मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के सबसे प्रमुख और व्यस्त व्यावसायिक केंद्र, शिव चौक के पास शुक्रवार को एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे शहर की सांसें कुछ पल के लिए अटका दीं। शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके भगत सिंह रोड पर स्थित 'संजय गिफ्ट सेंटर' के एक बड़े गोदाम में शुक्रवार दोपहर अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि उसकी लपटें और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से ही देखा जा सकता था। गनीमत यह रही कि इस भयानक अग्निकांड में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, अन्यथा यह घटना शहर के इतिहास के सबसे बड़े हादसों में से एक बन सकती थी।READ ALSO:-प्यार, बेवफाई, एक टैटू और 3 गोलियां... मेरठ में आदित्य-अनुष्का के खौफनाक 'लव ट्राइएंगल' की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी
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दोपहर का वक्त और अचानक उठा धुएं का गुबार

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शुक्रवार का दिन मुजफ्फरनगर के बाजारों के लिए हमेशा की तरह व्यस्त था। भगत सिंह रोड पर ग्राहकों और व्यापारियों की भारी भीड़ थी। इसी बीच, दोपहर करीब 3:30 बजे संजय गिफ्ट सेंटर के बंद पड़े गोदाम के अंदर से रहस्यमयी तरीके से धुआं उठना शुरू हुआ। शुरुआत में आसपास के दुकानदारों को लगा कि शायद कहीं कूड़े में आग लगी होगी, लेकिन महज कुछ ही मिनटों में इस धुएं ने एक भयंकर काले गुबार का रूप ले लिया।
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देखते ही देखते आग की ऊंची और खौफनाक लपटें गोदाम की छत और रोशनदानों को फाड़ते हुए बाहर निकलने लगीं। जब तक लोग कुछ समझ पाते, आग ने पूरे गोदाम को अपने आगोश में ले लिया था। आग के इस भयानक रूप को देखकर पूरे बाजार में भगदड़ मच गई। लोग अपनी दुकानों के शटर गिराकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
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प्लास्टिक और कागज ने किया आग में घी का काम

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आग के इतनी तेजी से फैलने का सबसे बड़ा कारण गोदाम के भीतर रखा गया ज्वलनशील सामान था। सूत्रों और स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, संजय गिफ्ट सेंटर के इस गोदाम में भारी मात्रा में प्लास्टिक के खिलौने, गिफ्ट आइटम्स, थर्माकोल की पैकिंग, पॉलीथिन और कागज के कार्टन (गत्ते) रखे हुए थे। प्लास्टिक और कागज के इस विशाल भंडार ने आग में घी का काम किया।
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अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग का तापमान इतना अधिक बढ़ गया कि उसके पास खड़ा होना भी असंभव हो गया था। प्लास्टिक जलने के कारण उठने वाले जहरीले काले धुएं ने आसपास के इलाके में सांस लेना भी दूभर कर दिया। धुएं के कारण विजिबिलिटी (दृश्यता) लगभग शून्य हो गई थी, जिससे शुरुआती दौर में राहत कार्यों में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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आग की तीव्रता से भरभराकर गिरी दीवार, मचा हड़कंप

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इस अग्निकांड का सबसे खौफनाक मंजर तब सामने आया जब आग की भीषण तपिश और अंदर बने गैस के दबाव के कारण गोदाम के पिछले हिस्से की एक बड़ी दीवार तेज धमाके के साथ भरभराकर ढह गई। दीवार गिरने की आवाज सुनकर आसपास के रिहायशी मकानों में रहने वाले लोगों की चीख-पुकार मच गई।
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दीवार के मलबे और आग की लपटों का रुख पास के एक रिहायशी मकान की तरफ होने लगा। ऐसा लग रहा था मानो यह आग अब पूरे मोहल्ले को राख कर देगी। स्थानीय निवासियों ने तुरंत अपने घरों को खाली कर दिया और बच्चों तथा बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित गलियों की तरफ दौड़ पड़े। पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था।
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संकरी गलियों और भीड़ ने बढ़ाई दमकल विभाग की चुनौती

