हरिद्वार (Haridwar News): सावन के पवित्र महीने में धर्मनगरी हरिद्वार हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंज रही है। लाखों की संख्या में शिवभक्त कांवड़िए पवित्र गंगाजल लेने के लिए देश के कोने-कोने से हरिद्वार पहुंच रहे हैं। लेकिन आस्था और उल्लास के इस माहौल के बीच शुक्रवार को एक ऐसी मनहूस खबर आई, जिसने पूरे प्रशासन और कांवड़ियों के जत्थों में शोक की लहर दौड़ा दी।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर के हृदय शिव चौक में अग्नि का तांडव: संजय गिफ्ट सेंटर के गोदाम में लगी भयानक आग, बाल-बाल बचा शहर
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हरिद्वार के ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र में स्थित जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर (Ganga Canal) में नहाते समय चार किशोर कांवड़ियों की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। ये चारों मृतक चंडीगढ़ से अपने अन्य साथियों के साथ गंगाजल लेने के लिए बड़ी श्रद्धा के साथ हरिद्वार आए थे। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में मातम पसर गया। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह हादसा कैसे हुआ और वो कौन सी वजहें थीं जिन्होंने इन चार किशोरों की जान ले ली।
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चंडीगढ़ से आया था जत्था, जल भरने से पहले नहाने उतरे थे गंगनहर में
\r\n\r\nजानकारी के अनुसार, सावन माह की कांवड़ यात्रा में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ से युवाओं और किशोरों का एक जत्था हरिद्वार पहुंचा था। लंबी यात्रा की थकान मिटाने और पवित्र गंगाजल अपनी कांवड़ में भरने से पहले, जत्थे में शामिल कुछ किशोर ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र के जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में नहाने के लिए उतर गए।
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यह क्षेत्र कांवड़ियों के बीच काफी परिचित है, लेकिन गंगनहर का बहाव और उसकी गहराई हमेशा से ही अनजान लोगों के लिए जानलेवा साबित होती रही है। चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए ये युवा नहर में नहा रहे थे। हंसी-मजाक का माहौल था, लेकिन उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि पानी के भीतर मौत उनका इंतजार कर रही है।
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मौत का साइलेंट ट्रैप: सिल्ट हटाने से बना था वो गहरा 'गड्ढा'
\r\n\r\nस्थानीय लोगों और प्रशासन के मुताबिक, यह हादसा सिर्फ लापरवाही का नतीजा नहीं था, बल्कि भौगोलिक परिस्थितियों के धोखे का भी परिणाम था। दरअसल, कुछ समय पहले सिंचाई विभाग द्वारा गंगनहर में सिल्ट (Silt) और गाद हटाने का काम किया गया था। सिल्ट सफाई के कारण नहर का जलस्तर (Water Level) किनारे पर काफी कम लग रहा था।
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पानी कम होने का भ्रम पाले हुए ये कांवड़िए किनारे से नहर के बीचों-बीच तक चले गए। लेकिन सिल्ट सफाई के कारण नहर के बीच में एक बेहद गहरा गड्ढा बन गया था, जो ऊपर से शांत बहते पानी में बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहा था। किनारे पर कम पानी देखकर नहाते-नहाते जैसे ही एक 16-18 वर्षीय किशोर उस गड्ढे के करीब पहुंचा, वह अपना संतुलन खो बैठा और सीधे उस गहरे भंवर में समाने लगा।
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दोस्ती की वो आखिरी कीमत: एक को बचाने उतरे और सबने दे दी जान
\r\n\r\nयह इस हादसे का सबसे रुला देने वाला पहलू है। जब पहला किशोर गहरे गड्ढे में फंसा और डूबने लगा, तो उसने मदद के लिए चीखना शुरू कर दिया। उसे पानी में गोते खाता और मौत से जूझता देख किनारे पर खड़े उसके तीन अन्य साथियों से रहा नहीं गया।
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बिना एक पल गंवाए, अपनी जान की परवाह किए बिना उन तीनों किशोरों ने अपने साथी को बचाने के लिए उस गहरे पानी में छलांग लगा दी। लेकिन वे भी गंगनहर की उस भ्रामक गहराई और पानी के नीचे चल रहे तेज अंडरकरंट (Undercurrent) का अंदाजा नहीं लगा सके। गहरे गड्ढे और पानी के तेज बहाव ने उन तीनों को भी अपनी चपेट में ले लिया। वहां मौजूद अन्य लोग जब तक कुछ समझ पाते या रस्सियां फेंककर मदद करते, तब तक देखते ही देखते चारों किशोर पानी की लहरों में पूरी तरह से लापता हो गए। घाट पर मौजूद लोगों की चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: कई घंटों की मशक्कत के बाद निकाले गए चारों शव
