मेरठ (Meerut): पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP), जिसे अक्सर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला क्षेत्र माना जाता है, वहां एक बार फिर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सरधना (Sardhana) विधानसभा सीट, जो हमेशा से बाहुबल और हाई-प्रोफाइल टक्कर का गवाह रही है, वहां 2022 के विधानसभा चुनाव की रंजिश अभी भी ठंडी नहीं पड़ी है। सरधना के वर्तमान समाजवादी पार्टी विधायक अतुल प्रधान (Atul Pradhan) और उनके चिर-प्रतिद्वंद्वी, भाजपा के फायरब्रांड नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम (Sangeet Som) के बीच जुबानी जंग ने अब एक विस्फोटक रूप ले लिया है।READ ALSO:-यूपी में 'वोटर लिस्ट' पर चली चुनाव आयोग की कैंची: 15 करोड़ में से 2.89 करोड़ नाम हुए 'गायब'; लखनऊ-गाजियाबाद में सबसे ज्यादा छंटनी, जानें क्या आपका भी नाम कट गया?
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ताजा घटनाक्रम में, सपा विधायक अतुल प्रधान ने संगीत सोम पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा हमला बोला है। अपने आवास पर आयोजित एक बेहद आक्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अतुल प्रधान ने संगीत सोम की 'कट्टर हिंदूवादी' छवि पर सीधा प्रहार करते हुए उन्हें 'मीट कारोबारी' करार दिया है। प्रधान ने न केवल सोम के कथित कारोबार के कच्चे चिट्ठे खोले, बल्कि उनकी सुरक्षा, संपत्ति और हाल ही में मिली विदेशी धमकियों को भी एक 'सुनियोजित ड्रामा' और 'प्रोपगेंडा' करार दिया।
\r\n\r\n\r\n \r\n— Atul Pradhan (@atulpradhansp) January 7, 2026\r\n\r\n\r\n
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'ख़बरीलाल' की इस विशेष और विस्तृत रिपोर्ट में हम अतुल प्रधान द्वारा लगाए गए उन 5 बड़े और गंभीर आरोपों की गहराई में जाएंगे, जिन्होंने यूपी की राजनीति में भूचाल ला दिया है। आखिर क्या है मोइन कुरैशी कनेक्शन? 66 करोड़ की सुरक्षा का सच क्या है? और शाहरुख खान विवाद में अतुल प्रधान ने एंट्री क्यों ली?
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आरोप नंबर-1 - "मुखौटा हिंदुत्व का, पीछे मीट का धंधा"
\r\n\r\nअतुल प्रधान ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत ही सबसे विस्फोटक आरोप से की। उन्होंने संगीत सोम की उस छवि को निशाना बनाया, जिसके दम पर वह पश्चिमी यूपी में अपनी राजनीति करते आए हैं।
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मोइन कुरैशी के साथ पार्टनरशिप का दावा
\r\n\r\nप्रधान ने पत्रकारों के सामने कुछ दस्तावेज लहराते हुए दावा किया कि संगीत सोम का संबंध विवादास्पद मीट कारोबारी मोइन कुरैशी (Moin Qureshi) से है।
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प्रधान ने कहा, "संगीत सोम जनता के बीच खुद को एक बड़ा हिंदूवादी नेता बताते हैं, धर्म की रक्षा की बातें करते हैं, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। पर्दे के पीछे यह मोइन कुरैशी के साथ मिलकर मीट का बड़ा कारोबार करते हैं। जो व्यक्ति मांस के व्यापार से मुनाफा कमाता हो, वह दूसरों को राष्ट्रवाद और धर्म का पाठ कैसे पढ़ा सकता है?"
