उत्तराखंड की ऐतिहासिक और पौराणिक 'कण्व नगरी' कोटद्वार (Kotdwar) ने सोमवार को खेलों की दुनिया में एक नया अध्याय जोड़ दिया। यहाँ आयोजित 8वीं उत्तराखंड राज्य जूनियर अंडर-17 बॉक्सिंग चैंपियनशिप (8th Uttarakhand State Junior U-17 Boxing Championship) का फाइनल मुकाबला जिस हर्षोल्लास और जोश के साथ संपन्न हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि पहाड़ की शांत वादियों में अब 'मेडल जीतने की आग' धधक रही है।READ ALSO:-Bijnor: कलेक्ट्रेट में डीएम जसजीत कौर का 'मिशन प्रहार'; अफसरों को दो टूक- 'कुपोषण सिर्फ बीमारी नहीं, कलंक है... इसे जड़ से मिटाना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी'
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फाइनल के दिन का माहौल ऐसा था मानो कोटद्वार की हवाएं और गढ़वाल की पहाड़ियां खुद एलान कर रही हों कि हमारे बच्चे अब नेशनल (National Championship) में अपना परचम लहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। खचाखच भरे स्टेडियम और दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बालक वर्ग में पौड़ी गढ़वाल और बालिका वर्ग में पिथौरागढ़ हॉस्टल ने चैंपियनशिप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।
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इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको रिंग के अंदर की हर हलचल, विजेताओं की सूची और समापन समारोह की पूरी झलकियां विस्तार से बताएंगे।
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1. 24 हाई-वोल्टेज मुकाबले और बेस्ट बॉक्सर का खिताब

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चैंपियनशिप के अंतिम दिन कुल 24 फाइनल मुकाबले खेले गए। रिंग में उतरे नन्हे मुक्केबाजों ने अपनी तकनीक, फुर्ती और स्टेमिना से जजों और दर्शकों को हैरान कर दिया। हर पंच पर बजती तालियां बता रही थीं कि उत्तराखंड में बॉक्सिंग का भविष्य कितना उज्ज्वल है।
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किसे मिला 'बेस्ट बॉक्सर' का ताज? इस टूर्नामेंट में अपनी बेहतरीन तकनीक और अजेय प्रदर्शन के लिए दो खिलाड़ियों को विशेष सम्मान से नवाजा गया:
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    बेस्ट बॉक्सर (बालक): पौड़ी गढ़वाल के होनहार बॉक्सर अभिषेक ने अपने शानदार खेल से जजों का दिल जीता और बालक वर्ग में 'बेस्ट बॉक्सर' का खिताब अपने नाम किया।
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    बेस्ट बॉक्सर (बालिका): बागेश्वर की भूमिका बसेड़ा ने रिंग में बिजली जैसी फुर्ती दिखाई और बालिका वर्ग की सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज बनीं।
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उभरते हुए सितारे (Most Promising Boxer): भविष्य की उम्मीद माने जाने वाले 'मोस्ट प्रोमाइजिंग बॉक्सर' का खिताब इन खिलाड़ियों को मिला:
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    बालक वर्ग: रुद्रप्रयाग के प्रत्युष नेगी
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    बालिका वर्ग: पिथौरागढ़ की अंशिका आर्य
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2. चैंपियनशिप रिजल्ट: पौड़ी का पावर और पिथौरागढ़ का प्रहार

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इस चैंपियनशिप में दो जिलों का दबदबा साफ देखने को मिला। एक तरफ जहां पौड़ी गढ़वाल के लड़कों ने अपनी ताकत दिखाई, वहीं दूसरी तरफ पिथौरागढ़ की लड़कियों ने साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं।
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बालक वर्ग (Boys Category): बालक वर्ग की ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी पौड़ी गढ़वाल ने अपने नाम की। पौड़ी के मुक्केबाजों ने रणनीतिक खेल दिखाया। हालांकि, बालक वर्ग में पिथौरागढ़ हॉस्टल के खिलाड़ियों ने भी जबरदस्त टक्कर दी और कई गोल्ड मेडल बटोरे।
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    प्रमुख विजेता (बालक): धर्मेंद्र, विशाल, प्रत्युष, लकी, अभिषेक और अंश वीर ने अपने-अपने भार वर्ग में विजय पताका फहराई। इनकी तकनीक और डिफेंस देखकर लग रहा था कि ये राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड को पदक जरूर दिलाएंगे।
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बालिका वर्ग (Girls Category): बालिका वर्ग में पिथौरागढ़ हॉस्टल एकतरफा मजबूत रहा। 'मिनी स्पोर्ट्स हब' कहे जाने वाले पिथौरागढ़ की बेटियों ने रिंग में उतरते ही विपक्षी खिलाड़ियों को डिफेंसिव होने पर मजबूर कर दिया।
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    प्रमुख विजेता (बालिका): माया राय, गोदावरी, दिया, रिया तेलिया और रिया जोशी ने अपने मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की। इन खिलाड़ियों का फुटवर्क और पंचिंग एक्यूरेसी देखने लायक थी।
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3. रितु खंडूड़ी का संबोधन: 'भविष्य के ओलंपिक मेडलिस्ट यहीं हैं'

