मेरठ (Khabreelal): उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए खौफनाक Saurabh Rajput Murder Case में जिला अदालत ने अपना अहम फैसला सुनाया है। पति की हत्या कर शव को नीले ड्रम में छिपाने के आरोप में कोर्ट ने मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया है। बुधवार शाम जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत इस मामले में 14 अक्टूबर को दोनों दोषियों को सजा सुनाएगी।

कोर्ट की अहम टिप्पणी: 'समाज में बढ़ता है असुरक्षा का भाव' फैसला सुनाते हुए जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों से समाज में असुरक्षा और डर का माहौल पैदा होता है, जिसका सीधा असर आम लोगों की सोच पर पड़ता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय व्यवस्था का मुख्य काम लोगों में सुरक्षा का भरोसा जगाना और कानून पर विश्वास बनाए रखना है। जज ने कहा कि अदालत की जिम्मेदारी केवल सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हितों का ध्यान रखना भी जरूरी है। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने शव के टुकड़े कर ड्रम में छिपाने की घटना को बेहद गंभीर और जघन्य अपराध माना है।

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दोषी करार होते ही रोने लगे मुस्कान और साहिल बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मेरठ जेल से जुड़े दोनों आरोपियों को जज ने दोषी ठहराया। जज ने दोनों से पूछा कि उनके अपराध के लिए उन्हें क्या सजा दी जानी चाहिए? इस सवाल पर मुस्कान और साहिल खामोश रहे और फिर फूट-फूटकर रोने लगे। वहीं, कोर्ट का फैसला सुनकर सौरभ के भाई राहुल और मां रेनू देवी भी अदालत में भावुक हो गए। पीड़ित पक्ष के वकीलों, केके चौबे और विजय बहादुर ने अदालत का आभार जताते हुए दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की है।

जेल में बेचैन हैं दोनों, निगरानी बढ़ाई गई दोषी ठहराए जाने के बाद मेरठ जेल में बंद मुस्कान और साहिल की बेचैनी बढ़ गई है। जेल सूत्रों के अनुसार, दोनों ने रात का खाना भी कम खाया और लगातार रोते रहे। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि सुरक्षा और मानसिक स्थिति को देखते हुए दोनों की निगरानी सख्त कर दी गई है। उन्होंने बताया कि मुस्कान पिछले तीन दिनों से लगातार पूजा-पाठ कर रही है, जबकि साहिल पूरी तरह शांत है। पिछले 17 महीनों में मुस्कान से मिलने जेल में कोई नहीं आया है, जबकि साहिल से मिलने अब उसका भाई आता है। जेल प्रशासन जरूरत पड़ने पर दोनों की काउंसलिंग भी करा सकता है।

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