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12-15 कंपनियों का 'मकड़जाल'
\r\n\r\nअतुल प्रधान ने आरोपों को विस्तार देते हुए कहा कि संगीत सोम का यह कारोबार छोटा-मोटा नहीं है, बल्कि यह एक संगठित नेटवर्क है।
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- \r\n डायरेक्टरशिप का खेल: प्रधान ने आरोप लगाया कि संगीत सोम ने अपने कारोबार को छिपाने के लिए परिवार के सदस्यों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा, "इनकी 12 से 15 कंपनियां हैं। या तो ये खुद उनमें डायरेक्टर हैं, या इनकी पत्नी डायरेक्टर हैं, या फिर इनकी साली डायरेक्टर हैं। यह सब रिकॉर्ड पर मौजूद है।"\r\n \r\n
- \r\n विदेशों में सप्लाई: प्रधान ने दावा किया कि सोम की फैक्ट्रियों में कटने वाला मीट विदेशों में सप्लाई (Export) किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या यह दोहरा चरित्र नहीं है? एक तरफ आप गोरक्षा और पशु प्रेम की बात करते हैं, और दूसरी तरफ जानवरों को काटकर विदेश भेजते हैं?"\r\n \r\n
- \r\n तीखा तंज: अपनी बात को खत्म करते हुए अतुल प्रधान ने संगीत सोम पर तीखा तंज कसा, "ऐसा तो नहीं है कि आप (संगीत सोम) नए-नए हिंदू बने हैं? आपका असली चेहरा जनता के सामने आना चाहिए।"\r\n \r\n
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भाग-2: शाहरुख खान और 'गद्दार' पॉलिटिक्स - प्रधान का पलटवार
\r\n\r\nसरधना की यह लड़ाई बॉलीवुड तक जा पहुंची है। यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब हाल ही में संगीत सोम ने बॉलीवुड के 'किंग खान' यानी शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) को 'गद्दार' कह दिया था।
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क्या था मामला?
\r\n\r\nदरअसल, शाहरुख खान की आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान या किसी अन्य खिलाड़ी को शामिल करने को लेकर विवाद हुआ था। संगीत सोम ने इसका विरोध करते हुए शाहरुख खान की देशभक्ति पर सवाल उठाए थे और उन्हें गद्दार कहा था।
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अतुल प्रधान का जवाब:
\r\n\r\nइस मुद्दे पर अतुल प्रधान ने संगीत सोम को आईना दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा:
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\r\n\r\n\r\n"एक तरफ देश की केंद्र सरकार और राज्य सरकारें शाहरुख खान को सम्मान देती हैं, उन्हें बड़े-बड़े अवॉर्ड्स से नवाजा जाता है। दूसरी तरफ, भाजपा का ही एक पूर्व विधायक उन्हें गद्दार बताता है। यह कैसी विरोधाभासी राजनीति है? अतुल प्रधान ने कहा कि संगीत सोम सिर्फ हिंदू-मुस्लिम की सियासत करके अपनी डूबती हुई राजनीतिक नैया को पार लगाना चाहते हैं। जो व्यक्ति खुद मुस्लिम कारोबारियों (जैसे मोइन कुरैशी) के साथ पार्टनरशिप में मीट बेचता है, उसे शाहरुख खान जैसे कलाकार को गद्दार कहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"\r\n
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प्रधान ने यह भी कहा कि अगर विरोध करना ही है, तो सरकार को BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) से कहना चाहिए कि वह बांग्लादेश के साथ क्रिकेट के सभी संबंध तत्काल प्रभाव से खत्म कर दे। सिर्फ एक अभिनेता को निशाना बनाना ओछी राजनीति है।
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सुरक्षा का गणित - 11 साल, 66 करोड़ रुपये
\r\n\r\nअतुल प्रधान ने संगीत सोम को मिली 'Z' श्रेणी की सुरक्षा (Z-Category Security) पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सुरक्षा पर होने वाले खर्च का एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया, जिसने करदाताओं (Taxpayers) के कान खड़े कर दिए हैं।
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सरकारी खजाने पर बोझ?
