालों पर अवैध कब्जा कर लिया है। पानी निकलने के लिए बनाए गए प्राकृतिक रास्तों को बंद करके वहां महज़ 8-8 इंच के पतले पाइप दबा दिए गए हैं। इतनी बड़ी कॉलोनी के पानी की निकासी इन पतले पाइपों से होना बिल्कुल असंभव है। निकासी पूरी तरह से चोक (Block) होने के कारण बारिश का सारा पानी पलटकर सीधा लोगों के बेडरूम और किचन तक पहुंच रहा है।
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सिस्टम की संवेदनहीनता: सांसद से लेकर SDM तक सब मौन!

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इस देश में आम आदमी की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जब वह अपनी समस्या लेकर सिस्टम के पास जाता है, तो उसे सिर्फ तारीखें और खोखले आश्वासन मिलते हैं। फ्रेंड्स कॉलोनी के निवासियों ने व्यवस्था के हर दरवाजे को खटखटाया, लेकिन उन्हें हर जगह से सिर्फ निराशा हाथ लगी।
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    सांसद चंद्रशेखर आजाद से गुहार: कॉलोनी वासियों ने श्री अमित यादव के नेतृत्व में पिछले साल नगीना लोकसभा से मौजूदा सांसद श्री चंद्रशेखर आजाद जी को लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा था। हैरान करने वाली बात यह है कि चंद्रशेखर आजाद का निवास करीब 2 साल तक इसी कॉलोनी में (अमित यादव जी के घर के ठीक बराबर में, नाले वाले रास्ते के पास) ही रहा है। वे इस जलभराव और समस्या की जमीनी हकीकत से भली-भांति वाकिफ हैं। आश्वासन तो मिला, लेकिन काम धेले भर का नहीं हुआ।
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    अधिकारियों की अनदेखी: ग्राम पंचायत जित्तनपुर के प्रधान से लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD), धामपुर के उपजिलाधिकारी (SDM), और तहसीलदार... शायद ही कोई ऐसा दफ्तर बचा हो जहां शिकायत न की गई हो। लेकिन नौकरशाही की लालफीताशाही के चलते सारे प्रार्थना पत्र फाइलों में दबकर रह गए और नतीजा पूरी तरह "सिफर" निकला।
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अब आर-पार के मूड में कॉलोनी वासी: दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

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जब शांति से की गई शिकायतों का कोई असर नहीं होता, तो जनता को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ता है। जलभराव और प्रशासनिक रवैये से आक्रोशित फ्रेंड्स कॉलोनी के समस्त निवासियों ने अब प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम (Ultimatum) दे दिया है।
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कॉलोनी वासियों की स्पष्ट मांगें:

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    अवैध कब्जा हटे: यथाशीघ्र जल निकासी वाले नालों को भू-माफियाओं के अवैध कब्जे से पूरी तरह मुक्त कराया जाए।
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    पक्के नाले का निर्माण: 8 इंच के पाइपों को हटाकर, कॉलोनी के पानी की उचित निकासी के लिए मानक के अनुसार एक 'पक्का नाला' (Concrete Drain) बनवाया जाए।
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    चेतावनी: यदि प्रशासन ने जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो कॉलोनी की महिलाएं, बुजुर्ग और युवा मिलकर एक बड़ा और उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला और तहसील प्रशासन की होगी।
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इन लोगों ने बुलंद की आवाज (प्रार्थना कर्ता)

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इस जन-आंदोलन और शिकायत मुहिम में कॉलोनी के कई जिम्मेदार नागरिक आगे आए हैं, जिन्होंने शासन-प्रशासन की नींद तोड़ने का बीड़ा उठाया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: अमित यादव, शवि यादव, आशुतोष चौहान, सहदेव सिंह, मुन्ने सिंह गुर्जर, अंकित गुर्जर, विरेन्द्र चौहान, राहुल डोगरा, विकल गुप्ता जी (पेट्रोल पंप वाले), निशांत गौड़ सहित समस्त फ्रेंड्स कॉलोनी वासी।
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सरकार और प्रशासन से अपील (Call to Action): फ्रेंड्स कॉलोनी के निवासियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ (@myogiadityanath), यूपी सरकार (@UPGovt), बिजनौर के जिलाधिकारी (@BijnorDM) और सांसद चंद्रशेखर आजाद (@ChandrashekharAzad) को टैग करते हुए मामले का तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। अब देखना यह है कि क्या बिजनौर का 'सुस्त' प्रशासन नींद से जागेगा, या फिर लोगों को न्याय पाने के लिए चिलचिलाती धूप और गंदे पानी के बीच सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना ही पड़ेगा?