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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम और फायर ब्रिगेड अलर्ट मोड पर आ गए। मुजफ्फरनगर दमकल विभाग ने बिना कोई समय गंवाए तुरंत तीन बड़े फायर टेंडर (दमकल गाड़ियां) घटनास्थल की ओर रवाना कर दिए। लेकिन, दमकल कर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती घटनास्थल तक पहुंचना था।
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शिव चौक और भगत सिंह रोड का इलाका बेहद संकरा और घनी आबादी वाला है। संकरी गलियों, आड़े-तिरछे खड़े वाहनों और बेतहाशा भीड़ के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय पुलिस ने कड़ी मेहनत करके रास्ता खाली करवाया। जैसे ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, फायर फाइटर्स ने अपनी जान की परवाह किए बिना आग की लपटों से सीधा मोर्चा ले लिया।
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कई घंटों की जद्दोजहद के बाद मिली कामयाबी

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फायर कर्मियों ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत चारों तरफ से पानी की बौछार शुरू की। उनकी पहली प्राथमिकता आग को आसपास की दुकानों और सटी हुई रिहायशी इमारतों तक फैलने से रोकना था। दमकल कर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पास के उस मकान की तरफ बढ़ रही आग की लपटों को रोका, जिसकी दीवार गोदाम से सटी थी।
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लगातार कई घंटों तक पानी की बौछारें और केमिकल फोम का इस्तेमाल करने के बाद, शाम ढलते-ढलते आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। आग बुझने के बाद जब गोदाम का जायजा लिया गया, तो अंदर रखा लाखों रुपये का माल पूरी तरह जलकर राख हो चुका था।
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एसपी सिटी और सीएफओ ने संभाला मोर्चा, दिखाई तत्परता

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प्रशासनिक स्तर पर इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया गया। आग की भयावहता की खबर मिलते ही मुजफ्फरनगर के एसपी सिटी (SP City) श्री अमृत जैन और मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) भारी पुलिस बल के साथ तुरंत ग्राउंड जीरो पर पहुंच गए थे।
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अधिकारियों ने पहुंचते ही सबसे पहले रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान अपने हाथों में ली। एसपी सिटी के निर्देश पर पूरे बाजार क्षेत्र को सील कर दिया गया ताकि कोई आम नागरिक खतरे वाले क्षेत्र में न जा सके। सबसे समझदारी भरा कदम यह उठाया गया कि बिजली विभाग (पावर कॉरपोरेशन) से तुरंत संपर्क करके पूरे इलाके की हाईटेंशन और घरेलू बिजली आपूर्ति को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया। इससे शॉर्ट सर्किट से होने वाले किसी भी अतिरिक्त विस्फोट या दुर्घटना की आशंका खत्म हो गई।
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राहत की सांस और आगे की जांच

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इस घटना पर मीडिया से बातचीत करते हुए एसपी सिटी अमृत जैन ने बताया कि, "जैसे ही पुलिस और दमकल विभाग को घटना की सूचना मिली, हमारी संयुक्त टीमों ने चंद मिनटों में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। तीन फायर टेंडरों की मदद से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया है। आग की लपटें पास के एक मकान तक पहुंच गई थीं, लेकिन हमारे जवानों की मुस्तैदी से उसे आगे फैलने से रोक दिया गया। जनहानि शून्य है, जो सबसे बड़ी राहत की बात है।"
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फिलहाल, पुलिस और फोरेंसिक टीमें आग लगने के मुख्य कारणों की जांच कर रही हैं। प्रथम दृष्टया आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, लेकिन अधिकारी हर एंगल से मामले की तफ्तीश कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर से शहर के घने और भीड़भाड़ वाले बाजारों में फायर सेफ्टी (अग्नि सुरक्षा) के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर एनओसी और सुरक्षा उपकरणों की मौजूदगी की भी समीक्षा कर सकता है।
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संजय गिफ्ट सेंटर का यह अग्निकांड मुजफ्फरनगर के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अगर यह घटना रात के समय होती, जब बाजार बंद होते हैं और दमकल को सूचना मिलने में देरी होती, तो नुकसान का अंदाजा लगाना भी मुश्किल था। यह घटना सिखाती है कि व्यापारिक क्षेत्रों में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम कितने जरूरी हैं।
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