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अतुल प्रधान ने आरोप लगाया:
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- \r\n "पिछले 11 सालों में सरकार ने संगीत सोम की सुरक्षा पर 66 करोड़ रुपये जनता की गाढ़ी कमाई के खर्च किए हैं। यह पैसा शिक्षा, स्वास्थ्य या सड़कों पर खर्च हो सकता था।"\r\n \r\n
- \r\n "एक पूर्व विधायक, जो अब चुनाव हार चुका है, उसे इतनी भारी-भरकम सुरक्षा (Black Cat Commandos, Pilot Vehicles) क्यों दी जा रही है? यह सुरक्षा का सरासर दुरुपयोग है।"\r\n \r\n
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रसूख और कब्जे का आरोप:
\r\n\r\nप्रधान यही नहीं रुके। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संगीत सोम अपनी सरकारी सुरक्षा (गनर और पुलिसकर्मी) का इस्तेमाल अपनी जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि "जमीनों पर कब्जा करने" और "गरीबों को डराने-धमकाने" के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्दीधारी सुरक्षाकर्मियों को साथ लेकर वे विवादित जमीनों पर जाते हैं ताकि सामने वाले पक्ष को डराया जा सके।
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बांग्लादेशी धमकी का सच - खतरा या 'प्रोपगेंडा'?
\r\n\r\nहाल ही में मीडिया में खबरें आई थीं कि संगीत सोम को बांग्लादेश (Bangladesh) से जुड़े एक नंबर से जान से मारने और बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सोम ने दावा किया था कि हिंदूवादी राजनीति करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अतुल प्रधान ने इस दावे की हवा निकालते हुए इसे एक 'सुनियोजित ड्रामा' करार दिया।
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"सुरक्षा बचाने का पैंतरा"
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अतुल प्रधान ने तर्क दिया:
\r\n\r\n"दरअसल, संगीत सोम की सुरक्षा की समीक्षा (Security Review) होने वाली थी। चूंकि वे अब विधायक नहीं हैं, सरकार शायद उनकी सुरक्षा घटाने या वापस लेने पर विचार कर रही थी। अपनी Z-श्रेणी की सुरक्षा छिनने के डर से उन्होंने यह नया 'प्रोपगेंडा' रचा है। बांग्लादेश से धमकी की बात सिर्फ इसलिए फैलाई गई ताकि खुफिया एजेंसियां उन्हें हाई-रिस्क कैटेगरी में रखें और उनकी सुरक्षा बरकरार रहे।"
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प्रधान ने पुराने मामलों को याद दिलाते हुए कहा कि पहले भी संगीत सोम के घर पर हमले और गोलीबारी की खबरें आई थीं, लेकिन पुलिस आज तक उस मामले का पर्दाफाश नहीं कर पाई। प्रधान का इशारा था कि वे हमले भी शायद सहानुभूति और सुरक्षा पाने के लिए खुद ही प्रायोजित किए गए थे। उन्होंने मांग की कि इस धमकी भरे कॉल की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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अवैध शराब और संपत्ति की जांच - CBI की मांग
\r\n\r\nमीट कारोबार के अलावा, अतुल प्रधान ने संगीत सोम पर अवैध शराब (Illegal Liquor) के कारोबार में लिप्त होने का भी आरोप लगाया। प्रधान ने कहा कि सरधना और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब का जो जाल फैला है, उसके तार कहीं न कहीं पूर्व विधायक से जुड़े हैं।
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संपत्तियों की जांच:
\r\n\r\nअतुल प्रधान ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में सबसे बड़ी मांग रखी। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से अपील की:
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- \r\n "संगीत सोम की संपत्तियों (Assets) और उनकी तमाम बेनामी कंपनियों की CBI जांच कराई जाए।"\r\n \r\n
- \r\n "दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। एक जनप्रतिनिधि की संपत्ति इतनी तेजी से कैसे बढ़ी? उनकी कंपनियों में पैसा कहां से आ रहा है? क्या यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं है? सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए।"\r\n \r\n
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सरधना का 'सियासी महाभारत' (2012 से 2026 तक)
\r\n\r\nसरधना विधानसभा सीट पर अतुल प्रधान और संगीत सोम के बीच की अदावत (Rivalry) पश्चिमी यूपी की सबसे चर्चित राजनीतिक दुश्मनी में से एक है।
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इतिहास और संघर्ष:
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- \r\n संगीत सोम का उदय: 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद संगीत सोम हिंदुत्व के पोस्टर बॉय बनकर उभरे थे। उन्होंने 2012 और 2017 में सरधना से जीत दर्ज की थी।\r\n \r\n
- \r\n अतुल प्रधान का संघर्ष: समाजवादी पार्टी के छात्र नेता से मुख्यधारा की राजनीति में आए अतुल प्रधान ने लंबे समय तक सरधना में जमीन तैयार की।\r\n \r\n
- \r\n 2022 का 'गेमचेंजर' चुनाव: 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अतुल प्रधान ने एक बड़ा उलटफेर किया। उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता संगीत सोम को 18,000 से अधिक वोटों से हराकर न केवल उनकी हैट्रिक रोकी, बल्कि उनके गढ़ में सेंध लगा दी।\r\n \r\n
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हार के बाद भी नहीं थमे हमले:
\r\n\r\nचुनाव हारने के बाद भी संगीत सोम क्षेत्र में सक्रिय हैं और लगातार विवादित बयान देकर सुर्खियों में रहते हैं। वहीं, अतुल प्रधान एक आक्रामक विधायक की भूमिका में हैं और सोम को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते। प्रधान का यह ताजा हमला उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे सोम की 'कोर इमेज' (हिंदुत्व) को ध्वस्त करना चाहते हैं।
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इन आरोपों के क्या मायने हैं?