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प्रतियोगिता के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूड़ी भूषण (Ritu Khanduri Bhushan) मौजूद रहीं। कोटद्वार उनका अपना विधानसभा क्षेत्र भी है, इसलिए खिलाड़ियों के बीच उनका उत्साह देखते ही बन रहा था।
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मंच से खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए रितु खंडूड़ी ने भविष्य की बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा: "आज मैं इन बच्चों की आंखों में जो चमक देख रही हूं, वो साधारण नहीं है। यह चमक ओलंपिक और एशियाड के मेडल्स की है। कोटद्वार की इस धरती से आज बॉक्सिंग का जो नया इतिहास लिखा गया है, वह गवाह है कि हमारे पहाड़ के बच्चे अब सुविधाओं के अभाव का रोना नहीं रोते, बल्कि अपनी मेहनत से रास्ता बनाते हैं। ये सभी बच्चे भविष्य में उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगे, यह मेरा विश्वास है।"
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उन्होंने खिलाड़ियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार और खेल विभाग उनकी हर संभव मदद करेगा। उन्होंने कोच और अभिभावकों की भी सराहना की जो इन बच्चों को तराश रहे हैं।
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4. आयोजन और प्रबंधन: बीएफआई और स्थानीय सहयोग

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इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने में आयोजक मंडल की बड़ी भूमिका रही। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) के प्रतिनिधि अजय सिंह, कैप्टन देवी चंद्र, और मुखर्जी जी ने प्रतियोगिता के तकनीकी पहलुओं को बखूबी संभाला।
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    अनुशासन: 24 मुकाबलों के दौरान रिंग में रेफरी के निर्णय सर्वमान्य रहे और खिलाड़ियों ने खेल भावना (Sportsmanship) का परिचय दिया।
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    माहौल: कोटद्वार के स्थानीय निवासियों ने भी बड़ी संख्या में पहुंच कर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। हर अच्छे मूव पर 'भारत माता की जय' और 'उत्तराखंड की जय' के नारे गूंजते रहे।
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5. क्यों खास है यह जीत? (विश्लेषण)

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'खबरीलाल' की स्पोर्ट्स डेस्क का मानना है कि यह जीत सिर्फ मेडल तक सीमित नहीं है।
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    पहाड़ी स्टेमिना: अंडर-17 वर्ग यानी किशोरावस्था में पहाड़ के बच्चों का स्टेमिना मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा होता है। पौड़ी और पिथौरागढ़ की जीत इसी प्राकृतिक लाभ का परिणाम है।
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    स्पोर्ट्स हॉस्टल का योगदान: पिथौरागढ़ हॉस्टल और बालिका वर्ग में पिथौरागढ़ की जीत बताती है कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्पोर्ट्स हॉस्टल सही दिशा में काम कर रहे हैं। वहां मिल रही डाइट और ट्रेनिंग का असर अब गोल्ड मेडल के रूप में दिख रहा है।
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    रुद्रप्रयाग और बागेश्वर का उदय: बेस्ट बॉक्सर का खिताब बागेश्वर और रुद्रप्रयाग जैसे छोटे जिलों के खिलाड़ियों को मिलना यह संकेत है कि अब प्रतिभाएं सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं।
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6. आगे की राह: नेशनल चैंपियनशिप

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इस राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में गोल्ड और सिल्वर जीतने वाले खिलाड़ी अब राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप (National Boxing Championship) में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे। चयनकर्ताओं की नजर विशेष रूप से 'बेस्ट बॉक्सर' अभिषेक और भूमिका पर रहेगी। उम्मीद है कि कोटद्वार के इस रिंग से निकले ये 'पंच' देश के दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर देंगे।
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खेल प्रदेश बनता उत्तराखंड

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कोटद्वार में संपन्न हुई यह चैंपियनशिप एक संकेत है कि उत्तराखंड अब 'देवभूमि' के साथ-साथ 'खेल भूमि' बनने की ओर अग्रसर है। जिस तरह से हरियाणा बॉक्सिंग और कुश्ती का हब है, उसी तरह उत्तराखंड के बॉक्सर्स अब अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। पौड़ी की रणनीति और पिथौरागढ़ का आक्रामक खेल आने वाले समय में देश को कई मैरी कॉम और विजेंदर सिंह जैसे सितारे दे सकता है।
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'खबरीलाल' की टीम सभी विजेता खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देती है।
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रिपोर्टिंग: अनिल कुमार शर्मा, खबरीलाल विशेष संवाददाता स्थान: धामपुर, बिजनौर (यूपी) तारीख: 30 दिसंबर 2025