\r\n\r\nहादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही ज्वालापुर कोतवाली पुलिस, जल पुलिस (Water Police) और एसडीआरएफ (SDRF) के गोताखोरों की टीम भारी साजो-सामान के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई।
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अधिकारियों के निर्देश पर तुरंत गंगनहर में एक सघन रेस्क्यू अभियान (Rescue Operation) शुरू किया गया। गोताखोरों ने नहर की गहराई नापी और काफी दूर तक सर्च अभियान चलाया। चूंकि पानी का बहाव तेज था और सिल्ट के कारण दृश्यता (Visibility) कम थी, इसलिए शवों को ढूंढने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। कई घंटों की कड़ी जद्दोजहद के बाद, गोताखोरों ने चारों किशोरों के शव गंगनहर के उसी हिस्से से कुछ दूरी पर बरामद कर लिए। चारों को मृत अवस्था में बाहर निकाला गया। मृतकों की उम्र महज 16 से 18 वर्ष के बीच बताई जा रही है, जो उनके परिवारों के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं है।
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एसपी सिटी अभय सिंह का बयान और पुलिस कार्रवाई
\r\n\r\nघटनास्थल पर मौजूद पुलिस अधीक्षक नगर (SP City) अभय सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, "चंडीगढ़ से आए कांवड़ियों के जत्थे में से चार किशोर नहाते समय गहरे गड्ढे में डूब गए हैं। जल पुलिस की मदद से चारों शवों को रिकवर कर लिया गया है। पुलिस ने चारों शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिया है।"
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पुलिस ने मृतक किशोरों के पास मिले दस्तावेजों और उनके अन्य साथियों से पूछताछ के आधार पर उनकी पहचान सुनिश्चित की। इसके तुरंत बाद चंडीगढ़ पुलिस के माध्यम से मृतकों के परिजनों को इस मनहूस घटना की सूचना दे दी गई है। परिवारों के हरिद्वार पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। ज्वालापुर पुलिस इस पूरे मामले की वैधानिक जांच कर रही है।
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प्रशासन की सख्त अपील: "आस्था के साथ सावधानी भी है जरूरी"
\r\n\r\nइस दर्दनाक हादसे के बाद हरिद्वार जिला प्रशासन और पुलिस ने कांवड़ यात्रियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक कड़ा सुरक्षा अलर्ट (Safety Alert) और अपील जारी की है:
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- \r\n अनजान घाटों पर न जाएं: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालु केवल उन्हीं घाटों (जैसे हर की पैड़ी) पर स्नान करें जो सुरक्षित घोषित किए गए हैं और जहां जंजीरें (Chains) लगी हैं।\r\n \r\n
- \r\n गहराई का भ्रम जानलेवा: गंगनहर या गंगा नदी के जिन हिस्सों में नहाने की अनुमति नहीं है या जहां की गहराई की जानकारी नहीं है, वहां पानी में बिल्कुल न उतरें।\r\n \r\n
- \r\n बहाव से बचें: पहाड़ी नदियों और नहरों में पानी का अंडरकरंट बहुत तेज होता है, जो अच्छे-अच्छे तैराकों को भी मात दे देता है।\r\n \r\n
- \r\n हेल्पलाइन का उपयोग करें: किसी भी डूबने की स्थिति या आपातकाल में स्वयं पानी में कूदने के बजाय तुरंत वहां मौजूद गोताखोरों, जल पुलिस या 112 नंबर पर सूचना दें।\r\n \r\n
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निष्कर्ष: हरिद्वार का यह हादसा एक गहरा सबक छोड़कर गया है। जिन घरों से ये चार किशोर हंसी-खुशी कांवड़ लेने के लिए विदा हुए थे, अब वहां इनके शव पहुंचेंगे। सावन के इस पावन पर्व पर शिवभक्तों को यह समझना होगा कि आस्था अपनी जगह है, लेकिन पानी और प्रकृति के नियमों के साथ खिलवाड़ हमेशा भारी पड़ता है। प्रशासन भले ही कितने इंतजाम कर ले, लेकिन जब तक कांवड़िए खुद आत्म-अनुशासन और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगे, ऐसे हादसों को पूरी तरह रोकना असंभव है।