\r\n\r\nराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अतुल प्रधान द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर और रणनीतिक हैं।
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- \r\n इमेज पर वार: संगीत सोम की पूरी राजनीति 'कट्टर हिंदुत्व' और 'गोरक्षा' के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्हें 'मीट कारोबारी' साबित करके अतुल प्रधान उनके कोर वोटर बेस (Core Voter Base) में भ्रम पैदा करना चाहते हैं।\r\n \r\n
- \r\n भ्रष्टाचार का मुद्दा: 66 करोड़ की सुरक्षा और अवैध संपत्ति का मुद्दा उठाकर प्रधान खुद को आम जनता के पैसे का पहरेदार और सोम को 'सिस्टम का दुरुपयोग करने वाला' नेता साबित करना चाहते हैं।\r\n \r\n
- \r\n सरकार पर दबाव: सीबीआई जांच की मांग करके उन्होंने गेंद योगी सरकार के पाले में डाल दी है। अगर जांच नहीं होती, तो सपा इसे 'भ्रष्टाचारियों को संरक्षण' के रूप में पेश करेगी।\r\n \r\n
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क्या खामोश रहेंगे संगीत सोम?
\r\n\r\nसपा विधायक द्वारा दागे गए इन पांच सियासी 'मिसाइलों' के बाद अब सबकी नजरें संगीत सोम पर टिकी हैं। मीट कारोबार, सुरक्षा का दुरुपयोग और अवैध संपत्ति—ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर चुप्पी साधना किसी भी नेता के लिए नुकसानदेह हो सकता है। क्या संगीत सोम इन दस्तावेजों को फर्जी बताएंगे? या वे अतुल प्रधान पर मानहानि का दावा करेंगे?
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फिलहाल, सरधना का सियासी पारा सातवें आसमान पर है और आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग और तीखी होने के आसार हैं। 'ख़बरीलाल' इस खबर पर लगातार बना हुआ है। जैसे ही संगीत सोम का पक्ष सामने आएगा, हम आपको सबसे पहले अपडेट करेंगे।
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आरोपों की चेकलिस्ट
\r\n\r\n| \r\n आरोप \r\n | \r\n \r\n विवरण \r\n | \r\n
| \r\n मीट कारोबार \r\n | \r\n \r\n मोइन कुरैशी के साथ पार्टनरशिप, 12-15 कंपनियों में डायरेक्टरशिप, विदेशों में सप्लाई। \r\n | \r\n
| \r\n शाहरुख खान विवाद \r\n | \r\n \r\n खुद मीट बेचते हैं, लेकिन SRK को गद्दार कहते हैं। यह दोहरा चरित्र है। \r\n | \r\n
| \r\n सुरक्षा का दुरुपयोग \r\n | \r\n \r\n 11 साल में 66 करोड़ खर्च। सुरक्षा का इस्तेमाल जमीन कब्जाने में किया। \r\n | \r\n
| \r\n फर्जी धमकी \r\n | \r\n \r\n बांग्लादेशी धमकी को सुरक्षा बचाने का 'ड्रामा' बताया। \r\n | \r\n
| \r\n CBI जांच \r\n | \r\n \r\n अवैध शराब और बेहिसाब संपत्ति की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग। \r\n | \r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.